बुरक़ा पहनने वालियों से ना पूछें ये सवाल

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बुरक़ा और हिजाब को लेकर कुछ लोगों की धारणा है कि इसे पहनने के लिए मज़बूर किया जाता है.

पश्चिमी देशों में पहनावे को लेकर जब बात आती है तो कुछ मौकों पर सुनने को मिलता है 'अपने देश चले जाओ.'

इस्लामी तहजीब का हिस्सा ये पहनावा, हाल के दिनों में सबसे अधिक विवादित रहा है.

बीबीसी थ्री ने बुरक़ा पहनने वाली कुछ महिलाओं से जानना चाहा कि उन्हें इससे संबंधित किन सवालों का सामना करना पड़ा.

बुरक़ा बनने वाली महिलाओं से लोग कभी कभी बड़े मज़ाकिया किस्म के सवाल पूछ लेते हैं.

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1- क्या आप निंजा हैं?

असल में निंजा एक कार्टून कैरेक्टर है, जो जापान के मध्यकाल के गोपनीय कारनामे करने वाले योद्धाओं पर आधारित है.

लेकिन यहां इसका भाव निंजा से कम और चरमपंथ से ज़्यादा संबंधित होता है.

हिजाब या बुरक़े को देख कर आम तौर पर लोगों के ज़हन में सवाल उठता है कि 'क्या ये पहनने के लिए आपको मज़बूर किया जाता है?'

इन महिलाओं का कहना है कि ये एक संस्कृति का हिस्सा है. चाहे सूडान, सउदी अरब, नाइजीरिया हो या कनाडा, मुस्लिम महिलाएं बुरक़ा, हिजाब और नक़ाब पहनती हैं.

कुछ सवाल तो ऐसे भी होते हैं, जैसे, 'आप लकी हैं जो मेकअप वगैरह नहीं करना पड़ता.'

हो सकता है कि इसका जवाब कुछ लोगों के हां हो लेकिन कुछ लोग इससे सहमत नहीं भी हो सकते हैं.

लेकिन अगर कोई कहे कि, 'आप अपने देश क्यों नहीं चले जाते?', तो इसका आशय क्या होता है.

हो सकता है कि ऐसा कहने वाले का इशारा पाकिस्तान या कोई ख़ास देश हो. लेकिन बहुत से ऐसे लोग हो सकते हैं जो कभी पाकिस्तान या उस देश गए ही न हों.

या वे जन्म से ही उसी देश में रहते आए हों और वहीं का हिस्सा हों. असल में इसका एक मतलब ये भी होता है कि क्या आप विशेष देश के मूल्यों का समर्थन करते हैं?

कुछ लोगों के ज़हन में ऐसे भी सवाल आ सकते हैं कि, 'बुरक़ा पहन कर आप महिलावादी नहीं हो सकते.'

लेकिन ऐसा कहते हुए इस बात को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है कि ये महिलाओं की आज़ादी का मसला है कि वो क्या पहने, क्या नहीं.

इन महिलाओं का कहना था, "जो महिलाएं ऐसे पहनावे नहीं पहनतीं, उन्हें हम ग़लत नहीं समझते. हम उनकी पूरी इज़्ज़त करते हैं."

'बुरक़े में क्या तुम्हारी सभी तस्वीरें एक जैसी नहीं होतीं?' कुछ लोग ऐसा भी पूछ सकते हैं.

इसके पीछे का आशय होता है कि चेहरे एक जैसे दिखते हैं. लेकिन लोग ये भूल जाते हैं कि हरेक की आंखें अलग अलग होती हैं.

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आध्यात्मिक अनुभव

कुछ लोग पूछते हैं कि 'आप क्या छिपा रही हैं?'

असल में मीडिया में जब कोई ऐसी ख़बर आती है, जिसका संबंध इस्लाम से होता है तो मुस्लिम महिलाओं को अपने धर्म का बचाव करना पड़ता है.

पर, इन महिलाओं का कहना है, 'असल में ये हमारी समस्या नहीं है ना ही इससे हमारा कोई लेना देना है. जब लोग पूछते हैं कि आपके लोग ऐसा क्यों करते हैं? तो हमारा कहना होता है कि नहीं, वे हमारे लोग नहीं हैं.'

लेकिन एक सवाल ऐसा है जिसके प्रति ये महिलाएं सहज होती हैं और वो है, 'आप इसे क्यों पहनती हैं?'

माहरीन अहमद कहती हैं, "ये पहनना हमें पसंद है, ये आस्था हमारी आस्था और पहचान है. और हमें अधिकार है कि जो हमें पसंद है, वो पहनें."

नुसायबा शरीफ़ ने इसे एक आध्यात्मिक अनुभव बताया, "जब मैं इसे पहनती हूं तो एक आध्यात्मिक सकून का अनुभव करती हूं."

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