क़तर का दावा, हैकिंग के लिए राजनयिक संबंध तोड़ने वाले देश ज़िम्मेदार

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Image caption क़तर के अटॉर्नी जनरल अली बिन फेताइस अल मारी

क़तर के अटॉर्नी जनरल अली बिन फताइस अल-मारी ने कहा है कि सरकारी न्यूज़ एजेंसी की हैकिंग के पीछे उन देशों का हाथ है जिन्होंने क़तर का बायकॉट किया हुआ है.

क़तर के अटॉर्नी जनरल ने कहा, "दोहा के पास सुबूत मौजूद है कि क़तर को घेरने वाले देशों से चलने वाले आईफ़ोन के मार्फ़त हैकिंग को अंजाम दिया गया."

बीते 20 जून को सरकारी क़तर न्यूज़ एजेंसी (क्यूएनए) और क़तरी अल-जज़ीरा की वेबसाइटें हैक होने की ख़बर आई थी.

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हालांकि हैकिंग के लिए ज़िम्मेदार किसी का नाम नहीं लिया लेकिन अल मारी जोर देकर कहा, "क़तर उन कंपनियों और संस्थाओं पर कानूनी कार्रवाई करेगी जिनके कारण क़तर की सरकारी संस्थाओं, कंपनियों और व्यक्तियों को प्रतिबंधों के चलते नुकसान सहना पड़ा."

क्यूएनए ने कहा था कि 23 मई को ईरान और इसराइल के बारे में अमीर के हवाले से प्रकाशित ख़बर के बाद उनकी वेबसाइट हैक की गई थी.

बीते 5 जून को सऊदी अरब, सयुंक्त राष्ट्र अमीरात और मिस्र ने क़तर पर चरमपंथी संगठनों का समर्थन देने का आरोप लगाते हुए अपने सारे राजनयिक संबंध तोड़ लिए थे.

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