गाली देने वालों को कॉफ़ी पिलाती है ये मुस्लिम नेता

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ऑज़लम सेकिक डेनमार्क की पहली महिला मुसलमान सांसदों में से एक हैं. उन्हें हर हफ्ते नफ़रत भरे ईमेल आते हैं.

इंटरनेट और सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल किए जाने की कोशिश होती रहती है लेकिन ऑज़लम ने इन्हें नज़र अंदाज़ करने के बजाय ऐसे ईमेल भेजने वालों से मिलने का फैसला किया.

ऑज़लम का मानना है कि आमने-सामने की मुलाकातों से लोगों के पूर्वाग्रह खत्म होते हैं. पिछले पांच साल में उन्होंने सैंकड़ों लोगों को मिलने के लिए बुलाया.

ये वो लोग थे जो उन्हें भद्दे मैसेज भेजा करते थे. ऑज़लेम ने उनके साथ कॉफ़ी पर बातचीत की. ऑज़लेम इसे 'डायलॉग कॉफ़ी' कहती हैं.

उन्होंने ऐसी ही एक मुलाकात में बीबीसी को शरीक होने की भी दावत दी. इस बार ऑज़लेम की मुलाकात स्टीफन से होनी थी, स्टीफन पेशे से एक प्रोजेक्ट मैनेजर हैं.

Image caption स्टीफन पेशे से प्रोजेक्ट मैनेजर हैं और मुसलमानों के बारे में उनके कुछ 'पूर्वाग्रह' हैं

'जागरूक नागरिक'

मुलाकात में ऑज़लेम ने स्टीफन के नफरत वाले मेल का जिक्र करते हुए कहा, "आपने लिखा है कि आप मेरी हर बात से नफरत करते हैं."

इस मेल में स्टीफन ने लिखा था, "हम मुसलमानों के बगैर ये दुनिया चाहते हैं. एक शांत विश्व आपके बिना. आप लोग हमारे मूल्य बर्बाद कर रहे हैं."

स्टीफन इस पर जवाब देते हैं, "ये चिट्ठी आंखें खोलने के लिए लिखी गई थी. मुझे लगता है कि आप लोग हकीकत को लेकर इतने अड़ियल हो कि उन चीजों पर कुछ नहीं कहना चाहते जो वास्तव में होने वाली हैं."

वे आगे कहते हैं, "मैं तो एक जागरूक नागरिक हूं जो समाज में हो रहे बदलावों को देख सकता है. मैं कुछ अच्छा करना चाहता हूं. जब लोग दूसरे देशों से यहां आते हैं तो उन्हें सही बर्ताव करना नहीं आता है. एक ऐसा वक्त आएगा जब आप देखेंगे कि डेनमार्क के आम नागरिक वाकई बहुत नाराज हो जाएंगे."

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बातचीत जरूरी है...

इस पर ऑज़लम ने स्टीफन को जवाब दिया, "मैं यहां बैठी सोच रही हूं कि ये बहुत अजीब बात है. आपको ये लगता है कि आपको इस तरह से बात करने का अधिकार है. सिर्फ इसलिए क्योंकि मैं एक मुसलमान हूं."

स्टीफन और ओज़लेम की ये मुलाकात डेढ़ घंटे तक चली.

स्टीफन तल्खी से कहते हैं, "हम सिर्फ और सिर्फ मुसलमानों के बारे में बात कर रहे हैं. इन लोगों को सकारात्मक तरीके से जोड़ना एक असंभव काम है. इन पर अरबों का खर्च हो रहा है. लेकिन हम इनसे सामाजिक और आर्थिक तरीके से कैसे निपटें? ये एक बेतुका काम है."

स्टीफन के इन तल्ख शब्दों के बावजूद ऑज़लम का मानना है कि ऐसी बातचीत जरूरी है.

फिर मिलेंगे...

जाते-जाते ऑज़लम कहती हैं, "शुक्रिया स्टीफन." और स्टीफन भी शुक्रिया का जवाब शुक्रिया से ही देते हैं.

ऑज़लम का कहना है, "मैं वाकई आपकी शुक्रगुजार हूं. मैं खुश हूं क्योंकि आपने अपने दरवाजे खोले. क्योंकि ये बातचीत बहुत आसान नहीं थी."

आखिर में स्टीफन कहते हैं, "मुझे पता नहीं कि हम दोबारा मिलेंगे या नहीं."

लेकिन ऑज़लम ने फिर से मिलने की उम्मीद जताई और स्टीफन ने भी इनकार नहीं किया. ओज़लेम स्टीफन से मिलने फिर आएंगी.

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