जापान की फ़र्स्ट लेडी ने ट्रंप से क्यों नहीं बात की?

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Image caption जापान की फर्स्ट लेडी अकी अबे की ट्रंप से पहली मुलाकात फरवरी में हुई थी

जापान में शुक्रवार की सुबह जब लोग सो कर उठे तो उन्हें उनकी फ़र्स्ट लेडी अकी अबे की अंग्रेजी नहीं बोलने की ख़बर देखने को मिली.

ऐसा अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के न्यूयॉर्क टाइम्स में छपे एक इंटरव्यू में किए गए उस कमेंट के बाद हुआ जिसमें उन्होंने जापान के प्रधानमंत्री की पत्नी अकी अबे के बारे में कहा था कि वो अंग्रेज़ी नहीं बोल सकतीं.

दरअसल जी20 सम्मेलन में डिनर के दौरान जापान की प्रथम महिला अकी अबे खामोश रही थीं. ट्रंप ने इंटरव्यू के दौरान इसका जिक्र करते हुए कहा कि अकी शानदार महिला हैं लेकिन वो अंग्रेज़ी नहीं बोल सकतीं, और दो घंटे तक चले उस डिनर में उनकी बगल में बैठना कठिन रहा.

हालांकि, जब लोगों ने इंटरनेट पर अंग्रेज़ी में फ़र्स्ट लेडी के एक भाषण के वीडियो को देखा, तो यह अनुमान लगाया कि वो ट्रंप से बातचीत नहीं करना चाहती थीं इसलिए उन्होंने अंग्रेज़ी नहीं जानने का बहाना बनाया.

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Image caption फरवरी में ट्रंप और अकी अबे के बीच दुभाषिए के जरिए बातचीत हुई थी

जापान में छिड़ी बहस

वैसे ट्रंप का यह कहना कि वो अंग्रेजी में हैलो तक नहीं बोल सकतीं अतिश्योक्ति हो सकता है लेकिन अंग्रेज़ी में लिखे भाषण को पढ़ लेने मात्र का मतलब यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि वो डिनर के दौरान सहज़ बातचीत करने में सक्षम हैं.

इससे पहले के राजनयिक मुलाक़ातों के दौरान वो दुभाषिए का उपयोग करती रही हैं और जब एक बार बीबीसी ने उनसे इंटरव्यू का आग्रह किया था तो उन्होंने ये कहा गया कि वो तभी स्वीकारेंगी जब यह जापानी भाषा में होगा.

अकी अबे पर जी20 शिखर वार्ता के दौरान ट्रंप के इस मुलाकात पर जापान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि इस पर कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आएगी क्योंकि वो एक निजी बातचीत थी.

मंत्रालय ने साथ ही कहा, "हालांकि उस इंटरव्यू के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि अकी अबे के साथ शाम गुजार कर अच्छा लगा और वो वास्तव में एक सुंदर महिला हैं."

लेकिन जापान में ट्रंप की इस टिप्पणी पर बहस छिड़ गई है, वहां के लोग इस मसले पर तीन खेमों में बंटे हुए दिखने लगे हैं.

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उन्हें अंग्रेज़ी बोलना क्यों आना चाहिए?

हफ़िंगटन पोस्ट जापान के संपादक टोमोको नागानो पूछते हैं कि क्या ट्रंप जापानी में हैलो बोल सकते हैं तो ट्विटर पर एक शख्स @cevicherohack ने पूछा कि अंग्रेज़ी बोलने वालों का यह मानना कि सभी इस भाषा में बात कर सकते हैं, बहुत परेशान करता है.

अंग्रेज़ी उनकी मातृ भाषा नहीं है यह जानते हुए क्या ट्रंप को उनसे बातचीत की शुरुआत नहीं करनी चाहिए थी?

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@hidezumi का कहना है कि बातचीत की शुरुआत नहीं करना राष्ट्रपति ट्रंप की अशिष्टता दर्शाता है. न्यूयॉक टाइम्स की रिपोर्टर हिरोको ताबुची कहती हैं यहां मसला ट्रंप की बातचीत के कौशल का है न कि अकी अबे की.

वो कुछ ऐसा नहीं बोलना चाहती थीं जिसका ग़लत अर्थ निकाला जाए, संभवतः इसलिए उन्होंने ख़ामोश रहना उचित समझा. मैं ख़ुद अंग्रेज़ी नहीं बोलने वाले देश से हूं और किसी डिनर पार्टी के दौरान मुझे इस भाषा में बोलने में सहज महसूस करने में सालों लगे.

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जापानी मीडिया ने अब तक इस विषय पर तटस्थ रहते हुए अमरीकी मीडिया में क्या कहा जा रहा है इसकी रिपोर्ट की. संभवतः इसलिए क्योंकि जापान के राष्ट्रीय स्कूलों में चल रहे घोटाले में अपनी भूमिका की वजह से अकी अबे विवादों में हैं.

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