भारत में सेना की नाकाम घुसपैठ वाली ख़बर से चीन में उबाल

संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास 'हैंड इन हैंड 2016' के दौरान एक साथ अभ्यास करते भारत और चीन के सैनिक इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास 'हैंड इन हैंड 2016' के दौरान एक साथ अभ्यास करते भारत और चीन के सैनिक

15 अगस्त के दिन भारत के लद्दाख क्षेत्र में चीनी सेना के घुसपैठ को नाकाम करने की ख़बर को चीन की ऑनलाइन मीडिया ने हाथों हाथ लिया है. यह ख़बर चीन की अंग्रेजी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने छापी है.

भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों देशों की सेनाओं ने लद्दाख में पत्थरबाज़ी की. यह क्षेत्र भारत के नियंत्रण वाले कश्मीर में पड़ता है.

ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अंत में भारतीय सेना से बिना किसी शर्त पीछे हटाने की चीन की मांग को दुहराने के साथ ही बीजिंग की चेतावनी भी दुहराई गई है कि "चीन अपनी जायज अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए हर संभव उपाय करेगा."

गौरतलब है कि जून के महीने से भारत और चीन की सेना भूटान की सीमा से सटे एक विवादित इलाक़े डोकलाम में आमने सामने डटी हैं.

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Image caption विवादित सीमा पर भारत और चीन के बीच फ़िर बढ़ा तनाव

ऑनलाइन यूजर्स ने किया भारत पर हमला

कई चीनी ऑनलाइन यूजर्स ने लद्दाख की सीमा पर हुए इस ताज़ा झड़प की रिपोर्ट पर तीख़ी प्रतिक्रिया दी है. ग्लोबल टाइम्स की लेख पर ख़बर लिखे जाने तक 13,000 से अधिक प्रतिक्रियाएं दी गईं, जिसमें अधिकतर लोगों ने लड़ाकू रुख़ अख़्तियार किया.

लान्ज़ो सिटी से एक यूजर ने लिखा, "इतना लंबा टकराव. दोनों पक्षों के बीच इस तरह लंबे समय तक न युद्ध, न शांति का माहौल दीर्घकालिक समाधान नहीं है. इस विकट स्थिति को सुलझाया जाना ज़रूरी है. जापान और अमेरिका को चेतावनी देने के लिए इस चिकन (भारत) को मार डालो."

बीजिंग से एक यूजर 'कैच अप विद द सन' ने लिखा, "भारत पर हमले के लिए हमें किसी भ्रम की स्थिति में नहीं रहना चाहिए. वो ईमानदारी से इसे वापस नहीं लेगा."

हालांकि, कुछ इंटरनेट यूजर्स ने चीन को भारत के साथ युद्ध की स्थिति से बचने की सलाह भी दी है.

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Image caption 1962 में भारत और चीन के बीच युद्ध के बाद की एक तस्वीर

चीन के हित में नहीं है युद्ध

चोंगक्विंग से एक यूजर ने लिखा, "भारत से दुश्मनी, और भारत से लड़ने की क्षणिक संतुष्टि, चीन के रणनीतिक हित में नहीं है"

हुबेई प्रांत के वुहान सिटी से एक यूजर ने लिखा, "अगर हम आज भारतीय कुत्तों (आक्रमणकारियों) से नहीं लड़ते हैं, तो कल वियतनामी कुत्ते भारत से सीखेंगे."

गुआंग्डोंग प्रांत के झांनजियांग से एक इंटरनेट यूजर ने लिखा, "डोंगलैंड (डोकलाम) क्षेत्र में लड़ाई चीन के लिए हानिकारक होगा. यह ऊंचाई पर है जबकि हम नीचे हैं यहां. हम पर हमले की स्थिति में बेहद नुकसान होगा. अगर हम लड़ने जा रहे हैं तो पूरी सीमा पर जवाबी हमले के लिए तैयार रहना चाहिए."

