पुर्तगाल आगः पानी के टैंक में छिपकर 12 लोगों ने जान बचाई

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पुर्तगाल में जंगल की भीषण आग में फंसे 12 लोगों ने पानी के एक टैंक में छिपकर जान बचाई.

95 वर्ष की एक विकलांग बुज़ुर्ग महिला और निवासियों ने टैंक में क़रीब छह घंटे बिताए.

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बाल बाल बचे एक व्यक्ति ने बताया, "अगर ये टैंक नहीं होता तो हम लोग मर गए होते."

मध्य पुर्तगाल में लगी आग से 62 लोगों की जानें चली गईं. इनमें से ज़्यादातर वो लोग थे जो इलाक़े से निकलने की कोशिश में कार के अंदर बैठे थे.

मारिया डु सिल्वा को हीरो माना जा रहा है कि क्योंकि उन्होंने अपने घर के पानी के टैंक का इस्तेमाल आईसी8 सड़क पर फंसे निवासियों को बचाने के लिए किया.

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पानी के टैंक में छिपने का आइडिया

आईसी8 सड़क आग के कारण सबसे अधिक प्रभावित थी. सिल्वा ने कहा कि उन्हें ये आइडिया तब आया जब वो अपने पति की मां को बचाने की कोशिश कर रही थीं.

वो बताती हैं, "मेरे पति ने कहा कि मां को वैन में बैठाया जाए लेकिन ये काम वो अपने आम नहीं कर सकती थीं इसलिए उन्होंने कहा कि हमें यहीं छोड़ दो."

सिल्वा के अनुसार, "मैंने अपने बेटे की मदद से उन्हें हम यहां ले आने में क़ामयाब रहे." 81 वर्ष के पिता को भी इसी टैंक तक ले जाया गया.

सिल्वा ने बताया कि हवाएं इतनी तेज़ चल रही थीं कि घरों की छतें उड़ गईं, "ये सबकुछ एक हॉरर मूवी की तरह था."

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'विनाश को बया नहीं किया जा सकता'

इस आग से किसी तरह बच गए एक व्यक्ति ने बताया कि हम आईसी8 सड़क से थोड़ी दूर पर एक गांव मो ग्रांडे में फंस गए थे. हम और कुछ अन्य लोग भी वहां मौजूद थे, जब आईसी8 पर एक अधिकारी ने हमें दिशा बताई.

जब हम सड़क से पहाड़ की ऊंचाई पर पहुंचे तो हमने देखा कि हवाओं के ज़ोर से आग की लपटें एक खाई से दूसरी खाई को छू रही थीं.

आग और हवा के साथ तने भी टूट टूट कर कार पर गिर रहे थे लेकिन आप अपनी गाड़ी नहीं रो कसकते थे. उस समय आप आग को महसूस कर सकते थे.

आखिरकार जब हम एक छोटे से गांव पहुंचे तो उससे निकलने वाला चौराहा आग से घिरा हुआ था. गर्मी और आग की रफ़्तार को देखकर स्थानीय और हम लोग रो रहे थे. उस समय तक अंधेरा हो चुका था.

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कार में हुई अधिकांश लोगों की मौत

इस गांव के आगे कारों में बंद 30 शव मिले. गाड़ियों के आगे भी 17 लोगों के शव मिले. ये सड़क आईसी8 को जाती है.

एक अन्य दंपत्ति मारिया डी फ़ातिमा और उनके पति जब इस सड़क से जा रहे थे, उनकी कार का सामना आग की लपटों से हुआ.

उन्होंने बताया, "मेरे पति का हाथ जल गया. जबकि मेरी छाती पर जलने से ज़ख़्म बन गए."

फ़ातिमा के अनुसार, "चीड़ के पेड़ों के शीर्ष पर आग लगी हुई थी और इनकी शाखें कारों पर गिर रही थीं. चारो तरफ़ आग का ही मंज़र था. वहां से निकलने के चक्कर में कारें आपस में भिड़ गईं."

उन्होंने बताया कि उनके पीछे कार में आ रहे एक दंपत्ति की मौत हो गई. हमने आवाज़ दी लेकिन वो निकलने में नाक़ामयाब रहे.

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ये आग बीते शरनिवार को शुरु हुई थी. गर्मी और बिना बारिश के आधी तूफ़ान के कारण इसकी भयावहता और बढ़ गई थी.

कुछ इलाक़ों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक था.

पुलिस का कहना है कि आग का कारण किसी पेड़ को आकाशील बिजली लगना हो सकता है.

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