अमरीका ने पाकिस्तान पर बढ़ाया दबाव

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अमरीका ने अफ़गानिस्तान में तालिबान को कथित तौर पर समर्थन देने को लेकर पाकिस्तान पर दबाव बढ़ा दिया है.

अमरीकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने कहा कि अगर पाकिस्तान की सरकार 'रुख बदलने' में नाकाम होती है तो उसे अमरीका से मिलने वाले खास फायदों को गंवाना पड़ सकता है.

पाकिस्तान को गैर नैटो सहयोगी के तौर पर विशेष दर्ज़ा हासिल है और उससे मदद के तौर पर लाखों डॉलर हासिल होते हैं.

पाकिस्तान इस बात से इनकार करता रहा है कि वो तालिबान को शरण देता है.

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अफ़गानिस्तान को लेकर अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के नई रणनीति के एलान के एक दिन बाद टिलरसन ने कहा, "अगर वो अपना अंदाज़ बदलने को तैयार नहीं हैं या फिर पाकिस्तान में पनाहगाह हासिल करने वाले तमाम चरमपंथी संगठनों से निपटने के तरीके को नहीं बदलते हैं तो ये मुद्दे बातचीत में शामिल हो सकते हैं."

उन्होंने कहा, "ये कार्रवाई करना पाकिस्तान के हित में है."

टिलरसन ने कहा कि स्थिर पाकिस्तान अमरीका और दूसरे दशों के हित में है.

उन्होंने कहा, "वो एक परमाणु शक्ति हैं और हमें उनके हथियारों की सुरक्षा की फिक्र है."

अमरीकी विदेश मंत्री ने कहा कि तालिबान को ये समझाया जाना चाहिए कि वो अफ़गानिस्तान के संघर्ष में जीत हासिल नहीं कर सकते हैं. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि अमरीका को भी जीत नहीं मिलेगी.

टिलरसन ने कहा कि संघर्ष को ख़त्म करने के लिए बातचीत ही रास्ता है.

रेक्स टिलरसन ने उन तरीकों का भी जिक्र किया जिनके जरिए पाकिस्तान पर दबाव बनाया जा सकता है मसलन सैन्य सहायता रोकने और पाकिस्तान के अहम गैर नैटो सहयोगी के दर्ज़े पर दोबारा विचार हो सकता है.

हालांकि उन्होंने ये चिंता भी जताई कि बहुत ज्यादा दबाव पाकिस्तान को अस्थिर कर सकता है.

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अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार को अफ़गानिस्तान को लेकर नई नीति की जानकारी दी थी. ट्रंप ने कहा था कि अगर जल्दीबाजी में अमरीकी सैनिकों को वापस बुलाया गया तो चरमपंथियों को फायदा होगा.

उन्होंने कहा था कि नई नीति ज्यादा व्यावहारिक और ज़मीनी स्थिति के मुताबिक होगी.

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