बीजिंग की आलोचना करने वाले लेख ने चीन में मचाया हंगामा

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चीन की राजधानी बीजिंग में रोजमर्रा की जिंदगी के दुष्कर होने से जुड़ा लेख अब चीनी सरकार की सेंसरशिप का शिकार हो गया है.

इस निबंध का शीर्षक "बीजिंग में 2 करोड़ लोग मानकर चल रहे हैं कि वह 'जिंदगी' जी रहे हैं" है.

ये लेख बताता है कि औद्योगिकीकरण, लोगों के बीजिंग में आकर बसने और बढ़ती मंहगाई के चलते इस शहर के कई लोग बस किसी तरह अपनी ज़िंदगी काट रहे हैं.

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ये लेख 23 जुलाई मैसेजिंग ऐप वीचैट पर जारी हुआ था.

इसके बाद से ये लेख चीनी सोशल मीडिया में फैल चुका है. हालांकि, इसके लेखक जैंग गुओचेन ने माफी मांग ली है. लेकिन कई लोग कह रहे हैं कि उन्हें ऐसा करने के लिए कहा गया है.

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चीन के शांशी प्रांत के रहने वाले गुओचेन ने चीन में प्रवासन और बेघर होने पर एक लेख लिखा था.

अपने हालिया लेख में गुओचेन ने ईमानदारी से लिखा है, "बीजिंग एक ट्यूमर है और ये इतनी तेजी से बढ़ रहा है जिसे कोई नियंत्रित नहीं कर सकता."

उन्होंने लिखा है, "बीजिंग में इंसान के लिए किसी तरह की संवेदनशीलता नहीं बची है और ये बाहर से आने वालों का शहर है. ये शहर एक ऐसी जगह बन चुका है जहां कई लोग ये मानकर चल रहे हैं कि वह जिंदगी जी रहे हैं."

सोहो न्यूज़ के मुताबिक, डिलीट किए जाने तक 70 लाख लोग इस लेख को पढ़ चुके थे.

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इस लेख को अब इंटरनेट पर देखने की कोशिश करने पर "कंटेंट रेगुलेशन नियमों के उल्लंघन की वजह से इस लेख को दिखाया नहीं जा सकता" संदेश आ रहा है.

चीन में सरकार की नीतियों का विरोध करने वाले लेखों को अक्सर सेंसरशिप का सामना करना पड़ता है.

साल 2015 की मार्च में चीन में प्रदूषण पर बनी डॉक्यूमेंट्री 'अंडर द डोम' को 10 करोड़ बार देखे जाने के बाद बैन कर दिया गया.

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Image caption चीन की सरकारी मीडिया ने गुओचेन की माफी की खबर को प्रमुखता से छापा है.

कई इंटरनेट यूजर्स ने गुओचेन के लेख को ऑनलाइन फोरम्स पर एक बार फिर जारी कर दिया है.

लेकिन सरकारी मीडिया ने इस आर्टिकल को ज्यादा तरजीह नहीं दी है. इसकी जगह बीजिंग यूथ डेली ने 27 जुलाई के आर्टिकल में गुओचेन के माफी मानने वाली खबर पर ध्यान दिया है.

जेंग गुओचेन ने द इकोनॉमिक ऑब्जर्वर से बात करते हुए बताया कि उनके आर्टिकल में तमाम कमियां हैं और ये मजाकिया अंदाज में था.

सोशल मीडिया पर कई लोगों को शक है कि जैंग पर दवाब डालकर माफी मंगवाई जा रही है.

एक सोशल मीडिया यूजर कहते हैं कि ऐसा लगता है कि लेखक डर गए हैं.

वहीं, एक सोशल मीडिया यूजर राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कैंपेन का मजाक उड़ाते हुए कहते है, "चीनी सपने से जगने की बात करने की आपकी हिम्मत कैसे हुई?"

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