चीन के अनदेखे अनजाने मुसलमान

चीन में भी है एक अल्पसंख्यक मुसलमानों का समुदाय. इन्हीं कम जाने जाने वाले हुई समुदाय के लोगों और उनकी परंपराओं पर डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म बनाई है वांग शिउबो ने.

चीन के निंगशिया प्रांत में रहने वाले हुई समुदाय के लोग अपने बैलों की बलि देते वक्त उन्हें पानी में चाकू की परछाईं दिखाते हैं. माना जाता है कि परछाईं देखने के बाद बैल को अपनी मौत के बारे में पता चल जाता है.

इसके साथ ही व्यक्ति को भी अपने जीवन और इसके कभी ना कभी खत्म होने का अहसास होता है. समुदाय के लोग इसे आत्मावलोकन का समय मानते हैं.

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वांग शिउबो का कहना है कि वो बचपन से ही बैलों की बलि की परंपरा देखते आए हैं और जानना चाहते थे कि मौत के बाद उनके साथ क्या होगा.

वांग को अपने सवाल का कोई जवाब नहीं मिला, लेकिन उन्हें एक डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म 'नाइफ़ इन द क्लियर वाटर' बनाने के लिए इससे ज़रूर प्रेरणा मिली.

दुख

फ़िल्म की कहानी निंगशिया प्रांत में रहने वाले बूढ़े ज़ीशान और उनके बेटे के इर्द-गिर्द घूमती है जो अपनी पत्नी की मौत का दुख मना रहे हैं.

ज़ीशान के बेटे अपनी मां की मौत के 40 दिन बाद अपने बैल की बलि देना चाहते हैं. जानवरों से प्यार करने वाले ज़ीशान इसके ख़िलाफ़ तो नहीं हैं लेकिन वो इसका समर्थन भी नहीं करते.

जब एक दिन सुबह से बैल खाना पीना छोड़ देता है, तो ज़ीशान को लगता है कि कहीं बैल ने पानी में चाकू की परछाईं तो नहीं देख ली है.

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शूटिंग

फ़िल्म 'नाइफ़ इन द क्लियर वाटर' बनाने के लिए वांग 2010 में पहाड़ों में इस इलाके में गए, जहां हुई समुदाय के लोग रहते हैं और उन्होंने वहां क़रीब 10 महीने गुज़ारे.

इसके बाद उन्होंने फ़िल्म बनाने के लिए धन जमा करने की कोशिश की. इसमें उन्हें कई साल लगे और 2015 के बाद ही उन्होंने वहां के लोगों को ले कर शूटिंग शुरू की.

वांग बताते हैं, "यहां रहने वाले लोग पहले फ़िल्म में शामिल नहीं होना चाहते थे. ये जगह शहर से काफ़ी दूर है और लोग फ़िल्मों के साथ सहज नहीं थे. लेकिन मैंने उन्हें मनाया और वो राज़ी हो गए."

ये फ़िल्म चीन के एक अनदेखे हिस्से को देश और दुनिया के सामने पेश करती है.

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वांग कहते हैं, "पश्चिमी देशों में चीन के मुसलमानों के बारे में कम जानकारी है और अमरीका और यूरोप के कई लोगों ने मुझे कहा कि वो मुसलमान हुई समुदाय के बारे में नहीं जानते थे."

वांग का कहना है कि चीन में रहने वाले मुसलमानों को लेकर अब तक कोई फ़िल्म नहीं बनाई गई है.

फ़िल्म को टोक्यो, हवाई, चीनी, बुसान समेत कई फ़िल्म समारोहों में दिखाया गया है और इसे काफ़ी सराहना भी मिली है.

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