अरब देशों से बातचीत के लिए क़तर ने 'टेढ़ी की उंगली'

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पड़ोसी अरब देशों की पाबंदियां झेल रहे क़तर ने अब उन्हें बातचीत की मेज़ पर लाने के लिए उंगली टेढ़ी की है.

ख़बर है कि क़तर ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में आधिकारिक शिकायत करके इस व्यापारिक बहिष्कार को चुनौती दी है.

अब इस विवाद का हल निकालने की कोशिश डब्ल्यूटीओ की प्रक्रिया के तहत की जाएगी. इसका मतलब ये है कि सऊदी अरब, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को क़तर के साथ बातचीत की मेज़ पर आना होगा. जबकि इससे पहले इन देशों ने किसी भी तरह की बातचीत के लिए 13 शर्तें रखी थीं.

लेकिन डब्ल्यूटीओ की सामान्य प्रक्रिया से अगर 60 दिनों के भीतर कोई हल नहीं निकला तो यह विवाद डब्ल्यूटीओ की ओर से नियुक्त एक पैनल को दे दिया जाएगा.

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Image caption क़तर पर है चरमपंथी संगठनों की मदद का आरोप

5 जून को क़तर से तोड़े थे संबंध

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने क़तर की ओर से डब्ल्यूटीओ में शिकायत किए जाने की ख़बर सबसे पहले दी. हालांकि बीबीसी से बातचीत में विश्व व्यापार संगठन ने कहा कि उसे अब तक इसकी जानकारी नहीं मिली है, इसलिए वह ख़बर की पुष्टि नहीं कर सकता.

सऊदी अरब, बहरीन और यूएई ने 5 जून को क़तर पर चरमपंथ को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए संबंध तोड़ लिए थे. उन्होंने अरब में रह रहे क़तर के नागरिकों को 14 दिनों के भीतर देश छोड़ने को कह दिया था और अपने नागरिकों के भी क़तर आने-जाने पर पाबंदी लगा दी थी.

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रविवार को चारों देशों के विदेश मंत्री बहरीन की राजधानी मनामा में मिले थे और इसके बाद उन्होंने 13 शर्तों के बिना संवाद करने से मना कर दिया था. इन शर्तों में क़तर के समाचार ब्रॉडकास्टर अल-जज़ीरा को बंद करना और ईरान से संबंधों को कम करना शामिल है.

क़तर ने इन आरोपों और पाबंदियां हटाने के लिए अरब देशों की शर्तों को ख़ारिज़ कर दिया था.

दो वजहों से बिगड़ी क़तर से बात

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मिस्र ने भी क़तर से राजनयिक संबंध तोड़ लिए थे, लेकिन वहां रह रहे अपने 1.80 लाख नागरिकों पर पाबंदियां नहीं लगाई थीं. यमन, मालदीव और लीबिया की सरकारों ने भी बाद में ऐसा ही किया था.

लेकिन सऊदी अरब, यूएई, बहरीन और मिस्र ने क़तर के विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल पर भी पाबंदी लगा दी थी.

तेल समृद्ध क़तर लंबे समय से महत्वाकांक्षी विदेश नीति अपनाए हुए था. लेकिन दो प्रमुख मुद्दों पर उसके पड़ोसी अरब देश ख़ासे नाराज़ हो गए.

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पहला, क़तर पर कट्टरपंथी इस्लामी समूहों को समर्थन देने का आरोप. क़तर स्वीकार करता है कि उसने कुछ समूहों- मसलन मुस्लिम ब्रदरहुड की मदद की, लेकिन अलक़ायदा या कथित इस्लामिक स्टेट से जुड़े चरमपंथी संगठनों की मदद से वह इनकार करता है.

दूसरा मुद्दा है, क़तर के ईरान से बेहतर होते संबंध. ईरान के साथ क़तर दुनिया का सबसे बड़ा गैस फील्ड साझा करता है. शिया मुस्लिम शक्ति ईरान और सुन्नी मुस्लिम ताक़त सऊदी अरब प्रमुख क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी हैं.

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