G-20 शिखर सम्मेलन से पहले जर्मनी में संघर्ष

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जर्मनी के हैम्बर्ग शहर में जी-20 शिखर सम्मेलन की पूर्वसंध्या पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुई हैं.

पुलिस का कहना है कि उन्हें कार्रवाई करनी पड़ी जब काले लिबास पहने लगभग एक हज़ार प्रदर्शनकारियों ने अपने मुखौटे हटाने से इनकार कर दिया.

पुलिस ने इसके बाद पानी की बौछारों और मिर्ची पाउडर का छिड़काव किया, वहीं प्रदर्शकारियों ने उन पर बोतलें, पत्थर और दूसरी ची़ज़ें फेंकीं.

कम-से-कम एक वाहन को आग लगा दी गई और तोड़-फोड़ की गई.

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भारी सुरक्षा बंदोबस्त

हैम्बर्ग में 25 हज़ार पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है जिन्होंने शहर के मुख्य इलाक़े में सुरक्षा घेरा बनाया हुआ है ताकि प्रदर्शनकारियों को सम्मेलन स्थल पर जाने से रोका जा सके.

समझा जा रहा है कि सम्मेलन के दौरान हैम्बर्ग में एक लाख प्रदर्शनकारी पहुँच सकते हैं.

वैसे हैम्बर्ग में दिन भर शिखर सम्मेलन के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन होते रहे.

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Image caption दिन में हज़ारों पदर्शनकारियों ने जुलूस निकाला

जी-20 और मतभेद

शिखर सम्मेलन के लिए जुटने वाले जी-20 नेताओं के बीच आपस में कई मुद्दों पर मतभेद हैं जिनमें जलवायु परिवर्तन और व्यापार जैसे मुद्दे शामिल हैं.

डोनल्ड ट्रंप सम्मेलन से पहले ही जर्मन चांसलर एंगेला मर्कल से मिल चुके हैं और जर्मन सरकार के एक प्रवक्ता के अनुसार दोनों नेताओँ की एक घंटे की बातचीत में उत्तर कोरिया, मध्य पूर्व, यूक्रेन संघर्ष और जी-20 से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई.

एंगेला मैरकल ने पिछले हफ़्ते कहा था कि जी-20 में पेरिस जलवायु संधि चर्चा के केंद्र में रहेगा जिससे अमरीका हाथ खींच चुका है.

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Image caption एंगेला मैरकल से बात करते डोनल्ड ट्रंप

ट्रंप पहली बार मिलेंगे पुतिन से

सम्मेलन में पहली बार ट्रंप की मुलाक़ात रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन से होगी.

ट्रंप ने इससे पहले पोलैंड में एक भाषण में रूस की आलोचना करते हुए उससे "ज़िम्मेदार देशों के समुदाय में शामिल होने" का आग्रह किया.

ट्रंप ने साथ ही रूस से कहा कि "वो यूक्रेन और दूसरी जगहों पर अस्थिरता लाने वाली अपनी गतिविधियाँ और सीरिया और ईरान जैसे देशों में शत्रु शासकों का सहयोग करना बंद करे".

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Image caption लगभग एक लाख प्रदर्शनकारियों के जुटने का अनुमान

उन्होंने कहा कि इसके बजाय, "रूस को ज़िम्मेदार राष्ट्रों के समुदाय के साथ जुड़कर अपने साझा शत्रुओं से लड़ने और सभ्यता की रक्षा में शामिल होना चाहिए".

मगर रूसी राष्ट्रपति के एक प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति को ये बात स्वीकार नहीं है कि रूस इस क्षेत्र को अस्थिर कर रहा है.

प्रवक्ता ने कहा, "ठीक इसी वजह से हम दोनों राष्ट्रपतियों के बीच होनेवाली पहली मुलाक़ात की प्रतीक्षा कर रहे हैं."

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