एशिया में अमेज़ॉन और अलीबाबा के बीच कड़ी टक्कर

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Image caption रोसानिता अली ई-कॉमर्स कंपनी के लिए बतौर फ्रीलांसर काम करती हैं

जानी-मानी तकनीकी कंपनी अमेज़ॉन ने प्राइम लॉन्च करके सिंगापुर में तत्काल डिलीवरी सर्विस शुरू कर दी है और अपनी प्रतिस्पर्धी अलीबाबा को कड़ी टक्कर दे रही है.

इन दोनों कंपनियों की टक्कर की वजह से एशिया में ई-कॉमर्स कंपनियों का बाज़ार गर्म हो रहा है. क्या इससे छोटी कंपनियां डूब जाएंगी?

49 साल की रोसानिता अली बीते 10 सालों से कोई काम नहीं किया, लेकिन हाल ही में उन्होंने काम करना शुरू किया है.

अब वह सिंगापुर की एक क्षेत्रीय ई-कॉमर्स फर्म 'ऑनेस्टबी' के लिए बतौर फ्रीलांसर काम करती हैं.

रोसानिता उन दुकानदारों को फ्रेश खाना और सब्ज़ियां सप्लाई करने में अपना वक़्त बिताती हैं, जो 'ऑनेस्टबी' ऐप के ज़रिए उन्हें ऑर्डर भेजते हैं.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने बताया, ''यहां मुझे आज़ादी है, मैं जब चाहूं तभी काम करूं और इससे मुझे आमदनी भी होती है.''

विकास दर

रोसानिता बताती हैं कि इस काम से वह हर सप्ताह, रोजाना दो घंटे काम करके 100 डॉलर (करीब 6300 रुपये) कमा लेती हैं. लेकिन अगर वह चाहें तो और पैसा कमा सकती हैं, क्योंकि उनके पास ऑर्डर की कमी नहीं है.

'ऑनेस्टबी' के संस्थापक और चीफ एक्जीक्युटिव जोएल सेंग ने अपने सिंगापुर ऑफिस में बीबीसी से बातचीत के दौरान कहा, ''प्रोडक्ट के नज़रिये से देखें तो ग्राहक ज़्यादा प्रभावी अनुभव चाहते हैं.''

उन्होंने दो साल पहले सिंगापुर में यह बिजनेस शुरू किया था और अब यह एशियाई क्षेत्र के आठ बाज़ारों में फैल चुका है.

सेंग कहते हैं, अगर मुझे पैसा कमाना होता तो कंपनी बड़े मुनाफ़े में होती लेकिन इसके बजाय मैंने इसे बढ़ाने पर ज़्यादा ध्यान दिया.

कंपनी की विकास दर से वह काफ़ी खुश हैं. उन्होंने बताया कि दक्षिण पूर्व एशिया में महज़ दो फीसदी लोग ही ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं, इनमें से भी ज़्यादातर युवा हैं.

उन्होंने कहा, ''इसका एक मात्र रास्ता ये है कि ये आंकड़ा ऊपर जाएगा.'' विकास दर को लेकर सेंग की ये उम्मीदें वास्तविकता से परे नहीं हैं.

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बिज़नेस विस्तार

गूगल और सिंगापुर के सॉवेरेन वेल्थ फंड टेमासेक के आंकड़े बताते हैं कि एशियाई बाज़ार में ई-कॉमर्स सेक्टर में जबरदस्त उछाल देखने को मिल सकता है. यह आंकड़ा 2015 में 55 बिलियन डॉलर (करीब 3502 अरब रुपये) था जो 2025 तक बढ़कर 88 बिलियन डॉलर (5603 अरब रुपये) तक होने की उम्मीद है.

ई-कॉमर्स स्पेस में हुई इस हलचल की वजह से अमरीकी ऑनलाइन रीटेल कंपनी अमेज़ॉन ने बीते महीने प्राइम नाउ सर्विस सिंगापुर में लॉन्च की.

कंपनी ने सिंगापुर में 100,000 स्क्वायर फीट में अपना सेटअप लगाया है, जोकि किसी भी शहरी सेंटर के तौर पर कंपनी का सबसे बड़ा मालगोदाम है.

कंपनी यहां दो घंटे के अंदर अंडे से लेकर बच्चों के स्ट्रॉलर्स तक डिलीवर करती है.

अमेज़ॉन प्राइम के सिंगापुर ऑपरेशन के डायरेक्टर हेनरी लो ने कहा, ''सिंगापुर किसी भी बिजनेस को लॉन्च करने के लिए बेहतरीन जगह है.''

