इसराइल ने मेटल डिटेक्टर हटाया पर मुसलमान मस्जिद में जाने को तैयार नहीं

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विवादित मेटल डिटेक्टर हटाने के फैसले के बावजूद, यरुशलम में मुसलमान पवित्र स्थल का बहिष्कार कर रहे हैं.

टेंपल माउँट या हरम अल शरीफ़ के नाम से मशहूर इस जगह पर 14 जुलाई को दो इसराइली पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई थी.

इस घटना के बाद इसराइली अधिकारियों ने पवित्र स्थल के प्रवेश द्वार पर मेटल डिटेक्टर लगाए थे. इसके विरोध में फ़लस्तीनियों ने लगभग एक हफ़्ते जमकर प्रदर्शन किया.

इसराइल ने यरूशलम में हरम-अल शरीफ़ से मेटल डिटेक्टर हटाए

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मेटल डिटेक्टर लगाकर अल अक़्सा मस्जिद में दाख़िल होने के उनके अधिकार पर पाबंदी लगाई गई है.

तमाम अतिरिक्त सुरक्षा हटाने की मांग

फ़लस्तीनी विधायी परिषद के सदस्य डॉक्टर मुस्तफ़ा बगूटी ने बीबीसी से कहा है कि लोग अब मस्जिद में तभी लौटेंगे, जब इस्लामी नेता इस बारे में संतुष्ट हो जाएंगे कि तमाम अतिरिक्त सुरक्षा हटा दी गई है.

उन्होंने कहा, ''धार्मिक नेता ब्योरे की पड़ताल कर रहे हैं कि इसराइल ने सभी मेटल डिटेक्टर और सभी कैमरे हटाएं हैं या नहीं, जो 14 जुलाई के बाद लगाए गए थे. आश्वस्त होने के बाद लोग मस्जिद में जाने लगेंगे.''

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डॉक्टर मुस्तफ़ा बगूटी ने ये भी कहा कि मस्जिद में पहले से ही सुरक्षा बंदोबस्त बहुत ज़्यादा हैं और इसराइल ने जो कदम उठाए, उनकी ज़रूरत ही नहीं थी.

उन्होंने कहा, ''हमें नहीं पता कि मस्जिद के भीतर कोई हथियार है या नहीं, जैसा कि इसराइली पुलिस दावा करती है, हालांकि वो इसे साबित नहीं कर पाई है. नौबत ये है कि इसराइली सुरक्षाकर्मियों की मंज़ूरी के बिना कोई अपाहिज़ व्हील-चेयर भी मस्जिद में नहीं ले जा सकता.''

अधिकारियों का कहना है कि मस्जिद परिसर से इलेक्ट्रॉनिक गेट्स हटा लिए गए हैं. इस पर फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री रमी हमदल्लाह ने कहा है कि उनके लोग जॉर्डन से इसकी पुष्टि का इंतज़ार कर रहे हैं जो पवित्र स्थल के संरक्षण के लिए ज़िम्मेदार है.

उन्होंने कहा, ''हम जॉर्डन में अपने भाइयों से उम्मीद कर रहे हैं कि वो हमें पूरी बात बताएं. अभी तक हमें ब्यौरा नहीं मिला है. ख़ुदा जाने अगले कुछ घंटों में हमें ये ख़बर मिल जाए. इलेक्ट्रॉनिक गेट्स हटाने के बारे में हमें अभी तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है.''

राष्ट्रीय चेतना का शक्तिशाली प्रतीक

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यरुशलम में मौजूद बीबीसी संवाददाता टॉम बेटमैन का कहना है कि इसराइली अधिकारियों ने जब पवित्र स्थल पर सुरक्षा घेरा बढ़ाया, तो फ़लस्तीनियों को लगा कि उनकी मस्जिद पर नियंत्रण बढ़ाने की और कोशिश की जा रही है.

अल अक़्सा मस्जिद, कब्ज़े वाले पूर्वी यरुशलम में फ़लस्तीनियों की राष्ट्रीय चेतना का एक शक्तिशाली प्रतीक मानी जाती है.

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