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Image caption भारत-चीन सीमा पर तैनात एक भारतीय जवान

भारतीय मीडिया अफ़वाहें उड़ा रहा

लिशन सिटी से एक यूजर ने लिखा, "आप में किसी को यह नहीं दिख रहा कि समस्या भारतीय ए-सैन (यह शब्द भारतीयों के अपमान के लिए चीन में उपयोग किया जाता है) नहीं बल्कि कोरियाई प्रायद्वीप है. अगर हम ए-सैन के ख़िलाफ़ बढ़ते हैं तो उत्तरी कोरिया भी तुरंत लड़ाई करना चाहेगा, और अमरीका, जापान और दक्षिण कोरिया भारत के साथ हो जाएगा. जब तक हम युद्ध शुरू नहीं करते, इनके पास दूसरा रास्ता नहीं होगा."

कुछ चीनी इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को लद्दाख में पत्थरबाजी की भारतीय मीडियाई रिपोर्ट्स पर हैरानी है. बीजिंग से एक यूजर ने कहा, "क्या भारतीय मीडिया अफवाहें उड़ा रहा है? क्या सशस्त्र सेना ने पत्थरों का इस्तेमाल किया होगा?"

इस बीच, ताइवान की चीन टाइम्स की एक रिपोर्ट में हांगकांग के साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट और भारतीय टीवी न्यूज़ चैनल एनडीटीवी की वेबसाइट का हवाला दिया गया. चीन टाइम्स ने कहा कि न तो भारतीय सेना और न ही चीनी अधिकारियों ने इस ख़बर पर टिप्पणी की है. केवल भारत प्रशासित कश्मीर की पुलिस ने ही इसके विषय में बात की है.

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Image caption संयुक्त आतंक निरोधी ड्रिल के दौरान साथ बैठे भारत और चीन के सैनिक

पहले पन्ने पर पाकिस्तान को प्रमुखता

लद्दाख की इस ख़बर को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म रेफरेंस न्यूज़ (चीनी भाषा में इसे कांकाकोसियाकोसि कहा जाता है) ने अपने पहले पन्ने पर नहीं रखा. हालांकि उसके पहले पन्ने पर चीन के उप प्रधानमंत्री वांग यांग की पाकिस्तान यात्रा को प्रमुखता दी गई है. इसके पहले पन्ने पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति मनमून हुसैन की वो टिप्पणी भी रखी गई है जिसमें चीनी क्षेत्र में भारतीय आक्रमण के मुद्दे पर इस्लामाबाद ने चीन का समर्थन किया है.

रेफरेंस न्यूज़ ने सिंगापुर की वेबसाइट लियाना शांपां का हवाला देते हुए लिखा कि जून में भारत के साथ डोकलाम विवाद शुरू होने के बाद से दक्षिण एशियाई दौरे पर जाने वाले वांग पहले चीनी अधिकारी हैं.

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Image caption 2016 में संयुक्त आतंक निरोधी ड्रिल में शामिल हुए थे भारत और चीन के सैनिक

भारतीय मीडिया में क्या थी ख़बर?

भारतीय मीडिया ने लद्दाख में इस नए स्टैंड ऑफ़ की ख़बर को प्रमुखता से छापा. कई अख़बारों ने इसकी कवरेज़ दी. हालांकि, आज का संपादकीय भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण पर आधारित है.

एनडीटीवी की वेबसाइट के अनुसार भारतीय सेना ने लद्दाख में घुसपैठ की कोशिशें नाकाम की तो हिंदी अख़बार दैनिक जागरण ने लिखा भारत ने लद्दाख से चीनी सेना को खदेड़ा.

अंग्रेजी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक चीनी सेना की अधिकारियों ने भारतीय अधिकारियों के साथ फ़्लैग मीटिंग की मांग की है. साथ ही उसने यह भी लिखा है कि बीजिंग ने कहा है कि वो मुद्दे से अनजान है.

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