ब्रिटेन को सबसे सस्ता रनवे देने वाले भारतीय

एक पंजाबी-ब्रिटिश शख़्स ने ब्रिटेन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर तीसरा रनवे बनाने के लिए ऐसा प्लान दिया है जिससे सब दंग हैं. रनवे प्लान के लिए अरोड़ा ग्रुप के संस्थापक सुरिंदर अरोड़ा का प्लान एयरपोर्ट की मौजूदा स्कीम से 6.7 बिलियन पाउंड (557 अरब रुपये) सस्ता होगा.

पाकिस्तान सीमा के नज़दीक पंजाब के फाज़िल्का ज़िले में 1958 में पैदा हुए सुरिंदर अरोड़ा ने बेहद कम समय में नाम कमाया है. ब्रिटेन के सबसे अमीर लोगों की सूची में भी उनका नाम शामिल है.

मौसी ने लिया था गोद

1958 में पैदा हुए सुरिंदर को उनके पैदा होने के दो-तीन दिन बाद ही उनकी मौसी ने गोद ले लिया था. सुरिंदर अपने बड़े भाई से 16 साल छोटे थे. उन्होंने एक इंटरव्यू में ख़ुद कहा- ''शायद मैं ग़लती से पैदा हो गया था.'' उनके असली माता-पिता लंदन में रहने लगे थे और वह उन्हें लंदन वाली आंटी कहते थे.

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पढ़ाई-लिखाई में फिसड्डी

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पंजाब में उनका बचपन बीता. 13 साल तक वह पढ़ाई-लिखाई से दूर भागते रहे. हालत ये थी कि आठवीं कक्षा तक उन्हें सही से लिखना-पढ़ना भी नहीं आता था. आखिरकार 1972 में उनके सगे माता-पिता ने उन्हें पढ़ाई के लिए लंदन बुला लिया.

लंदन पहुंचने के बाद उनकी मां ने सच बताया कि वह उनके बेटे हैं. उन्होंने इस बारे में बीबीसी रेडियो से बातचीत में कहा, 'उस वक्त मुझे लगा कि मैं कितना ख़ुशनसीब हूं जिसे दो-दो मां-बाप मिले हैं.'

सुरिंदर चाहते थे कि वह आगे चलकर पुलिस अधिकारी बनें, लेकिन उनके माता-पिता चाहते थे कि वह अकाउंटेंट या पायलट बनें. उनके माता-पिता फ़ाइनेंशियल एडवाइज़र के तौर पर काम करते थे.

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नौकरी की शुरुआत

सुरिंदर अरोड़ा ने 1977 में ब्रिटिश एयरवेज़ में बतौर जूनियर क्लर्क अपनी पहली नौकरी शुरू की थी. उन्हें तब एक हफ़्ते के 34 पाउंड (करीब 2800 रुपये) मिलते थे. पायलट का लाइसेंस पाने के लिए उन्हें पैसों की कमी खली तो एक होटल में बतौर वाइन वेटर पार्टटाइम नौकरी भी करने लगे. 1982 तक वह होटल में काम करते रहे.

अपने माता-पिता के साथ उन्होंने फ़ाइनेंस एडवाइज़र के कामकाज की ट्रेनिंग ली. सितंबर 1982 में उन्होंने ये काम शुरू किया और उसके अगले महीने उनकी शादी हो गई. उनकी पत्नी का नाम सुनीता है.

अरोड़ा ग्रुप का बिज़नेस खड़ा करने में सुनीता की भूमिका भी बड़ी है. क़रीब 11 साल तक काम करने के बाद सुरिंदर अरोड़ा ने 1988 में ब्रिटिश एयरवेज़ को अलविदा कह दिया.

प्रॉपर्टी का बिज़नेस

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हीथ्रो एयरपोर्ट के पास उन्होंने कुछ घर बिकाऊ देखे और ख़रीदने का मन बनाया. वह नीलामी में गए और दोनों घर हासिल कर लिए. इन घरों में 15-16 साल से कोई नहीं रह रहा था. उन्होंने घरों को गेस्ट हाउस में तब्दील करने का प्लान बनाया. उस वक़्त वहां होटल बहुत थे, लेकिन गेस्ट हाउस नहीं थे.

गेस्ट हाउस को उन्होंने 'हीथ्रो स्टैंडबाई एकोमॉडेशन' नाम दिया. उनकी पत्नी ने किचेन में हॉटलाइन लगाई थी जिससे वह अपना काम करते हुए भी बुकिंग्स ले लेती थीं. धीरे-धीरे उन्होंने उस एरिया में आस-पास के घर, ऑफ़िस और पेट्रोल स्टेशन भी ख़रीद लिए. ये सब कुछ उन्होंने 20 महीनों में किया.

ब्रिटिश एयरवेज़ के कुछ कर्मचारियों से बातचीत के दौरान जब सुरिंदर को पता चला कि उन्हें होटलों में बेहतर सुविधाएं नहीं मिल रही हैं तो उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट पाने के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी को एक चिट्ठी लिखी.

हालांकि एयरपोर्ट ने उनके बिज़नेस मॉडल को ख़ारिज कर दिया. एयरपोर्ट चाहता था कि वह हिल्टन या मैरिएट जैसा होटल बनाएं.

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बढ़ गई रफ़्तार

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1999 में सुरिंदर ने एक कंपनी के साथ मिलकर पहला होटल बना लिया. इसके बाद उन्होंने 2001 में दो और होटल खोले. इन प्रोजेक्ट्स की फ़ंडिंग के लिए उन्होंने अपनी प्रॉपर्टी पर बैंकों से लोन लिया और काफ़ी बचत का पैसा भी लगाया.

लेकिन अब तक सुरिंदर के मन में हीथ्रो के लिए होटल बनाने की ललक जगी रही.

हीथ्रो से एक बार फिर इनकार होने के बाद सुरिंदर ने अपनी कंपनी का ग्राफ़ बढ़ाने के लिए कई कंपनियों से फ़्रेंचाइज़ी लेने के लिए हाथ-पैर मारना शुरू कर दिया.

आख़िरकार 2004 में एक्कोर सॉफ़िटेल की फ़्रेंचाइज़ी जीत ली. कुछ समय बाद हीथ्रो एयरपोर्ट के लिए फ़ाइव स्टार होटल बनाने के लिए बिडिंग शुरू हुई. आखिर में मैरिएट को पीछे छोड़कर अरोड़ा ग्रुप ने बाज़ी मार ली.

258 मिलियन पाउंड की कंपनी के संस्थापक सुरिंदर अरोड़ा लंदन स्किल्स एंड एंप्लॉयमेंट बोर्ड के सदस्य हैं और वेंटवर्थ गोल्फ क्लब के डिप्टी चेयरमैन भी हैं.

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