दाँव पर लगा है पश्चिमी सभ्यता का भविष्य: ट्रंप

ट्रंप का भाषण सुनने आए लोग इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption पोलैंड की राजधानी वारसा में ट्रंप का भाषण सुनने आए लोग

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने पोलैंड की राजधानी वारसा में एक महत्वपूर्ण भाषण में कहा है कि पश्चिमी सभ्यता का भविष्य दाँव पर लगा हुआ है.

जर्मनी के शहर हैम्बर्ग में जी20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने से पहले पोलैंड पहुँचे ट्रंप ने वहाँ "आतंकवाद और चरमपंथ" के ख़तरों को लेकर चेतावनी दी

ट्रंप ने रूस की आलोचना करते हुए उससे "ज़िम्मेदार देशों के समुदाय में शामिल होने" का आग्रह किया.

वारसा के क्रासिंस्की स्क्वायर से ट्रंप ने एक विशाल जनसभा को संबोधित किया. पोलैंड में अभी एक रूढ़िवादी सरकार सत्ता में है जो आप्रवासन और संप्रभुता के मुद्दे पर ट्रंप के समान ही सोच रखती है.

इमेज कॉपीरइट EPA
Image caption पोलैंड के राष्ट्रपति की पत्नी के साथ मेलानिया ट्रंप

ट्रंप ने क्या कहा?

ट्रंप ने पोलैंड में कहा,"पोलैंड का अनुभव हमें याद दिलाता है, कि पश्चिम की रक्षा का दायित्व ना केवल संसाधनों पर निर्भर करता है, बल्कि ये अंततः लोगों के बचे रहने की इच्छा पर भी निर्भर करता है."

"हमारे इस दौर का बुनियादी प्रश्न यही है कि क्या पश्चिम में बचे रहने की इच्छा है."

ट्रंप ने साथ ही रूस से कहा कि "वो यूक्रेन और दूसरी जगहों पर अस्थिरता लाने वाली अपनी गतिविधियाँ और सीरिया और ईरान जैसे देशों में शत्रु शासकों का सहयोग करना बंद करे".

उन्होंने कहा कि इसके बजाय, "रूस को ज़िम्मेदार राष्ट्रों के समुदाय के साथ जुड़कर अपने साझा शत्रुओं से लड़ने और सभ्यता की रक्षा में शामिल होना चाहिए".

अमरीकी राष्ट्रपति हैम्बर्ग में पहली बार रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन से मुलाक़ात करेंगे.

मगर रूसी राष्ट्रपति के एक प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति को ये बात स्वीकार नहीं है कि रूस इस क्षेत्र को अस्थिर कर रहा है.

प्रवक्ता ने कहा, "ठीक इसी वजह से हम दोनों राष्ट्रपतियों के बीच होनेवाली पहली मुलाक़ात की प्रतीक्षा कर रहे हैं."

इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption ग्रीनपीस कार्यकर्ताओं ने वारसा के कल्चर एंड साइंस पैलेस पर रोशनी से लिख दिया - नो ट्रंप यस पेरिस

ट्रंप पोलैंड ही क्यों गए?

पोलैंड में लगभग तय है कि अमरीकी नेताओं का गर्मजोशी से स्वागत होगा, और ये हैम्बर्ग में होने वाले विरोध प्रदर्शनों से बिल्कुल अलग लगेगा जिसकी तैयारी हो रही है.

जर्मनी और रूस के बीच स्थित पोलैंड ने सदियों तक बँटवारे और कब्ज़े का दंश सहा है और शीत युद्ध के बाद वो अमरीका का एक बड़ा सहयोगी बनकर उभरा है, जो इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान जैसी जगहों पर अमरीका की अगुआई वाले सैन्य अभियानों में अपने सैनिक भेजता है.

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption ब्रिटिश प्रधानमंत्री और अमरीकी राष्ट्रपति के मुखौटे पहने प्रदर्शनकारी

विरोध की तैयारी

हालाँकि अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण आंदोलनकारी संगठन ग्रीनपीस की पोलैंड ईकाई ने पेरिस जलवायु संधि को लेकर ट्रंप के रवैये को लेकर उनके पोलैंड दौरे का विरोध किया है.

वारसा की एक महत्वपूर्ण इमारत पर ग्रीनपीस ने बड़े-बड़े शब्दों में एक नारा प्रोजेक्ट किया जिसमें लिखा था - नो ट्रंप, यस पेरिस.

ट्रंप गुरूवार को हैम्बर्ग जाएँगे जहाँ जी20 शिखर सम्मेलन होना है जिसमें काफ़ी तल्खी दिखाई दे सकती है.

इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption हैम्बर्ग में जमा हो रहे प्रदर्शनकारी

जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर ट्रंप की कई यूरोपीय नेताओं से नहीं बन रही.

समझा जाता है कि सम्मेलन में ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे उन्हें ये कहते हुए चुनौती देंगी कि इस विषय पर अंतरराष्ट्रीय संधि के बारे में दोबारा विचार की कोई ज़रूरत नहीं है.

समझा जाता है कि सहायता संस्थाएँ भी हैम्बर्ग में प्रदर्शन करेंगीं और वहाँ आए राष्ट्राध्यक्षों से असमानता दूर करने के लिए और प्रयास करने की अपील करेंगी.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)