चीन के सरकारी अख़बार ने बताया कि क्यों उसे चाहते हैं पाकिस्तानी

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चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) को लेकर पाकिस्तान में सुरक्षा पर चिंता जताई है.

अख़बार का कहना है कि हाल में अपहरण और कथित हत्या के आरोपों के कारण चीनी नागरिकों के बीच डर का माहौल है.

हालांकि अख़बार का कहना है कि हाल की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के बावजूद पाकिस्तान में स्थिति सुधरी है. ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि चीनी नागरिकों पर हमले मुख्य रूप से बलूचिस्तान में हुए हैं.

इस चीनी अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बलूचिस्तान में सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं काफ़ी गंभीर हैं.

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ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, ''बलूचिस्तान में कबीलाई लोग सीपीईसी के ख़िलाफ़ नहीं हैं. पाकिस्तानी सरकार और आर्मी कट्टरपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रही है.

अख़बार ने लिखा है, ''चीन और पाकिस्तान सफलता पूर्वक आर्थिक संबंधों से इस प्रोजेक्ट को मुकाम तक पहुंचाने में लगे हैं. चीन और पाकिस्तान के बीच जो द्विपक्षीय संबंध है वह अन्य द्विपक्षीय संबंधों से बिल्कुल अलग है.''

ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक पाकिस्तान में चीन ने दोस्ती की मजबूत बुनियाद रखी है. अख़बार ने लिखा है, ''प्रभावी सहयोग के ज़रिए चीन ने पाकिस्तान में सुरक्षा स्थिति को दुरुस्त किया है. इन्ही वजहों से पाकिस्तानी जनता मन में चीन की जगह बनी है.''

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ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, 'कुछ लोगों का मानना है कि सीपीईसी से जुड़ी मुश्किलों को भारत हवा दे रहा है. सीपीईसी का विवादित कश्मीर से गुज़रना ही भारत की आपत्ति है. इस कॉरिडोर के निर्माण में छोटे वक़्त के लिए बाधा डाली जा सकती है लेकिन आने वाले वक़्त में चीन और पाकिस्तान भारत के शकों को दूर कर देंगे.'

अख़बार ने लिखा है, ''अगर भारत का इसे लेकर सकारात्मक रवैया रहा और पड़ोसी देशों से सक्रियता के साथ बातचीत करता रहा तो कई दिक़्क़त नहीं होगी.''

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ग्लोबल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि पाकिस्तानी थिंक टैंक्स इसे गेमचेंजर की तरह देखते हैं. अख़बार के मुताबिक सीपीईसी में चीन ने 51 परियोजनाओं में निवेश किया है और इनमें से 19 प्रोजेक्ट पूरे हो गए हैं.

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, ''पाकिस्तान ने घोषणा की है कि इस में कुल निवेश 46 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है. चीन ने पाकिस्तान में 200 से ज़्यादा परियोजनाओं में निवेश किया है. चीन कराची में 6 बिलियन डॉलर के न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहा है. पाकिस्तान को हर प्रोजेक्ट में 17 फ़ीसदी निवेश करना है.''

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