उन्होंने कहा, ''सिंगापुर के ग्राहक व्यस्त हैं. उन्हें सहूलियत चाहिए और उत्पादों की लंबी लिस्ट देखकर उन्हें काफी अच्छा लगता है. ये हमारे लक्ष्य की पूर्ति के लिए सही है.''

लेकिन सिंगापुर उतना खास नहीं है. यह 50 लाख लोगों का एक छोटा मार्केट है. बड़ा क्षेत्र जिस पर दांव खेला जाना है वो 60 करोड़ ग्राहकों वाला बाज़ार.

अमेज़ॉन ने फिलहाल अपने प्लान का खुलासा नहीं किया है लेकिन सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया में एंट्री के बाद कंपनी के विस्तार के साफ़ संकेत मिल रहे हैं.

लेकिन सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया में जो चीजें काम कर रही हैं, ज़रूरी नहीं कि वो दूसरे एशियाई बाज़ार में भी काम करें. खासकर दक्षिण पूर्व एशिया में.

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समस्या

तकनीकी जानकार और रिसर्च कंसल्टेंसी फ्रॉस्ट एंड सलिवान के अजय सुंदर ने कहा, ''जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर की हम बात कर रहे हैं वो कुछ देशों में काम करना काफ़ी चुनौती पूर्ण होगा. जैसे इंडोनेशिया और थाईलैंड.''

उन्होंने कहा, ''इसके अलावा एक अन्य समस्या जो उभर रही है वह पेमेंट की है. उभरते बाजारों में कैश ऑन डिलीवरी एक बड़ी समस्या है.''

जबकि सिंगापुर जैसे देशों में ई-कॉमर्स पेमेंट सिस्टम काफी बेहतर हैं और ग्राहक इसका इस्तेमाल करने में सहज हैं लेकिन दूसरे देशों में ऐसा नहीं है.

इसका मतलब है कि कंपनियों को कैश ऑन डिलीवरी के लिए एजेंट्स पर निर्भर होना पड़ेगा, जो कि अच्छा सिस्टम नहीं है और इसके ज़रिए फ्रॉड का ख़तरा भी है.

यह स्पेस बहुत ही प्रतिस्पर्धा वाला बन चुका है. चीन की कंपनी अलीबाबा ने इसस क्षेत्र में अपना वर्चस्व कायम किया है. इसके लिए कंपनी ने लाज़ाडा (LAZADA) का अधिग्रहण किया है, जो सिंगापुर के रेडमार्ट का स्वामित्व रखती है.

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अलीबाबा

अलीबाबा ने पहले ही इस क्षेत्र में संचालन और माल-गोदाम को बेहतर बनाने के लिए काफी पैसा खर्च किया है. साथ ही मलेशिया में दुनिया के पहले डिजिटल-फ्री ट्रेन ज़ोन बनाने को स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाई है.

अलीबाबा के मालिक जैक मा को बीते साल मलेशिया का डिजिटल अर्थव्यवस्था सलाहकार नियुक्त किया गया था. इसका उद्देश्य देश में ई-कॉमर्स को विकसित करना था.

इस क्षेत्र में दर्जनों छोटी कंपनियां काम कर रही हैं लेकिन अजय सुंदर मानते हैं कि आने वाले समय में वह छोटी कंपनियों को बाजार में नहीं देखते.

उन्होंने कहा, ''ई-कॉमर्स पारंपरिक तौर पर आखिरी विकल्प रहा है. लेकिन लगातार बढ़ रही प्रतिस्पर्धा से इसमें उछाल आया है और अगले साल तक हमें इसमें सुधार की उम्मीद है जिसमें बड़ी या क्षेत्रीय कंपनियां छोटी कंपनियों का अधिग्रहण करेंगी.''

लेकिन ये दौड़ फिलहाल अभी रोसानिता या उनके जैसे अन्य लोगों को बिल्कुल भी चिंता में नहीं डालती.

वह ताजे फल और सब्जियां लेकर एक ड्राइवर को सौंपती हैं जो घर-घर जाकर ग्राहकों को सामान डिलीवर करता है. ईकॉमर्स इंडस्ट्री में बढ़ रही प्रतिस्पर्धा का फ़ायदा ग्राहकों को मिल रहा है क्योंकि कीमतें कम हो रही हैं.

इससे एक चीज़ स्पष्ट होती है कि असली विजेता ग्राहक ही है.

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