'चरमपंथी गुटों के खिलाफ़ कार्रवाई नहीं करता पाकिस्तान'

पाकिस्तानी लोग चाहते हैं कि सरकार चरमपंथ पर लगाम कसे. इमेज कॉपीरइट EPA
Image caption पाकिस्तानी में लोग चाहते हैं कि सरकार चरमपंथ पर लगाम कसे.

अमरीका ने चरमपंथ के बारे में अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा है कि भारत और अफ़गानिस्तान में हमले करने वाले चरमपंथियों के खिलाफ़ पाकिस्तान कार्रवाई नहीं कर रहा है.

बुधवार को अमरीकी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में लश्करे-तैयबा जैसे चरमपंथी गुट खुले आम चंदा इकट्ठा करते हैं.

रिपोर्ट में यह तो कहा गया है कि चरमपंथ से लड़ने में पाकिस्तान अमरीका का अब भी एक अहम सहयोगी है, लेकिन साथ में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान उन चरमपंथी गुटों के खिलाफ़ कार्रवाई नहीं करता जो भारत और अफ़गानिस्तान में हमले करते हैं.

पाकिस्तानी सेना की ओर से उत्तरी वज़ीरिस्तान इलाके में चरमपंथी गुट तहरीके-तालिबान पाकिस्तान के ख़िलाफ़ अभियान की तारीफ़ भी की गई है.

लेकिन रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि साल 2016 में पाकिस्तान के अंदर से चरमपंथी गुट हक्कानी नेटवर्क ने अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी फ़ौजियों पर हमले किए. लेकिन पाकिस्तान ने हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की.

जुटा रहे हैं चंदा

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Image caption हाफ़िज़ सईद

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि पाकिस्तान ने लश्करे-तैयबा और जैशे मोहम्मद जैसे चरमपंथी गुटों के खिलाफ़ भी कार्रवाई नहीं की. यह गुट पाकिस्तान के अंदर सक्रिय रहे, चरमपंथियों को प्रशिक्षण देते रहे और चरमपंथी गतिविधियों के लिए चंदा भी जमा करते रहे.

रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र द्वारा चरमपंथी घोषित किए गए लोगों और संगंठनों द्वारा चंदा जमा करने पर भी कोई सख़्ती नहीं की जा रही है.

रिपोर्ट का कहना है कि लश्करे तैयबा पाकिस्तान में प्रतिबंधित तो है, लेकिन लश्कर की शाखा माने जाने वाले जमात-उद-दावा और फलाहे इंसानियत फाउंडेशन जैसे संगठन खुले आम चंदा जमा करते हैं.

यह भी कहा गया है कि आतंकी हाफ़िज सईद अब भी पाकिस्तान में रैलियों को संबोधित कर रहे हैं.

रिपोर्ट में जनवरी 2016 के पठानकोट हमले का हवाला देते हुए कहा गया है कि भारतीय अधिकारी जम्मू कशमीर में सीमा पार से हमलों के लिए पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराते हैं.

साल 2008 के मुंबई हमलों का ज़िक्र करते हुए अमरीकी विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में 7 चरमपंथियों के खिलाफ़ अदालत में मुकदमे लंबित हैं और इन हमलों में मुख्य चरमपंथी ज़कीउर रहमान लखवी ज़मानत पर रिहा होकर घूम रहे हैं.

चरमपंथ के ख़िलाफ़ कार्यक्रम

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Image caption पाक सेनाध्यक्ष जनरल कमर बाजवा

रिपोर्ट के अनुसार अमरीकी विदेश मंत्रालय के तहत पाकिस्तान में चरमपंथ को रोकने के मकसद से कुछ कार्यक्रम चलाए गए, लेकिन पाकिस्तानी सरकार द्वारा इसके लिए अमरीकी प्रशिक्षकों को वीज़ा न दिए जाने के कारण बाद में यह कार्यक्रम पाकिस्तान के बजाए तीसरे देशों में आयोजित करने पड़े.

अमरीकी रिपोर्ट के मुताबिक साल 2016 में चरमपंथी गुट दाएश या इस्लामिक स्टेट ही सबसे बड़ा खतरा रहा और विश्व भर में कुल चरमपंथी हमलों में से 55 प्रतिशत हमले इराक़, अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान, भारत और फ़िलिपींस में किए गए थे.

भारत और अमरीका के बीच साल 2016 में आतंकवाद से लड़ने के लिए सहयोग में बढ़ोतरी का ज़िक्र करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि अल कायदा, दाएश (इस्लामिक स्टेट), जैशे मोहम्मद, लश्करे तैयबा और डी कंपनी के खिलाफ़ दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय अधिकारियों ने यह चिंता जताई थी कि इंटरनेट के ज़रिए दाएश भारत में भी आतंकी भर्ती करने की क्षमता रखता है.

रिपोर्ट के अनुसार साल 2016 में भारत में इस्लामिक स्टेट के 68 समर्थकों को गिरफ़्तार भी किया गया था.

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