अमरीका की धमकी पर चीन ने दी चेतावनी

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अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपने देश के शीर्ष व्यापार अधिकारियों से बौद्धिक संपत्ति के बारे में चीन के व्यवहार की समीक्षा करने को कहा है.

ट्रंप के इस क़दम से चीन पर अमरीका की ओर से कुछ व्यापारिक प्रतिबंध लगाए जाने की संभावनाएं भी बन रही हैं.

राष्ट्रपति ट्रंप अपनी 'सबसे पहले अमरीका' नीति के तहत उत्तर कोरिया के साथ संबंधों को लेकर चीन के साथ काम करने में संतुलन ला रहे हैं.

चीन के एक दैनिक अख़बार ने पहले कहा था कि ट्रंप का ये कदम दोनों देशों के रिश्तों में ज़हर घोल सकता है.

वॉशिंगटन लौटे राष्ट्रपति ट्रंप ने उस आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं जो अमरीकी व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट लाइटहीज़र को धारा 301 के तहत इस बारे में पता लगाने की छूट देता है.

अगर ऐसी जांच शुरू होती है और चीन के ख़िलाफ़ रिपोर्ट आती है तो ट्रंप एकतरफ़ा सीमा शुल्क, मंज़ूरी या अन्य व्यापारिक प्रतिबंध लगा सकते हैं ताकि अमरीकी इंडस्ट्री को बचाया जा सके.

शुरुआती समीक्षा में कई महीनों का वक़्त लगने की उम्मीद है.

चीन की चेतावनी

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उधर, चीन ने चेतावनी दी है कि अगर अमरीका दोनों देशों के बीच कारोबारी संबंधों के ख़िलाफ़ कदम उठाता है तो वो अपने हितों की रक्षा करेगा. चीन का ये बयान अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के उस फ़ैसले के बाद आया है जिसमें उन्होंने चीन के ख़िलाफ़ एक संभावित जांच का आदेश दिया है.

ऐसे आरोप हैं कि चीन में काम कर रही अमरीकी कंपनियों को तकनीकी जानकारी शेयर करने के लिए बाध्य किया जाता है.

अमरीका का ऐसा मानना है कि चीन की इस नीति से अमरीकी कारोबार को नुकसान पहुंचता है और नौकरियों पर असर होता है.

चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि अमरीका के इस क़दम से वो चिंतित है और अमरीका का किसी भी तरह का संरक्षणवाद द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित कर सकता है.

क्यों चिंतित हैं ट्रंप?

डोनल्ड ट्रंप चीन की वजह से अमरीका के व्यापार में पड़ रहे असर का लंबे समय से विरोध करते आ रहे हैं.

बीते साल दोनों देशों के बीच क़रीब 648 बिलियन डॉलर (500 बिलियन पाउंड) का कारोबार हुआ जिसका ज़्यादा फ़ायदा चीन को मिला और अमरीका को क़रीब 310 बिलियन डॉलर का घाटा झेलना पड़ा.

घाटे की एक वजह जिस पर बहस चल रही है वह ये है कि चीनी कंपनियां अमरीका के उत्पादों और नए आइडिया कॉपी कर रही हैं और वही उत्पाद सस्ते दामों में वापस अमरीका को बेच रही हैं.

इस वजह से न सिर्फ़ अमरीका का अपने ही देश में घाटा हो रहा है बल्कि चीन को होने वाला निर्यात भी घट रहा है.

नकली उत्पाद और ऑनलाइन प्राइवेसी भी ट्रंप प्रशासन के लिए चिंता का विषय है.

अमरीकी कंपनियां उन नियमों की वजह से नाराज़ हैं जिनके तहत उन्हें चीनी बाज़ार में प्रवेश से पहले स्थानीय कंपनी के साथ पार्टनरशिप करनी पड़ती है. इसकी वजह से उनके आइडिया चोरी होते हैं.

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बौद्धिक संपदा पर अतिक्रमण का असर

अमरीका की बौद्धिक संपत्ति की चोरी को लेकर संबंधित आयोग के मुताबिक़, 'नकली सामान, नकली सॉफ्टवेयर और व्यापार की रणनीति चोरी होने की वजह से अमरीका की अर्थवस्था पर 225 बिलियन डॉलर से 600 बिलियन डॉलर तक का नुकसान होने के आसार हैं.'

आयोग के मुताबिक़, 'चीन बौद्धिक संपत्ति के नियम तोड़ने में अव्वल है और 87 फ़ीसदी नकली सामान अमरीका में बेचा जा रहा है.'

यूरोपियन यूनियन, जापान, जर्मनी और कनाडा ने भी बौद्धिक संपत्ति चोरी के मामले में चीन के व्यवहार पर चिंता जताई है.

अमरीका का हाल

डोनल्ड ट्रंप ने अपने आदेश को बड़ा क़दम बताया है. हालांकि उन्होंने यह कहा कि ये सिर्फ़ शुरुआत है.

वहीं, शीर्ष डेमोक्रेट सीन चक शूमर ने ट्रंप के इस आदेश को हवा-हवाई क़रार दिया. अमरीका इस साल की शुरुआत में पहले ही बौद्धिक संपत्ति की चोरी के मामले में चीन की भूमिका की समीक्षा कर चुका है.

शूमर ने कहा, ''यह घोषणा करना कि हम चीन के पूरी तरह प्लान किए गए बौद्धिक चोरी के मामले की जांच कराएंगे, उन्हें इस बात की खुली छूट देना है कि जो कर रहे हो वह करते रहो.''

यूरेशिया ग्रुप के विशेषज्ञों का मानना है कि अमरीकी प्रशासन ने उत्तर कोरिया से संबंधों को लेकर चीन के सहयोग को महत्व देने का फ़ैसला लिया है.

विशेषज्ञों ने लिखा, ''व्हाइट हाउस को लगता है कि व्यापारिक मामले में चीन के ख़िलाफ कड़ा एक्शन लेने से उत्तर कोरिया को लेकर उनकी नीति में चीन के सहयोग पर असर पड़ सकता है.''

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अंतरराष्ट्रीय व्यापार

कुछ आलोचकों का मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप के इस क़दम से अंतरराष्ट्रीय व्यापार के सिस्टम को ख़तरा है.

एशियन ट्रेड सेंटर के डेबोरा एल्म्स का कहना है कि बौद्धिक संपदा की चोरी और कॉपी राइट के मामले गंभीर समस्या हैं, लेकिन अमरीका की ओर से कड़े क़दम उठाए जाने पर चीन भी उस पर एक्शन ले सकता है.

अब तक अमरीका सैकड़ों बार ऐसी तहक़ीक़ात कर चुका है, लेकिन एक्शन के नाम पर ज़्यादा कुछ देखने को नहीं मिला.

क्या कहता है चीन?

चीन की आधिकारिक मीडिया ने अमरीका के इस फ़ैसले की निंदा की है. शिन्हुआ की एक न्यूज़ एजेंसी ने ट्रंप के इस क़दम को ''बेकार'' बताया और कहा कि इससे दोनों देशों को नुकसान होगा.

चीन के सरकारी अख़बार ने एक संपादकीय में ट्रंप प्रशासन को दूसरे रास्ते तलाशने की सलाह दी है. संपादकीय के मुताबिक़, ''व्यापार का राजनीतिकरण करने से देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा, इसके अलावा चीन-अमेरिका के आपसी रिश्तों में भी कड़वाहट आएगी.''

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