भारत-चीन में युद्ध की उल्टी गिनती शुरू: चीनी मीडिया

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Image caption 1962 में भारत और चीन के बीच युद्ध के बाद की एक तस्वीर

क़रीब दो महीने से डोकलाम सीमा पर भारत और चीन के बीच गतिरोध जारी है. दोनों देशों की तरफ़ से इस तनाव को ख़त्म करने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं.

इस बीच चीन के सरकारी अख़बार ग्लबोल टाइस्म ने चीनी रक्षा मंत्रालय के अनाम सूत्र का हवाला देते हुए बुधवार को समाचार एजेंसी रॉयटर्स की उस रिपोर्ट को ख़ारिज कर दिया है जिसमें उसने बताया था कि दोनों देशों के बीच गोपनीय बातचीत नाकाम हो गई है.

रॉयटर्स ने कहा था कि चीन ने भारत के सामने बिना किसी शर्त के डोकलाम से सैनिकों को वापस के लिए कहा था.

ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि यह पूरी तरह से फ़र्ज़ी ख़बर है और यह ऐसी अफ़वाह है जिसकी कोई ज़मीन नहीं है. ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि यह पूरी तरह से अतार्किक है. इस अख़बार चीनी रक्षा मंत्रालय के अधिकारी के हवाले से यह बात कही है.

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ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि संभव है कि भारत इस मामले में प्रचार कर रहा हो कि वह राजनयिक संवाद जारी रखना चाहता है. ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि भारत ऐसा अपनी छवि बनाने के इरादे से कर सकता है ताकि उसे इसका फ़ायदा मिले.

इस चीनी अख़बार ने लिखा है कि आज की तारीख़ में भारत चीन का रणनीतिक प्रतिद्ंवद्वी होने के लिए अयोग्य है.

गतिरोध कैसे ख़त्म होगा?

इसके साथ ही 9 अगस्त को चीनी विदेश मंत्रालय ने कई चीनी मीडिया घरानों से कहा कि 53 भारतीय सुरक्षाकर्मी और एक बुल्डोज़र अब भी अवैध रूप से चीनी इलाक़े में हैं. इस बीच दालाई लामा ने बुधवार को कहा कि भारत और चीन के बीत गतिरोध केवल बातचीत के ज़रिए ही ख़त्म किया जा सकता है.

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चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने डोकलाम जारी गतिरोध के लिए भारत को चेताया है. शिन्हुआ ने लिखा है कि भारत मुसीबत को मज़ाक में ना ले. शिन्हुआ ने लिखा है, ''भारत को न तो चीन को कमतर आंकना चाहिए और न ही ये समझना चाहिए कि वह अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा में सक्षम नहीं है.''

'सब्र की सीमा होती है'

शिन्हुआ ने लिखा है, ''अगर चीन और भूटान के बीच सीमा को लेकर कोई विवाद है तो यह चीन और भूटान के बीच का मुद्दा है. इसमें भारत की कोई जगह नहीं है. अगर भारत यह सोच रहा है कि चीन एक आक्रमणकारी बल से बात करेगा तो यह उसका भ्रम है. अभी तक इस मामले में चीनी बलों ने पर्याप्त सब्र का परिचय दिया है. लेकिन सब्र की भी एक सीमा होती है. हर दिन सब्र की सीमा कम पड़ रही है.''

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शिन्हुआ ने लिखा है, ''चीन को भारत कमतर नहीं आंके. अंततः चीन अपनी सुरक्षा और हितों के लिए के कुछ भी करेगा. भारत को सभी तरह के भ्रमों से बाहर निकल जाना चाहिए. भारत ऐसा करके ही विनाशकारी परिणामों से बच सकता है.

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बीजिंग चाइना डेली ने दोनों देशों के बीच जारी गतिरोध पर लिखा है, ''सरहद पर तनाव सातवें हफ़्ते में पहुंच गया है. अब शांतिपूर्ण समाधान के दरवाज़े बंद होते हैं. दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. दोनों पक्षों के लिए युद्ध कोई विकल्प नहीं है. यहां तक कि इतनी देर होने के बावजूद युद्ध से बचा जा सकता है.''

चाइना डेली ने लिखा है, ''चीनी में एक कहावत है कि मुसीबत को दबाने से अच्छा है उसे ख़त्म कर दिया जाए. युद्ध की बिन्दु पर घड़ी की सुई पहुंचने तक भारत अपने सैनिकों को वापस बुला ले. भारत अपनी ज़िद पर रहा तो वह ख़ुद को ही कोसने की स्थिति में रहेगा. ज़ाहिर है इसके जो नतीजे होंगे उससे उसे पछतावा ही हाथ लगना है.''

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