वुसत का ब्लॉगः 'जब से भारत में मोदी और अमरीका में ट्रंप आए हैं...'

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बैल के बारे में कहते हैं कि उससे अगर अपनी मर्जी मनवानी हो तो उल्टा चैलेंज दे दो.

यानी अगर बैल को आगे बढ़ाना हो तो पीछे से दुम खींचो और पीछे ले जाना हो तो आगे से सींग पकड़कर खींचो. आपका काम भी हो जाएगा और बैल भी ये सोचकर खुश रहेगा कि देखो मैंने अपनी मर्ज़ी चलाई. मालिक आखि़र ख़ुद को समझता क्या है?

छोटे बच्चों को खाना खिलाने के लिए दुनिया की हर मां ये टेकनीक इस्तेमाल करती है कि उसके सामने खुद खाना शुरू कर देती है और गोल-गोल मुंह बनाकर कहती जाती है, "इतनी अच्छी सब्ज़ी है कि मैं सब खुद खा जाऊंगी और चिंटू को तो बिल्कुल एक निवाला भी नहीं दूंगी."

चिंटू साहब इस चैलेंज पर दौड़े-दौड़े आते हैं और अम्मा के हाथ से खाना छीनकर जल्दी-जल्दी हपाहप करके अम्मा को ऐसे देखते हैं जैसे लंका फ़तह कर ली हो और अम्मा भी हंसते हुए अपनी हार पर तालियां बजा देती हैं.

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पहलवानी का दम

यही टेकनीक अच्छे-भले इंसानों पर भी इस्तेमाल होती है. मसलन हमारे गांव में फ़ैजू पहलवान रहा करते थे. कुआं उनके घर के पास ही था.

जब भी अम्मा हमें आदेश देतीं कि घर की टंकी में पानी भरो तो हम सब बच्चे एक-एक बड़ा बर्तन कुएं तक ले जाते और ज़ोर से एक-दूसरे को कहते, "ये कुआं इतना गहरा है कि इसमें से दुनिया का कोई भी आदमी लगातार दस डोल पानी नहीं निकाल सकता. फ़ैजू मामा भी नहीं."

फ़ैजू मामा थोड़ी देर तो अपनी कुटिया में बैठे सुनते रहते और फिर बेसब्र होकर बाहर निकल आते, "अमा कौन कहता है कि फ़ैजू कुएं में से पानी नहीं निकाल सकता. हम पहलवान रहे हैं, पहलवान. लाओ इधर अपने बर्तन, दस छोड़ बीस डोल पानी निकालकर दिखाते हैं अभी."

और फिर फ़ैजू पहलवान हम सब के बर्तन भर देते और हम उनकी धुरंधरी का लोहा मानते हुए बर्तन सरों पर रखकर मुस्कुराते हुए लौट जाते.

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पर्रिकर का इंटरव्यू

बहुत दिनों बाद फ़ैजू पहलवान को अंदाज़ा हुआ कि बच्चे उन्हें कैसे बेवकूफ़ बनाकर अपना काम निकाल लेते हैं. मगर तब तक बच्चे भी इतने बड़े हो चुके थे कि कुएं से ख़ुद पानी खींच लें.

ये सब हमें मनोहर पर्रिकर जी का इंटरव्यू पढ़कर याद आ रहा है जिन्होंने पाकिस्तान के ख़िलाफ सर्जिकल स्ट्राइक का प्लान एक पत्रकार को नीचा दिखाने के लिए बनाया था जिसने उन्हें चैलेंज किया था कि बर्मा में घुसकर तो आपने सर्जिकल स्ट्राइक्स कर दी, पाकिस्तानी सीमा के पार कर के दिखाएं तो जानें.

शुक्र है कि पत्रकार ने मनोहर जी को ये चैलेंज नहीं दिया कि एटम बम तो आपने बना लिया, उसे किसी के सिर पर गिराकर दिखाएं तब मानेंगे कि एटम बम असली है.

जब से भारत में मोदी और अमरीका में ट्रंप आए हैं, हमारी तो बोरियत ही दूर हो गई है. वो अपनी टीम में ऐसे-ऐसे लोगों को लाएं हैं कि पूछो मत.

अब ये दुनिया किसी दिन अगर तबाह होगी तो अक्ल से नहीं गुस्से से और एटम बम से नहीं बल्कि ट्विटर से होगी. बस चैलेंज ही तो करना है इस दुनिया के फ़ैजू पहलवानों को.

स्पष्टीकरण:वुसतुल्लाह ख़ान ने मनोहर पर्रिकर के जिस इंटरव्यू का हवाला देकर ये भारत और पाकिस्तान के कूटनीतिक रिश्तों पर कटाक्ष किया है, उस इंटरव्यू की ख़बर को प्रकाशित करनेवाली न्यूज़ एजेंसी पीटीआई ने ये कहते हुए वापस ले लिया है कि उसने ग़लत ख़बर दी थी कि एक टीवी रिपोर्टर के उकसाने पर तत्कालीन रक्षा मंत्री पर्रिकर ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ सर्जिकल स्ट्राइक का फ़ैसला लिया था. न्यूज़ एजेंसी की संशोधित ख़बर के मुताबिक मनोहर पर्रिकर ने कहा था कि पिछले साल चार जून को भारतीय सेना के काफ़िले पर मणिपुर में उत्तर पूर्वी चरमपंथी गुट 'एनएससीएन - के' के हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइल की योजना बनाई गई थी.

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