क़तर संकट: सऊदी और उसके साथी क्यों पड़े नरम?

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क़तर से राजनयिक संबंध तोड़ने के साथ ही उसका बहिष्कार करने वाले चार अरब देशों ने नरम रुख़ अख्तियार किया है.

सऊदी अरब के साथ संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बहरीन और मिस्र ने पिछले महीने 13 मांगों की सूची रखी थी.

अब ये चार देश केवल छह मांगों को मांगने पर जोर दे रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र में सऊदी अरब, यूएई, बहरीन और मिस्र के राजनयिकों ने इसकी सूचना दी.

छह मांगों में आतंकवाद और उग्रवाद से मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ ही उकसाने और भड़काने के काम को ख़त्म करना शामिल है.

क़तर की ओर से इस पर कोई फौरन प्रतिक्रिया नहीं आई है. क़तर लगातार अपने ऊपर लगे आरोपों को ख़ारिज करता रहा है.

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क़तर की घेराबंदी

क़तर ने ऐसे किसी भी उपायों को मानने से इनकार कर दिया है जिससे उसकी संप्रभुता पर खतरा हो या जो अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करता है.

साथ ही वो अपने पड़ोसियों द्वारा किए गए घेराबंदी की आलोचना करता रहा है.

27 लाख की आबादी की रोजमर्रा की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए क़तर को समंदर और हवा के रास्ते रोज़मर्रा की जरूरत की चीज़ें आयात करनी पड़ रही हैं.

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र संवाददाताओं के सामने इन चार देशों के राजनयिकों ने कहा कि वो इस संकट का सौहार्दपूर्ण हल चाहते हैं.

सऊदी अरब के स्थायी प्रतिनिधि अब्दुल अल-मुआलमी ने कहा कि उनके विदेश मंत्री 5 जुलाई को काहिरा में एक बैठक के दौरान छह सिद्धांतों पर सहमत हो गए हैं, इसे मानना क़तर के लिए आसान होगा.

अब्दुल अल-मुआलमी ने कहा, "हालात सुधारने का मक़सद केवल अल-जज़ीरा को बंद करके भी हासिल किया जा सकता है. अगर हम हम अपना बिना अल-जज़रा को बंद किए भी हासिल कर सकते हैं तो भी ये ठीक है. अहम बात ये है कि हिंसा को बढ़ावा और नफ़रत के भाषण देना बंद करना होगा."

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क़तर से दूरी बनाने वाले देश

22 जून को क़तर को दिए गए 13 मांगों की सूची में अल जजीरा न्यूज़ नेटवर्क को बंद करना, तुर्की सैन्य अड्डे का बंद करना, मुस्लिम ब्रदरहुड के साथ रिश्ते को खत्म करना और ईरान के साथ संबंधों को घटाना शामिल था.

अल-मुआलमी ने कहा कि अल जजीरा को बंद करना ज़रूरी नहीं होगा लेकिन हिंसा भड़काने और घृणा फैलाने के लिए उत्तेजित करने से उन्हें रोकना ज़रूरी था.

सऊदी अरब ने क़तर पर आतंकी संगठनों को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए उसके साथ सभी राजनायिक संबंध समाप्त कर दिए थे.

सऊदी अरब के साथ संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बहरीन और मिस्र ने भी क़तर के साथ अपने राजनायिक संबंध तोड़ दिए थे.

इसके बाद यमन, लीबिया और मालदीव ने भी क़तर से दूरी बना ली थी.

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ईरान और तुर्की

क़तर पर तमाम तरह की पाबंदियां लगा दी गई हैं. उसके सामने कई शर्तें रखी गई हैं कि वो उनका पालन करे और क़तर ने किसी भी शर्त को मानने से इनकार कर दिया.

क़तर को 13 शर्तें मानने के लिए कहा था, जिसमें आतंकी संगठनों के साथ गठजोड़ समाप्त करने से लेकर अल-जज़ीरा टीवी को बंद करना शामिल था.

हालांकि क़तर ने किसी भी शर्त को मानने से इनकार कर दिया है और वह अपनी ज़रूरतों का सामान ईरान और तुर्की से आयात करने लगा.

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