आख़िर क्यों गहरा गया क़तर संकट?

  • 17 जून 2017
सऊदी अरब में क़तर एयरवेज़ के दफ़्तार के सामने से गुज़रते एक व्यक्ति इमेज कॉपीरइट AFP/Getty Images
Image caption सऊदी अरब के बाद कई खाड़ी देशों ने क़तर के साथ अपने राजनयिक संबंध तोड़ दिए हैं.

जब कुछ अरब देशों ने क़तर पर अभूतपूर्व प्रतिबंध लगाए तो इस प्रायद्वीप के लोगों को शायद बुरा होने की उम्मीद हो गई थी.

लेकिन जिस तेज़ी से ये प्रतिबंध लगाए गए वो इस छोटे से देश में रहने वाले निवासियों के लिए चौंकाने वाली बात थी.

कथित तौर पर चरमपंथ का समर्थन करने के आरोप में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और मिस्र ने क़तर के साथ अपने राजनयिक रिश्ते तोड़ लिए थे.

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तुर्की सैन्यबलों की तैनाती से संबंधित बिल

पड़ोसी देशों के क़तर को सज़ा देने के लिए उठाए गए कदमों की घोषणा के दो दिन बाद ही तुर्की ने क़तर के लिए अपने सैन्यबलों की तैनाती की अनुमति दे दी.

यह कदम स्पष्ट रूप से क़तर के समर्थन के लिए था, क्योंकि उस पर दबाव बढ़ रहा था और अधिक देश सऊदी-नेतृत्व वाले खेमे में शामिल हो रहे थे.

वास्तव में कुछ समय पहले बिल बनाया गया था, लेकिन क़तर संकट से बाद तुर्की की संसद ने जल्द इस पर काम करते हुए इसे स्वीकृति दे दी.

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क़तर पर हुकूमत करने वाला खानदान

तुर्की की सरकारी मीडिया अनाडोलु के अनुसार सोमवार को तुर्की की सेना की एक टीम ने सैन्यबलों की तैनाती और उसके समन्वय के सिलसिले में क़तर का दौरा किया.

क़तर में पहले ही तुर्की का एक सैन्य अड्डा है, जहां सौ से अधिक तुर्की सैनिक रह सकते हैं.

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Image caption रियाद में हाल में क़तर के अमीर शेख़ तमीम बिन हमद अल-थानी और अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की मुलाक़ात हुई थी. ट्रंप ने क़तर के ख़िलाफ़ उठाए गए कदमों की समर्थन किया है.

आतंक की सूची

सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और मिस्र ने क़तर पर दबाव बनाए रखने के लिए एक टेरर सूची जारी की जिसमें उन लोगों और संगठनों के नाम थे जिनका संबंध क़तर से था.

इन चारों देशों ने एक साझा वक्तव्य जारी किया जिसमें उन्होंने कहा कि "वो आतंकवादियों की हरकतों और चाहे जो भी स्रोत हो वो चरमपंथ के लिए मिलने वाले धन के ख़िलाफ़ लड़ाई जारी रखेंगे."

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इस सूची में 59 लोगों और 12 संगठनों का नाम था जिनमें से कुछ क़तर में थे.

क़तर के विदेश मंत्री ने इस साझा वक्तव्य का ये कहते हुए खंडन किया "इसमें कई बेबुनियाद आरोप लगाए गए हैं."

अमरीका के साथ हथियारों का सौदा

एक तरफ जहां अमरीकी राष्ट्रपति ने क़तर के ख़िलाफ़ लगाए गए प्रतिबंधों का समर्थन किया है, दूसरी तरफ उनके प्रशासन ने क़तर के साथ 12 खरब अमरीकी डॉलर का हथियारों के सौदे को मंज़ूरी दे दी.

इस सौदे के तहत क़तर अमरीका से एफ़-15 लड़ाकू विमान खरीदेगा.

पेंटागन के अनुसार इस सौदे से "अमरीका और क़तर के बीच सुरक्षा सहयोग और बढ़ेगा."

मध्य पूर्व में अमरीका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा अल-उबैद भी क़तर की ही ज़मीन पर है. इसका इस्तेमाल अमरीकी नेतृत्व में सीरिया और ईरान में कथित इस्लामिक चरमपंथी समूह इस्लामिक स्टेट पर हमले करने के लिए किया जाता है.

क़तर के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि "ये सौदा इस बात का संकेत है कि अमरीका हमारे साथ है और हमने कभी इस पर संदेह नहीं किया."

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अमरीका के लिए क़तर के दूत ने भी अपने ट्विटर पर ये संदेश पोस्ट किया कि अमरीका के दो जंगी जहाज़ साझा अभ्यास के लिए दोहा पहुंचे हैं.

मेशल हमद अल-थानी ने कहा कि "ये कदम दोनों देशों के सहयोग की ताकत को दर्शाता है."

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Image caption जेद्दा में सऊदी अरब के सुल्तान सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ अल-सऊद के साथ कुवैत के अमीर सबा अल-अहमद अल-जबर अल-सबाह.

संकट में मध्यस्थता

क़तर संकट के शुरू होने के बाद क़तर और खाड़ी देशों में बातचीत करने के लिए कुवैत ने मध्यस्थ की भूमिका अपना ली है.

क़तर पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद इलाके में शांति स्थापित करने के लिए कुवैत के अमीर शेख़ सबा अल-अहमद अल-जबर अल-सबाह ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा की. लेकिन उनकी मुलाकातें बेनतीजा रहीं.

उन्होंने चेतावनी दी है कि मौजूदा संकट के "उम्मीद से बदतर परिणाम होंगे."

तुर्की भी मामले में मध्यस्तता के लिए कोशिशें कर रहा है.

तुर्की के विदेश मंत्री ने कुवैत और क़तर का दौरा किया और विवाद में शामिल देशों में बीच "सीधी बातचीत" की अपील की.

संयुक्त राष्ट्र, जर्मनी और ब्रिटेन ने भी इस मामले के राजनयिक हल ढ़ूढ़े जाने की अपील की है ताकि इलाके में तनाव की स्थिति ना रहे.

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