नेपाल में फिसड्डी तो भारत में पतंजलि कामयाब कैसे?

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नेपाल में पतंजलि के छह उत्पादों की बिक्री पर रोक लगा दी गई है. नेपाल के डिपार्टमेंट ऑफ़ ड्रग्स ने पतंजलि के इन उत्पादों को मापदंड के अनुरूप नहीं पाया है और इन्हें 'निम्न स्तर' का बताया है.

विभाग ने कहा है कि बैक्टीरिया के टेस्ट में पतंजलि के ये उत्पाद मापदंडों पर खरे नहीं उतरे हैं.

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पतंजलि के जिन उत्पादों पर नेपाल में रोक लगाई गई है वो हैं अमला चूर्ण, दिव्य गाशर चूर्ण, बाहूची चूर्ण, त्रिफाला चूर्ण, अश्वगंधा और अदविय चूर्ण.

पतंजलि के ये सभी उत्पाद उत्तराखंड में तैयार किए गए हैं. विभाग के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "जिन दवाइयों का विभाग ने परीक्षण किया उनमें बीमार करने वाले बैक्टीरिया पाए गए हैं."

भारत में दोयर स्तर?

विभाग ने तुरंत प्रभाव से यह सार्वजनिक नोटिस जारी की है कि इन छह उत्पादों को कहीं भी खरीदा-बेचा ना जाए.

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दिलचस्प है कि इन सभी छह उत्पादों को भारत में हरी झंडी मिली हुई है और ये यहां धड़ल्ले से बिक रहे हैं.

क्या भारत के ड्रग्स मापदंड नेपाल के मापदंड से दोयम स्तर के हैं?

इस सवाल के जवाब में सेंटर फॉर साइंस एंड इंवायरमेंट के विशेषज्ञ चंद्रभूषण कहते हैं, "देखने वाली बात यह है कि क्या नेपाल के मानक हमारे मानक से ज्यादा कठोर हैं? अगर वाकई में नेपाल के मानक कठोर हैं तब तो संभव है. अगर भारत और नेपाल के मानक बराबर है जो मुझे लगता है कि हो भी सकता है तो फिर हमारे जो फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड ऑथोरिटी है उन्हें चेक करने चाहिए."

वो आगे बताते हैं कि फूड स्टैंडर्ड को लागू करना हमेशा से हमारे देश में चुनौती भरा काम रहा है. इसके लिए एक नई संस्था फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड ऑथोरिटी खोली गई जो कि 2006 के बाद अस्तित्व में आई. फिर भी इसे लागू करना एक बड़ी चुनौती है. बहुत से राज्यों में तो फूड इंस्पेक्टर के नंबर बहुत कम है.

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