1962 युद्ध के 55 साल बाद भी सबक नहीं सीखा भारत: चीनी मीडिया

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सीमा पर दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय मीडिया खासकर चीन ने भारत के पक्ष पर सवाल उठाए हैं.

चीनी मीडिया ने भारत में अंग्रेजी अख़बार द टाइम्स ऑफ इंडिया में ''डोकलाम विवाद: नाराज़गी के बावजूद चीन नहीं चाहता युद्ध, भारत आश्वस्त'' हेडलाइन से छपे लेख का हवाला दिया है.

लेख में कहा गया है, ''भारतीय सुरक्षा संस्थान इस बात से आश्वस्त हैं कि तमाम उत्तेजक बातों के बावजूद चीन युद्ध का ख़तरा मोल नहीं लेगा यहां तक कि एक छोटे स्तर का सैन्य अभियान भी नहीं.''

इस लेख को लेकर चीनी अख़बार ग्लोबल टाइम्स की वेबसाइट ने ''चीन युद्ध नहीं छेड़ेगा ये तय है, क्या भारत अभी भी मंत्रोच्चार कर रहा है?'' शीर्षक से लेख प्रकाशित किया है.

लेख में आगे लिखा है, ''हम हैरान हैं कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां ऐसा सोचती हैं और मीडिया में दावा भी कर रही हैं कि चीन कोई सैन्य अभियान नहीं छेड़ेगा. दिल्ली सबसे ख़राब हालात के लिए तैयार नहीं है लेकिन भारतीयों को सबसे अच्छे के लिए तैयार करने में जुटा है.''

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''भूल गया भारत? ''

लेख में सवाल उठाया गया, ''क्या भारत की सरकार एक चर्च है? क्या वे भारत की जनता को एक साथ मंत्र पढ़ने के लिए आगे जा रहे हैं? 55 साल बाद (1962 युद्ध के) भी भारत अभी बहुत भोला है. आधी शताब्दी बीतने के बावजूद ये लोग सबक नहीं सीखे.''

चीन के सरकारी अख़बार ने आगे लिखा, ''भारतीयों को लगता है कि लड़ाई में अमेरिका उनकी मदद करेगा और चीन पर मनोवैज्ञानिक दबाव डालेगा. हालांकि नई दिल्ली को सिनो-यूएस ग्रेट पावर गेम के बारे में कुछ नहीं पता. भारतीय शायद चीन के ख़िलाफ़ युद्ध के दौरान हिमालय में स्पाइडर मैन, बैटमैन और यहां तक कि कैप्टन अमेरिका से मदद की उम्मीद पाले बैठे हैं.''

पाकिस्तानी मीडिया का दावा

चीन ने पाकिस्तानी अख़बार द न्यूज़ इंटरनेशनल की उस ख़बर को भी बड़ी कवरेज दी है जिसमें दावा किया गया है कि भारत ने आख़िरकार चीन के आगे सरेंडर कर दिया है और 6 अगस्त को डोकलाम से सेना हटा ली है.

अख़बार ने दावा किया कि भारत ने अपने ज़्यादातर सैनिक डोकलाम से हटा लिए हैं और सीमा पर सिर्फ़ 50 सैनिक रखे हैं.

इसके पहले चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बयान दिया था कि दो अगस्त तक डोकलाम में भारतीय सैनिकों की संख्या 400 से घटकर 48 हो गई थी. हालांकि भारतीय अधिकारियों ने इसका खंडन किया है.

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क्या कहते हैं चीन के नागरिक?

बीजेपी नेताओं की ओर से चीनी सामान के बहिष्कार की अपील का चीन में खूब मज़ाक उड़ाया जा रहा है. चीनी मीडिया ने भी इस मुद्दे को तवज्जो दी है.

इस संबंध में द डेक्कन हेराल्ड ने 7 अगस्त को एक ख़बर प्रकाशित की थी जिसमें कर्नाटक बीजेपी के नेताओं ने चीन में बने सामान का बहिष्कार करने की अपील थी.

द ग्लोबल टाइम्स ने इस मसले पर लिखा, ''चिढ़: भारतीय मीडिया: भारतीय जनता पार्टी ने चीनी उत्पादों के बहिष्कार का ऐलान किया है, कहा है कि चीन को सबक सिखाएगी.''

ग्लोबल टाइम्स की वेबसाइट ग्लोबल नेट ने लिखा, ''कुछ भारतीय मीडिया संस्थान अब भी उन भारतीय सैनिकों के लिए ''झंडे लहराने और युद्ध के नारे लगाने'' से बाज़ नहीं आ रहे जो गैरक़ानूनी तरीके से सीमा पार कर गए और भड़काऊ बयान दे रहे हैं.''

इस ख़बर के साथ सिना न्यूज़ पोर्टल पर सोशल मीडिया यूजर्स के नेगेटिव कमेंट भी दिए गए हैं.

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शान्डोंग प्रांत से एक यूजर ने लिखा, ''सभी लोग अपने आस-पास ये देखें कि चीम में कुछ भारतीय सामान इस्तेमाल हो रहा है. इसमें थोड़ी मेहनत लगेगी.''

सिचुआन प्रांत के डेझो से एक यूजर ने लिखा, ''चीन में बना सामान नहीं खरीदेंगे? तब आपके पास और कुछ ख़रीदने का विकल्प है क्या?''

शांक्शी प्रांत से एक और यूजर ने लिखा, ''भारत और अन्य पड़ोसी मुल्कों के व्यापारी चीनी सामान खरीदते हैं क्योंकि यहां का सामान सस्ता और अच्छी क्वालिटी है. आप अपना रास्ता ख़ुद काट रहे हैं.''

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