'पाकिस्तान में न कोई सरकार, न ही कैबिनट'

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पनामा पेपर्स मामले में सुप्रीम कोर्ट के शुक्रवार को सुनाए फ़ैसले के बाद से इस वक्त पाकिस्तान में न कोई सरकार है न ही कोई कैबिनट अस्तित्व में है.

प्रधानमंत्री भी सरकारी आवास खाली करके जा चुके हैं. लेकिन मुस्लिम लीग (नवाज़) की आपस में बातचीत जारी है. पार्टी ने इस्लामाबाद में जो बैठक बुलाई है, उसमें प्रधानमंत्री के नाम पर बात हो सकती है.

मीडिया में जो नाम सामने आ रहा है, उसके मुताबिक रक्षा मंत्री ख्वाज़ा आसिफ को 45 दिनों के लिए प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है जिसके बाद नवाज़ शरीफ के भाई और पंजाब के मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ को असेंबली का चुनाव लड़वा जाएगा और जब वो चुन लिए जाएंगे, जब उनको प्रधानमंत्री बनाया जाएगा.

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सरकार में नया चेहरा, क्या होंगी दिक्कतें?

नवाज़ शरीफ के मंत्री एक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ये इच्छा जाहिर की है कि सरकार तोड़ने का उनका कोई इरादा नहीं है और जो जून 2018 में सरकार का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उसे वो पूरा करेंगे.

इससे ये लगता है कि पार्टी के भीतर से ही किसी को प्रधानमंत्री बनाया जाएगा.

अब जो भी सरकार का नया चेहरा होगा, उसे दिक्कतें होंगी.

शरीफ परिवार से जैसे सुप्रीम कोर्ट ने हिसाब किताब मांगा है उससे तो लगता है कि शाहबाज शरीफ भी सख्त निगरानी में होंगे. लेकिन मुस्लिम लीग (नवाज़) के लिए सबसे बड़ी चुनौती ये है कि चुनाव तक इंतज़ार करें.

वो भी यही चाहते हैं कि वक्त से पहले चुनाव न करवाए जाएं ताकि पाकिस्तान में बिजली की कटौती खत्म करने जैसे वादों को पूरा किया जा सके.

साथ ही विक्टम कार्ड का भी चुनाव में फायदा मिलेगा.

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सीटों का आंकड़ा और गठजोड़ की गुंजाइशें

नवाज़ शरीफ ने 2013 चुनाव में बहुमत हासिल किया था. उनकी पोजिशन असेंबली में काफी अच्छी रही है.

शरीफ के बाद इमरान खान की पीटीआई यानी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी हैं. ये दो बड़े दल हैं लेकिन इन दोनों के बीच गठबंधन होने की उम्मीदें कम ही हैं.

अगर चार-पांच छोटी पार्टियां मिल जाएं तो बात अलग है. पर इसकी संभावनाएं कम ही दिखती हैं.

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पाकिस्तान में अब आगे क्या?

जो सियासी झटका लगना था, वो सुप्रीम कोर्ट ने दे दिया है.

सरकार के लोगों से अगर आप बात करें तो वो लोग कहते हैं कि लंदन के फ्लैट और न ही पनामा लीक में जो आरोप हैं, इनमें से किसी में सज़ा नहीं मिली. बल्कि यूएई में जो बेटे की कंपनी में बिना सैलरी के चेयरमैन थे, उसको वजह बनाकर बड़े कमज़ोर केस में नवाज़ को सज़ा मिली है.

लेकिन विपक्षी पार्टियां इस पर खुशी जाहिर की है. इमरान ख़ान ने रविवार को इस्लामाबाद में बहुत बड़े जलसे का ऐलान किया है.

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पाकिस्तान की फौज़ की भूमिका

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सेना की तरफ से खामोशी है.

सेना की तरफ से कोई ट्वीट भी नहीं आया है लेकिन पिछले दिनों एक जांच टीम बनी थी, जिसमें आईएसआई और एमआई के लोग भी थे. तब फौज़ ने कहा था कि जो मुल्क का कानून है उसके मुताबिक जो उनसे चीजें मांगी गई हैं फौज वो पूरा कर रही है. इस पर काफी लोगों ने तनकीद भी की थी.

लेकिन आज मंत्रियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दबे शब्दों में कुछ इशारे तो किए हैं कि यहां फौजी आए और 12-12 साल राज करके चले गए, इन लोगों से कभी जवाब नहीं मांगे गए.

ये कुर्बानी हमेशा सियासी लोगों से ही क्यों मांगी जाती है.

साद रफीक़ जो रेलवे के मंत्री थे, उनका कहना था कि अब जब मुस्लिम लीग (नवाज) आएगी, बार-बार राजनीतिज्ञों को बाहर जाने से रोकने के लिए कानून लाएगी. लेकिन वो सफल होंगे या नहीं, ये वक्त की गोद में छिपा है.

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