मुस्लिम देशों पर ट्रैवेल बैन में राष्ट्रपति ट्रंप को मिली जीत

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अमरीका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ट्रैवल बैन के आदेश पर लगी रोक को आंशिक रूप से हटा दिया है.

इसके साथ ही अमरीका की सर्वोच्च अदालत ने शरणार्थियों पर पाबंदी को लागू करने के लिए व्हाइट हाउस के आपाताकालीन अनुरोध को भी मंजूरी दे दी है.

जजों ने कहा कि अक्टूबर में इसकी समीक्षा की जाएगी कि ट्रंप की नीति को जारी रखा जाए या ख़त्म कर दिया जाए. ट्रंप के ट्रैवल बैन में 6 मुस्लिम बहुल देशों के नागरिकों के अमरीका में आने पर 90 दिनों की पाबंदी और शरणार्थियों पर 120 दिनों के प्रतिबंध की बात है.

ट्रंप की दलीलः बैन सही, अदालत ग़लत

ट्रंप के ट्रैवल बैन के फ़ैसले पर कोर्ट की रोक

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सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा, ' व्यवहारिक रूप से ये ऐसे लोगों पर थोपा नहीं जाएगा जिनका अमरीका में रहने वाले किसी व्यक्ति से वाकई कोई रिश्तेदारी या संबंध होगा. ऐसे लोगों को भी नहीं रोका जाएगा जिसका किसी अमरीकी संस्थान के साथ संबंध है. बाकी सभी विदेशी नागरिकों पर ये फैसला लागू होगा.'

जस्टिस क्लैरेंस थॉमस, सैमुअल अलितो और नीयो गौरसच ने अपने फ़ैसले में लिखा है कि वे ट्रैवल बैन को पूरे प्रभाव के साथ लागू करने की अनुमति देते हैं और एक समीक्षा अभी लंबित है. हवाई और मेरीलैंड के फेडरल जजों द्वारा ट्रंप के ट्रैवल बैन पर रोक लगाए जाने के बाद से यह अधर में लटका हुआ था.

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बीबीसी न्यूज़ के वॉशिंगटन संवाददात एंटोनी ज़र्चर का मानना है कि यह ट्रंप के लिए जीत की तरह है. इस फ़ैसले से प्रभावित देशों के उन नागरिकों के लिए मुश्किल स्थिति पैदा हो जाएगी जिनका अमरीका से पारिवारिक, स्कूल या रोजगार को लेकर कोई संबंध नहीं है.

कोर्ट के फ़ैसले से इस बात की फिर से पुष्टि हुई है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में राष्ट्रपति के पास व्यापक शक्तियां हैं.

इन जजों ने राष्ट्रपति ट्रंप के इस फ़ैसले को भेदभाव पूर्ण क़रार दिया था. निचली अदालतों ने भी ट्रंप के इस कार्यकारी आदेश के ख़िलाफ़ फ़ैसला दिया था. ट्रंप ने इस साल 27 जनवरी को यह आदेश दिया था.

ट्रंप के इस आदेश के ख़िलाफ़ अमरीका में जमकर विरोध-प्रदर्शन हुए थे.

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