सऊदी शाह ने बेटे के लिए भतीजे को दरकिनार किया

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption सऊदी किंग सलमान के बेटे मोहम्मद बिन सलमान (बाएं) अब मोहम्मद बिन नयाफ़ की जगह क्राउन प्रिंस बनेंगे

सऊदी अरब के शाह सलमान ने अपने बेटे मोहम्मद बिन सलमान को सऊदी अरब का क्राउन प्रिंस बना दिया है.

सऊदी अरब के राजा ने रूढ़िवादी सहयोगी को बर्खास्त किया

इसका मतलब ये है कि शाह सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ अल सउद के बाद ताज़ के अधिकारी उनके पुत्र मोहम्मद बिन सलमान होंगे.

ग़ौरतलब है कि इससे पहले शाह सलमान ने भतीजे मोहम्मद बिन नायफ को उत्तराधिकारी बनाया था और अब अपने पुत्र को ये हक़ दे दिया है.

अमरीका-सऊदी अरब के बीच सबसे बड़ा हथियार सौदा

अब 31 साल के मोहम्मद बिन सलमान सऊदी अरब के उप प्रधानमंत्री भी बन जाएंगे जो कि इस समय सऊदी अरब के विदेश मंत्री है.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

सऊदी अरब की सरकारी मीडिया के मुताबिक, 57 वर्षीय मोहम्मद बिन नयाफ को गृह मंत्री के पद से भी हटा दिया गया है.

विरोध के बीच किंग सलमान ने फ़्रांस छोड़ा

न्यूज़ एजेंसी एसपीए के मुताबिक, नयाफ ने नए क्राउन प्रिंस यानी मोहम्मद बिन सलमान के प्रति राजनिष्ठा जताई है.

किंग सलमान साल 81 साल के हैं और 2015 में अपने भाई अब्दुल्लाह बिन अज़ीज के मरने पर सऊदी अरब के शाह बने थे.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

बीबीसी रक्षा संवाददाता फ्रैंक गार्डनर का विश्लेषण

31 साल के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का उदय काफ़ी चमकदार रहा है.

जब मैं साल 2013 में जेद्दा में उनसे मिला था तो उन्होंने खुद को एक साधारण वकील बताया था. आज वो अरब जगत में सबसे शक्तिशाली देश की लगाम थामने के क़रीब हैं.

यमन में सउदी अरब के सबसे विनाशकारी और दुविधा वाले सैन्य अभियान के पीछे मजबूती से खड़े होने के बावजूद, वो अपने देश में बहुत लोकप्रिय हैं, खासकर सउदी के युवाओं में.

ट्रंप प्रशासन से क़रीबी

उन्होंने सरकारी पदों बैठे बहुत सारे अप्रभावी टाइमपास करने वाले अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाया और उनकी जगह युवा, पश्चिमी शिक्षा प्राप्त टेक्नोक्रेट रखे.

उन्होंने विकास की एक महत्वाकांक्षी योजना विज़न 2030 पेश किया और विशाल मालिकाने वाली सरकारी तेल कंपनी सउदी अराम्को की हिस्सेदारी बेचने की योजना की घोषणा की.

उन्होंने वॉशिंगटन और ट्रंप प्रशासन से क़रीबी संबंध बनाए.

लेकिन उनका सबसे बड़ा और सबसे जोख़िम भरा क़दम, कट्टरपंथी धार्मिक सत्ता केंद्रों पर नियंत्रण स्थापित करने की उनकी कोशिश ही होगी.

वॉशिंगटन को ये क़दम पसंद आया लेकिन उनके देश में बहुतों को नहीं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे