ब्लॉग: इस हिसाब से तो हर शादी 'लव जिहाद' है

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केरल के शफ़ीक जहां और हादिया उर्फ़ अखिला की शादी कहीं लव जिहाद तो नहीं? हो सकता है कि हो. मुझे इंतज़ार है किसी ऐसी शादी का जहां पर दुल्हन मुसलमान हो और दूल्हा हिंदू. फिर कोई कहे कि यह भी लव जिहाद है कि एक मुसलमान लड़की ने एक हिंदू लड़के को अपने चंगुल में फंसाकर उसे आतंकवादी बनाने की कोशिश की.

यह तो आप जानते ही हैं कि अरबी के शब्द 'जिहाद' का वही मतलब है जो हिंदी में 'संघर्ष' का है. जिहाद हो या संघर्ष, दोनों के मानने वाले कहते हैं कि ये बुराई पर अच्छाई की जीत की कोशिश है. इस ऐतबार से तो हिंदू-मुस्लिम झगड़े से अलग हर शादी ही लव जिहाद है.

पहले 'लव' शादी करवाता है और फिर मियां-बीवी के बीच 'जिहाद' शुरू हो जाता है. खान-पान, रिश्तेदार, बच्चों का भविष्य, एक-दूसरे पर शक, अक्सर बिना शक ही शक... मानो हर शादी की शुरुआत 'लव' और दि एंड 'जिहाद' पर ही होता है. और फिर जीवन भर अच्छाई या बुराई की जंग चलती रहती है. मगर इस बीच बच्चों की तादाद भी जाने क्यों बढ़ती जाती है.

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लव जिहाद का इतिहास

लव जिहाद का इतिहास आज का थोड़े ही है, इससे तो हर बालक बचपन में ही परिचित हो जाता है. जब दादी या नानी अम्मा कहानी सुनाती हैं कि एक था राजा, उसने सुना कि साथ वाली रियासत की राजकुमारी बहुत ख़बूसूरत है. उसने रिश्ता भेजा, मगर राजकुमारी के बाप ने कमज़ात होने की वजह से रिश्ता स्वीकार नहीं किया. बस फिर क्या था, रिश्ता भेजने वाले राजा ने आव देखा न ताव, पड़ोसी राजा पर आक्रमण कर दिया. राजकुमारी को उठाकर ले गया और फिर ज़बरदस्ती सात फेरे ले लिए.

और फिर हम पढ़ते हैं अकबर बादशाह की कहानी जिसने जोधा बाई से शादी की ताकि अपनी सल्तनत में आतंकवाद की आग भड़क जाए. मगर उस ज़माने के राजपूत सयाने थे जो ख़ून के घूंट पीकर रह गए और ये हिसाब उन्होंने पांच सौ साल बाद उभरने वाले लव जिहाद आंदोलन वालों पर चुकता करने के लिए छोड़ दिया.

बात यह है कि किसी लड़की की ज़बरदस्ती शादी भले सिंध में हो या हिंद में, ज़बरदस्ती की शादी ही कहलाएगी. फिर चाहे वह हिंदू करे या मुसलमान. जब यह बात एक बार तय हो गई तो फिर कानून के हिसाब से निपटिए. इसे सियासत का रोग काहे को बनाते हैं? और मुद्दे ख़त्म हो गए क्या?

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शादी प्यार की हो या मार की, नतीजा एक ही निकलता है- संघर्ष यानी जिहाद. और लव शब्द तो शुरू में ही किसी पतली गली से निकल जाता है. बस ऊपर वाले का नाम और बच्चे बाकी रह जाते हैं. और जो शादीशुदा कहते हैं कि उनके यहां यह सब नहीं होता, वे बड़े कमाल के लोग हैं. एक-दो की तस्वीरें मिल जाएं तो मुझे भी दिखाइएगा, ताकि झूठ का चेहरा मैं भी तो देखूं.

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