क़तर का भविष्य तय करने के लिए अहम बैठक

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Image caption क़तर के विदेश मंत्री शेख़ मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी

क़तर के साथ अपने राजनयिक संबंध ख़त्म करने के क़रीब एक महीने बाद बात करने के लिए बहरीन, मिस्र, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात मुलाक़ात कर रहे हैं.

क़तर को सौंपी गई 13 मांगों की लिस्ट मानने की अवधि पूरी होने के दिन काहिरा में हो रही इस बैठक में इन देशों के विदेश मंत्री हिस्सा ले रहे हैं.

इन मागों को नहीं मानने की सूरत में क़तर पर और प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. लिस्ट में जो मांगें की गई हैं उनमें अल-जज़ीरा न्यूज़ चैनल को बंद करना और ईरान के साथ संबंध ख़त्म करना शामिल है. क़तर ने इन मांगों को 'अव्यावहारिक' कहा है.

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क़तर पर आतंकवाद का समर्थन करने और इलाके में अस्थिरता को बढ़ाने के आरोप लगाए गए हैं जिसने वो इनकार करता आया है.

सऊदी अरब, बहरीन, मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात ने इस छोटे खाड़ी देश पर अभूतपूर्व आर्थिक और राजनयिक प्रतिबंध लगा दिए हैं.

कच्चे तेल के धनी क़तर पर मौजूदा प्रतिबंधों का गंभीर असर पड़ा है क्योंकि अपनी 27 लाख की जनसंख्या की आम ज़रूरतें पूरी करने के लिए क़तर पूरी तरह से आयात पर निर्भर है.

सोमवार को खाड़ी देशों ने अपनी मांगें मानने कि लिए क़तर को दो और दिनों की मोहलत दी थी. इससे पहले क़तर को मांगें मानने के लिए मिले 10 दिनों का समय ख़त्म हो गया था.

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क़तर में अधिकारियों ने इन मांगों का जवाब तो तैयार कर लिया है, लेकिन फिलहाल इसके बारे में जानकारी साझा नहीं की गई है. क़तर का कहना है कि ये मांगे अतंरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन हैं.

क़तर के विदेश मंत्री शेख़ मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी ने मंगलवार को इन मांगों को अव्यावहारिक बताया था.

उन्होंने कहा था, "ये आतंकवाद के बारे में नहीं है, ये अभिव्यक्ति की आज़ादी पर प्रतिबंध लगाना है."

चारों खाड़ी देशों ने क़तर पर उन इस्लामी चरमपंथी समूहों को पनाह देने का आरोप लगाया है जिन्हें वो आतंकवादी संगठन मानते हैं - इनमें मुस्लिम ब्रदरहुड शामिल है. क़तर पर आरोप है कि वह इन समूहों को सरकार के समर्थन से चलने वाले अल-जज़ीरा चैनल के ज़रिए मंच दे रहा है.

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क़तर ने इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज कर दिया है. क़तर पर प्रतिबंध लगने के बाद उसकी मदद के लिए ईरान और तुर्की सामने आए हैं और उसे आम ज़रूरत का सामान मुहैया करवा रहे हैं.

और क्या मांगे हैं खाड़ी देशों की?

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Image caption क़तर के दोहा में मौजूद अल जज़ीरा नेटवर्क का मुख्यालय

समाचार एजेंसी असोसिएटेड प्रेस के पास इन मांगों की एक कॉपी है. समाचार एजेंसी के अनुसार क़तर से कहा गया है कि वो- बहरीन, मिस्र, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के नागरिकों को अपने देश में अपनाना बंद करे और ऐसे जो लोग उनके देश में हैं उन्हें देश से बाहर निकाले.

इन देशों का आरोप है कि क़तर उनके देश के अंदरूनी मामलों में दख़ल देता है.

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  • उन सभी व्यक्तियों को सौंपे जिनकी मांग इन चारों देशों ने चरमपंथ के सिलसिले में की है.
  • अमरीका ने जिन समूहों को आतंकवादी समूह माना है उनका वित्तपोषण करना बंद करे.
  • गल्फ़ कोऑपरेशन काउंसिल के साथ राजनीतिक और आर्थिक तौर पर जुड़े.
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Image caption सऊदी अरब के रियाद में मौजूद क़तर एयरवेज़ का दफ्तर
  • अल-जज़ीरा समेत अरबी 21 और मिडल ईस्ट आई जैसे अन्य ख़बरों के चैनल को बंद करे.
  • हर्ज़ाना चुकाए. हर्ज़ाने की रकम के बारे में अभी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है.

आधिकारिक तौर पर इन मांगों को साझा नहीं किया गया है. इन्हें साझा किए जाने के बाद खाड़ी देशों में तनाव बढ़ गया है.

अब तक क्या क्या हुआ?

5 जून 2017- सऊदी अरब और मिस्र समेत कई खाड़ी देशों ने क़तर पर अतंकवाद का वित्तपोषण करने का आरोप लगाते हुए उसके साथ अपने राजनयिक संबंध तोड़ लिए. इन देशों ने क़तर एयरवेज़ पर अपने हवाई क्षेत्रों के इस्तेमाल पर भी पाबंदी लगा दी.

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Image caption इसी साल जून में क़तर के अमीर शेख़ तमिम बिन हमद अल थानी ने सऊदी अरब में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से मुलाक़ात की थी.

8 जून 2017 - क़तर ने कहा कि वो इन प्रतिबंधों के सामने घुटने नहीं टेकेगा. अमरीका ने खाड़ी देशों के एक होने की अपील की.

23 जून 2017 - खाड़ी देशों ने क़तर को 13 मांगों की एक लिस्ट सौंपी और उन्हें मानने के लिए 10 दिनों का समय दिया. इन मांगों में अल-जज़ीरा को बंद करना, देश में तुर्की के एक सैन्य अड्डे को बंद करना, मुस्लिम ब्रदरहुड के साथ संबंध तोड़ना और ईरान के साथ राजनयिक संबंध तोड़ना शामिल थे.

1 जुलाई 2017 - क़तर के विदेश मंत्री ने इन मांगों को मानने से इनकार कर दिया और कहा कि वो सही परिस्थितियों में बातचीत आगे बढ़ाने के लिए तैयार है.

3 जुलाई 2017 - सऊदी अरब और उसके सहयोगियों ने क़तर को मांगें मानने के लिए दो और दिनों का समय दिया .

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