पुतिन मोह कहीं ट्रंप को मुश्किलों में न डाल दे!

अभी हाल ही में फ्रीज़ पर लगाने वाले एक चुंबक ने मेरा ध्यान अपनी ओर खींचा. यह क़रीब सौ डॉलर का रहा होगा, लेकिन इसमें सबसे खास बात जो मुझे लगी वो यह थी कि इस पर अमरीका के निर्माताओं में से एक बेंजामिन फ्रैंकलिन की जगह व्लादीमिर पुतिन की तस्वीर लगी हुई थी.

मुझे पता है कि यह सिर्फ़ एक फ्रीज़ मैगनेट है, लेकिन यह पुतिन-ट्रंप और अमरीका-रूस के रिश्तों की पूरी कहानी बयां करता है.

डोनल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस में आने के छह महीने के बाद रूसी लोग अमरीका पर अपना प्रभाव महसूस करने लगे हैं.

अगर वे ऐसा सोचने लगे हैं तो इसके लिए कौन जिम्मेवार है?

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रूस पर नए प्रतिबंध लगाने की ओर बढ़ा अमरीका

ख़ास तौर पर तब जब रूस पर अमरीकी चुनाव को प्रभावित करने और अपनी कठपुतली व्हाइट हाउस में बैठाने का आरोप लग रहा हो.

अफ़वाहों का बाज़ार गर्म हो कि रूसी वकील, लॉबीइस्ट और कुलीन वर्ग के लोग ट्रंप की टीम और उनके परिवार के साथ मिलकर षड्यंत्र रच रहे हैं.

ऐसी परिस्थिति में इन आरोपों की सच्चाई आधिकारिक जांच पर निर्भर है कि वाक़ई में कितनी सच्चाई है इन आरोपों में.

ट्रंप और पुतिन की नज़दीकी

पूरी दुनिया में पुतिन की ताकत और ट्रंप की कमज़ोरी को लेकर भी बहस हो सकती है. ऐसा लग रहा है कि व्लादीमिर पुतिन साइबर सुपरपावर चलाने को लेकर बदनाम हो रहे हैं.

जब इन सब चर्चाओं की शुरूआत हो रही थी तब डोनल्ड ट्रंप रूस के प्रति बहुत सद्भाव दिखा रहे थे.

रूस को उम्मीद थी कि अमरीका के नए राष्ट्रपति अमरीका और रूस के संबंधों की नई शुरुआत करेंगे.

उस वक्त रूस के सरकारी टीवी पर एक न्यूज़ एंकर ने ट्रंप के बारे में कहा था कि वो, "एक अल्फा पुरुष हैं...एक सच्चे आदमी."

अमरीकी चुनाव के नतीजों के बाद एक रूसी अधिकारी ने मुझसे कहा था कि उन्होंने ट्रंप की जीत सिगार और शैम्पेन की बोतल के साथ मनाई है.

लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप के छह महीने गुज़रने के बाद भी रूस पर अमरीकी पाबंदियां अपनी जगह पर बनी हुई हैं.

पिछले दिसंबर से अमरीका में दो रूसी राजनयिक परिसर बंद पड़े हैं. इसे ओबामा ने अपने कार्यकाल में ही बंद किया था. ट्रंप के आने के बाद अमरीका के साथ 'ग्रैंड डील' को लेकर जो अपेक्षाएं थी, उसकी भी रूस में कहीं चर्चा नहीं हो रही है.

लेकिन रूस सीधे तौर पर डोनल्ड ट्रंप पर इसका ठीकरा नहीं फोड़ रहा है.

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ट्रंप के प्रति सहानुभूति

एक रूसी अख़बार ने हाल ही में इसके बारे में लिखा है कि, "मौजूदा माहौल में ट्रंप की ओर से रूस-अमरीका संबंधों को सुधारने की दिशा में कोई भी कदम उठाने की संभावना नज़र नहीं आ रही है क्योंकि इससे उन पर अमरीका में संदेह बढ़ जाएगा और उन्हें देशद्रोही के तौर पर भी देखा जाएगा."

कुछ दिनों पहले मैं एक रूसी सीनेटर से बात कर रहा था. उन्होंने शिकायती लहज़े में कहा कि ट्रंप रूस के सवाल पर भारी दबाव झेल रहे हैं जिससे अमरीका और रूस के कूटनीतिक संबंध और जटिल हो रहे हैं.

उन्होंने मुझसे कहा, "ट्रंप एक क़ैदी की तरह हैं और आप क़ैदी से कैसे बात कर सकते हैं?"

लेकिन रूस और अमरीका ने जी20 सम्मेलन जैसे मौके पर बात की है जहां पुतिन और ट्रंप की मुलाकात हुई.

हालांकि रूस की अपेक्षाओं की तुलना में आपसी संबंधों की यह गति बहुत धीमी रफ़्तार से चल रही है.

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ट्रंप बराबर यह भी कह रहे हैं कि रूस के साथ प्रगाढ़ संबंध रखने में ग़लत क्या है. वो इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि यह अमरीका के हित में ही है.

जहां एक ओर अमरीकी राष्ट्रपति और अमरीका के सहयोगी पश्चिमी देश अक्सर रूस के साथ कई मसलों पर अलग दिखते हैं तो वहीं डोनल्ड ट्रंप पुतिन के क़रीब जाते नज़र आ रहे हैं.

ट्रंप भले ही खुलेआम पुतिन की तारीफ़ कर चुके हों, लेकिन फिर भी रूस अमरीकी प्रशासन पर कड़ी नज़र रखे हुए है. रूस के प्रति डोनल्ड ट्रंप का यह मोह उन्हें मुश्किलों में डालने वाला साबित हो सकता है?

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