भारत-अफ़ग़ानिस्तान ने पाकिस्तान को कैसे छकाया?

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क़ाबुल और दिल्ली के बीच हवाई रास्ते से माल ढुलाई के सीधे कॉरिडोर की शुरुआत का अफ़गान अधिकारियों ने स्वागत किया है.

हालांकि इस कॉरिडोर में पाकिस्तान की वायु सीमा भी आती है. लेकिन इसे पाकिस्तान द्वारा पैदा की जा रही अड़चनों को बाईपास कर दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

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इस योजना के तहत एक विमान सोमवार को दिल्ली पहुंचा, जिसमें 50 लाख डॉलर क़ीमत की 60 टन औषधीय जड़ी बूटियां थीं.

अफ़ग़ानिस्तान चारों ओर से मैदानी हिस्से से घिरा देश है जिसकी पाकिस्तान पर बहुत अधिक निर्भरता है और भारत के साथ व्यापारिक संबंध के लिए पाकिस्तान से होकर जाना पड़ता है.

अफ़ग़ान अधिकारियों के अनुसार, जब भी पाकिस्तान अपनी सीमा बंद करता है, व्यापार प्रभावित होता है.

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पाकिस्तान की बाधा

इसी साल मार्च में पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान के साथ सटी सीमा को बंद कर दिया था.

इस कॉरिडोर की शुरुआत के लिए आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने इसके लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया.

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अशरफ़ ग़नी ने कहा, "जब पिछले सितम्बर में हमने बात की तो कुछ ही मिनटों में हम इस बात पर सहमत हो गए कि हमें एयर कॉरिडोर बनाना चाहिए."

अफ़ग़ान मीडिया में तारीफ़

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राष्ट्रपति के सलाहकार सेदिकुल्लाह मोजादेदी ने कहा, "हमारा दूसरा मक़सद था कि कैसे ज़मीन से होने वाले व्यापार की बाधाओं से पार पाया जाए."

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मौजूदा 50 करोड़ डॉलर के व्यापार को बढ़ाना हमारी प्राथमिकता रही है.

अफ़ग़ानिस्तान के अख़बारों ने एयर कॉरिडोर बनाए जाने की तारीफ़ की है. उनका कहना है कि अब पाकिस्तान इन दोनों देशों के बीच अड़चन नहीं रहा.

डेली अफ़ग़ानिस्तान अख़बार ने लिखा है, "चूंकि भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच पाकिस्तान की धरती से होकर व्यापार होता था और इस देश ने कई मौकों पर बाधाएं खड़ी कीं, इसलिए एयर कारगो कॉरिडोर बनाया जाना एक नई पहल है."

इस अख़बार ने लिखा है, "पाकिस्तानी अधिकारी बिना नोटिस के अचानक सीमाएं बंद कर देते थे. वो इसे अफ़ग़ानिस्तानी सरकार पर दबाव डालने के लिए हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते थे."

अख़बार ने पाकिस्तान से होकर भारत के साथ होने व्यापार की दिक्कतें भी गिनाई हैं.

सरकारी अख़बार हेवद ने लिखा है, "जब अफ़ग़ानिस्तान अपने फ़ल निर्यात करना चाहता था तो पाकिस्तान अपनी सीमा बंद कर देता थे, लेकिन अब वो ऐसा नहीं कर पाएगा."

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क्या ये कॉरिडोर लंबा चल पाएगा?

हालांकि अफ़ग़ानिस्तान के आर्थिक विशेषज्ञों ने इस नये प्रोजेक्ट के भविष्य पर संदेह व्यक्त किये हैं.

क़ाबुल विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफ़ेसर सैयद मसूद ने टोलो टीवी चैनल को बताया, "माल ढुलाई के लिए वायु मार्ग बहुत खर्चीला है और व्यापार का आखिरी विकल्प है. मैं नहीं समझता कि ये बहुत दिन तक चलेगा."

हालांकि उन्होंने भारत की इस पहलकदमी को कम अवधि का बहुत शानदार सफलता बताई लेकिन साथ में ये भी कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तान और ईरान की बढ़त अधिक है.

उन्होंने कहा, "अफ़ग़ानिस्तान को मेरी सलाह है कि वो पाकिस्तान, ईरान, रूस और अन्य देशों से संबंध में बहुत तर्कसंगत नीति अपनाए."

भारतीय मीडिया में भी इस कॉरिडोर को पाकिस्तानी अड़चन को बाईपास करने वाला बताया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है, "पाकिस्तानी अड़चन को बाईपास करने के लिए दिल्ली, क़ाबुल ने शुरु किया हवाई माल ढुलाई कॉरिडोर."

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