क़तर पर किसी नरमी के मूड में नहीं हैं अरब देश

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Image caption चारों अरब देशों के विदेश मंत्री बहरीन में रविवार को मिले

क़तर का राजनयिक बहिष्कार करने वाले चार अरब देश अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और सख़्त बयान देते हुए उन्होंने कहा है कि पड़ोसी देश को उनकी 13 मांगों पर जवाब देना ही होगा.

इन देशों ने कहा है कि इसके बाद ही वे संवाद के लिए राज़ी होंगे.

सऊदी अरब, बहरीन, मिस्र और यूएई ने 5 जून को क़तर पर चरमपंथ को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए संबंध तोड़ लिए थे.

क़तर ने इन आरोपों और पाबंदियां हटाने के लिए अरब देशों की शर्तों को ख़ारिज़ कर दिया था.

इन शर्तों में क़तर के समाचार ब्रॉडकास्टर अल-जज़ीरा को बंद करना और ईरान से संबंधों को कम करना शामिल है.

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बहरीन में अरब देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक

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क़तर संकट आगे क्या होगा?

अरब देशों के विदेश मंत्रियों ने बहरीन की राजधानी मनामा में रविवार को इस पर चर्चा की. इसके बाद बहरीन के विदेश मंत्री शेख ख़ालिद बिन अहमद अल-ख़लीफ़ा ने कहा, 'चारों देश क़तर से बात करने को तैयार हैं, बशर्ते क़तर चरमपंथ को फंडिंग रोकने और दूसरे देशों के मसलों में दख़ल न देने का ऐलान करे और 13 मांगों पर जवाब दे.'

सऊदी अरब ने क़तर से अपनी ज़मीनी सीमा बंद कर दी है, जबकि चारों देशों ने क़तर से हवाई और समुद्री लिंक भी तोड़ लिए हैं. पश्चिमी देशों के समर्थन से हुए कुवैत के कूटनीतिक प्रयास भी मसले का हल निकालने में नाकाम रहे हैं.

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इसी महीने लगा था कि अरब देश अपनी 13 मांगों की सूची वापस ले सकते हैं, जब संयुक्त राष्ट्र में राजनयिकों ने पत्रकारों को बताया था कि वे चाहते हैं कि क़तर छह बड़े सिद्धांत स्वीकार कर ले.

इनमें चरमपंथ के ख़िलाफ़ प्रतिबद्धता और उकसावे की कार्रवाइयों को ख़त्म करने जैसी बातें शामिल थीं. लेकिन रविवार को साफ़ हो गया कि 13 मांगों वाली सूची अब भी मेज़ पर रखी है.

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