बार्सिलोना: नर्स ने देखा वो ख़ौफ़नाक मंज़र

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बार्सिलोना में एक अस्पताल के इमरजेंसी एरिया में बतौर नर्स काम करने वाले अल्बर्ट टॉर्ट को मालूम है कि जिन लोगों के मरने का ख़तरा होता है, उन्हें अटेंड करना कितना मुश्किल है.

लेकिन गुरुवार दोपहर रमब्लास में उन्होंने जो देखा वह बेहद ख़तरनाक था.

एक वैन के ज़रिए किए गए हमले में घायल लोगों की मदद करने के लिए वह मौके पर गए हुए थे.

हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई और 100 से ज़्यादा घायल हो गए. प्रशासन ने इसे आतंकी हमला बताया है. कथित इस्लामिक स्टेट ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली है.

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क़रीब 300 मीटर के दायरे में टॉर्ट ने देखा कि दर्जनों लोग घायल पड़े हैं और कई लोग पहले ही मर चुके हैं. ये देखकर वह कांप उठे.

बीबीसी मुंडो से बातचीत में उन्होंने कहा, ''मैं तब पहुंचा जब इलाके की घेराबंदी कर दी गई थी. मैंने एक पुलिसकर्मी को बताया कि मैं नर्स हूं और उन्होंने मुझे अंदर जाने दिया.''

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वह क़रीब 50 मीटर तक आगे बढ़े जहां उन्होंने ज़मीन पर पड़े एक शख्स को देखा. उन्होंने बताया, ''ऐसा लग रहा था कि उसे दौरे आ रहे थे.''

उस शख्स की हालत से पता चल रहा था कि उनको तुरंत डीफिब्रिलैटर लगाने की ज़रूरत है, जो वहां मौजूद फायर ब्रिगेड के लोगों के पास मिल सकता था.

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टॉर्ट ने दुखी मन से कहा, ''हम क़रीब 30 मिनट तक इटली के उस शख्स को ठीक करने की कोशिश करते रहे. उनकी उम्र 41 साल थी और उनकी मौत हो गई.''

हर तरफ लाशें

अपने अनुभव की वजह से कॉलेज ऑफ़ नर्सेज और नर्सेज ऑफ़ बार्सिलोना के अध्यक्ष पद तक पहुंचे अल्बर्ट टॉर्ट ने रमब्लास में राहत कार्य जारी रखा.

इटली वाले शख्स की मौत की घटना से वह बाहर निकले पाते उसके पहले ही उन्होंने रास्ते में जो देखा वह बेहद निराशाजनक था.

उन्होंने कहा, ''जैसे-जैसे मैं आगे बढ़ा, मैंने देखा कि वहां लोगों के शरीर ढंक दिए गए थे. क्योंकि हेल्थ सर्विस कुछ कर पाती उससे पहले ही उन लोगों की जान जा चुकी थी.''

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आपातकालीन सेवाओं के सहयोग के बावजूद वहां कुछ मीटर के दायरे में काफी लोग गंभीर रूप से घायल हालत में पड़े थे.

टॉर्ट ने कहा, ''उस लड़के के साथ, जिसे बचाने की हम कोशिश कर रहे थे, वहां और भी कई शरीर पड़े थे लेकिन उनके साथ हम कुछ कर नहीं सके.''

जिस जगह पर वैन ने हमला शुरू किया था, वहां घायलों और मरने वालों की संख्या ज़्यादा थी.

उन्होंने कहा, ''हमने वो सब किया जो कर सकते थे लेकिन यह बेहद भावुक कर देने वाली स्थिति थी और इसे भूलना मुश्किल है क्योंकि स्थिति बहुत खौफ़नाक थी.''

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टॉर्ट कहते हैं, ''मैं अस्पताल में जो देखता हूं यह उससे कहीं ज़्यादा मुश्किल था मेरे लिए.''

उन्होंने कहा, ''जब आप मदद के लिए जाते हैं तो सारी ताकत लगा देते हैं. कई ऐसे मौके रहे हैं जब आप खुद भावुक होने लगते हैं और वहां रह पाना मुश्किल होने लगता है.''

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