मनमोहक कार्निवल की कैसे होती है तैयारी

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वेस्टइंडीज के एंटीगुआ के सेंट जॉन्स शहर की रंग-बिरंगी इमारतों के बीच एक पुराने दुकान में कलाकारों की भीड़ इकट्ठा है.

इनके हाथों में गोंद, कैंची, जाल के कपड़े जैसी चीज़ें हैं और वे पारंपरिक सोका की धुनों पर नृत्य-संगीत उत्सव की तैयारियों में जुटे हैं.

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ये तैयारी है अगस्त के महीने में होने वाले कार्निवाल परेड की. वे विभिन्न वेशभूषा के लिए परिधान तैयार कर चुके हैं, जिसे पहन लोग राजधानी की सड़कों पर निकलेंगे.

हर साल कार्निवाल परेड से पहले सभी खाली दुकानों और बंद पड़े कार्यालयों को कलाकार, डिजाइनर और दर्जियों के लिए साफ किया जाता हैं, जहां वे हस्तनिर्मित परिधान तैयार करते हैं.

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सभी की कोशिश होती है कि परिधान परेड में लोगों का ध्यान आकर्षित हो सके. इसके लिए वे जीतोड़ मेहनत भी करते हैं.

यह साल उनके लिए काफी खास है. कार्निवाल परेड इस साल 60 साल पूरे कर रही है.

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200 साल बीत चुके हैं जब पहली बार एंटीगुआ के लोग आजादी मिलने का जश्न मनाने के लिए सड़कों पर निकले थे.

समय के साथ इसकी भव्यता बढ़ती चली गई. आयोजन का माहौल उत्साहपूर्ण होता चला गया.

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परेड में परिधान आर्कषण का केंद्र होता है. 1957 में पहली बार इसे आधिकारिक तौर पर मनाया गया था.

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Image caption डिजाइनर कॉलविन साउथवेल बताते हैं कि शुरुआत में परिधान काफी लंबे और भारी हुआ करते थे लेकिन अब ये हल्के और पहनने में आरामदायक होने लगे हैं

रियो दे जेनेरियो में होने वाले कार्निवाल परेड का यहां के परेड पर बहुत असर पड़ा है. परिधान उसी अंदाज में डिजाइन किए जाने लगे हैं.

लेकिन अभी भी एंटीगुआ के पारंपरिक परिधानों ने इन सभी के बीच अपनी जगह कायम रखी है. एक परिधान तैयार करने में कई दिनों का वक्त लगता है.

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साउथवेल बताते हैं कि पहले परिधान तैयार करने के लिए चमकीले कागज, कार्डबोर्ड और तारों का इस्तेमाल किया जाता था. लेकिन अब शिफॉन, फीता, रंग-बिरंगी पंखों का उपयोग होने लगा है.

"परिधान डिजाइन करने से लेकर उसे तैयार करने तक में छह महीने का वक्त लग जाता है."

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वह आगे कहते हैं, "सबसे अहम बात यह है कि परिधानों को स्थानीय स्तर पर तैयार किया जाता है. पंखों को छोड़कर किसी भी चीज का आयात नहीं किया जाता है. ये पंख चीन, अमरीका और त्रिनीदाद से मंगवाए जाते हैं."

साउथवेल कहते हैं, "परिधान में हमारी विशिष्टता झलकती है. इसके लिए एंटीगुआ के नेशनल फैब्रिक 'मद्रास' (एक तरह हल्का सूती कपड़ा) का भी इस्तेमाल करते हैं. हमलोगों की कोशिश रहती है कि हमारी कला जिंदा रहे."

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साउथवेल पिछले चार दशक से कार्निवाल में हिस्सा ले रहे हैं.

एक अन्य डिजाइनर जन्ना हेनरी बताती हैं कि परिधान बनाने में 80 फीसदी कारीगरी हाथों की होती है, खासकर पंखों से निर्मित परिधान.

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वह आगे बताती हैं कि परिधानों को नया लुक देने के लिए एक्सेसरीज का भी इस्तेमाल हो रहा है.

फेस्टिवल कमीशन के रोजर पेरी बताते हैं कि परेड का असली रंग कार्निवाल के सामपना के दौरान देखने को मिलती है. यह मंगलवार को देखने को मिलेगा. यह बहुत ही मोहक होता है.

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