झुग्गियां हुईं महंगी, ब्राज़ील के ग़रीब खाली इमारतों में रहने को मजबूर

  • 17 जून 2017

फ़वेला यानी झुग्गियों की क़ीमते बढ़ने के बाद अब ब्राज़ील के ग़रीब लोग छोड़ दी गईं पुरानी सरकारी इमारतों में रहने को मजबूर हैं.

ब्राज़ील में सरकार ने आवासीय सुधारों के लिए अरबों डॉलर ख़र्च किए लेकिन रियो के गरीबों को इसका फ़ायदा मिलना अभी बाकी है.

इमेज कॉपीरइट Tariq Zaidi

फ़ोटोग्राफ़र तारिक़ ज़ैदी मानते हैं कि इस समुदाय को आपसी सौहार्द, सम्मान और अपने घर पर गर्व की भावना एक धागे में बांधे रखती है.

2016 ओलंपिक खेल और 2014 फ़ुटबॉल विश्व कप की मेज़बानी करने वाले ब्राज़ील ने रियो के फ़ेवला में रहने वाले लोगों के जीवन में सुधार करने का वादा किया था.

लेकिन सरकार के इन झुग्गी-बस्तियों में सुधार पर अरबों डॉलर करने का एक ऐसा नतीजा भी हुआ है जो किसी ने नहीं चाहा था.

यहां अब किराया इतना बढ़ गया है कि ये ग़रीबों की पहुंच से बाहर हो गया है और सबसे ग़रीब लोग अपने घर छोड़कर खाली पड़ी पुरानी सरकारी इमारतों में रहने के मजबूर हैं.

मारकाना स्टेडियम से एक मील कम दूरी पर स्थिति फ़वेला मैनग्वेरा में सैकड़ों परिवार ऐसी खाली इमारतों में रहने को मजबूर हैं जिनमें न पानी की आपूर्ति होती है और न बिजली आती है.

यह साफ़-सफ़ाई की भी कोई व्यवस्था नहीं है.

इमेज कॉपीरइट Tariq Zaidi

16 साल की पामेला अपनी मां और 7 महीने की बेटी के साथ उस इमारत में रहती हैं जिसमें कभी ब्राज़ील का इंस्टीट्यूट ऑफ़ जियोग्राफ़ी एंड स्टेटि्स्टिक्स (आईबीजीई) था.

इस इमारत को संस्थान ने 17 साल पहले खाली कर दिया था. अब यहां क़रीब सौ परिवार रहते हैं.

इमेज कॉपीरइट Tariq Zaidi

पामेला इस इमारत में 15 साल से रह रही हैं. उनकी मां यहां आकर रहने वाली दूसरी महिला थीं.

लेकिन ऐसे लोग जो अब फ़ेवाल में किराया देने में असमर्थ हैं यहां आकर रह रहे हैं. हर सप्ताह यहां नए परिवार पहुंच रहे हैं.

रियो में क़रीब बीस लाख लोग जो कुल आबादी के 30 प्रतिशत हैं फ़वेला में रहते हैं. ऐसी बस्तियों में सफ़ाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा के पर्याप्त इंतेज़ाम नहीं होते हैं.

इन बस्तियों में रह रहे लोगों के जीवन में सुधार के लिए 2.6 अरब डॉलर का कार्यक्रम चलाया गया लेकिन इसका कोई ख़ास असर नहीं हुआ.

इमेज कॉपीरइट Tariq Zaidi

खाली कर दी गई आईबीजीई की इमारत में 2012 तक सांस्कृतिक केंद्र खोलने की योजना थी. लेकिन अभी तक यहां कुछ नहीं बदला है.

इमेज कॉपीरइट Tariq Zaidi

12 वरषीय टायना आईबीजीई इमारत में चार-पांच साल से रह रही हैं. रियो में ब्राज़ील के किसी भी अन्य नगर के मुक़ाबले ज़्यादा लोग फ़वेला में रहते हैं.

यदि रियो के सभी फ़वेला को एक जगह कर दिया जाए तो ये देश का सातवां सबसे ज़्यादा आबादी वाला शहर होगा. 2013 की एक जनगणना के मुताबिक फ़वेला में रहने वाले 32 प्रतिशत लोग खुद को मज़दूर वर्ग का मानते हैं जबकि 65 प्रतिशत मध्यमवर्ग का बताता है.

इमेज कॉपीरइट Tariq Zaidi

छोड़ दी गईं इमारतों के खाली क्षेत्र का इस्तेमाल समुदाय कर रहे हैं.

विला दो मेट्रो फ़वेला के पार्किंग कंपाउंड में डांस क्लास चल रही है.

इमेज कॉपीरइट Tariq Zaidi
इमेज कॉपीरइट Tariq Zaidi

आईबीजीई इमारत में बच्चे साइकलि चलाते हैं, अपने छोटे-भाई बहनों का ध्यान रखते हैं.

यहां रह रहे अधिकतर परिवारों के घर पानी नहीं आता है. इमारत के कुछ हिस्सों में ही पानी आता है जहां से लोगों को इसे भरकर लाना होता है.

इमेज कॉपीरइट Tariq Zaidi
इमेज कॉपीरइट Tariq Zaidi

विला डो मेट्रो में औरतें अपनी बाल्टियां भरने का इंतेज़ार कर रही हैं.

इमेज कॉपीरइट Tariq Zaidi

रियो की तीस प्रतिशत आबादी ऐसे इलाक़ों में रहती है जहां साफ-सफ़ाई की कोई व्यवस्था नहीं है.

इमेज कॉपीरइट Tariq Zaidi

विला डो मेट्रो के बाहर कूड़े का ढेर जमा है.

इमेज कॉपीरइट Tariq Zaidi

क्रिस्टीन विला डो मेट्रो की एक खाली पड़ी इमारत में चार-पांच साल से रह रहीं हैं. उनके पांच बच्चे हैं.

डाटा पॉपुलर इंस्टीट्यूट के डाटा के मुताबिक फ़वेला में रहने वाले 42 फ़ीसदी परिवारों में प्रमुख महिला हैं.

इमेज कॉपीरइट Tariq Zaidi

अंतिम छोर पर होने के बावजूद ये समुदाय सहभागिता और सहयोग पर आधारित समाज बनाने की कोशिश कर रहा है.

इस घर पर बनी इस ग्राफ़िटी में संदेश लिखा है- "हम सब इंसान हैं."

इमेज कॉपीरइट Tariq Zaidi

बजट की भारी कटौती का सामना कर रहे रियो में लोगों के जीवन में सुधार की गुंज़ाइश बहुत कम ही नज़र आती है.

तमाम मुश्किलों के बावजूद शोध में शामिल हो दो-तिहाई लोगों का कहना था कि वो अपना इलाका छोड़कर नहीं जाएंगे.

वो आपसी सौहार्द, सम्मान और अपने घर के प्रति गर्व की भावना को यहीं रहने की अहम वजह बताते हैं.

इमेज कॉपीरइट Tariq Zaidi

सभी तस्वीरें © Tariq Zaidi ने ली हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित इंटरनेट लिंक

बीबीसी बाहरी इंटरनेट साइट की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है