अमरीका के निशाने पर वो कंपनियां जो हैं उत्तर कोरिया की खेवनहार

उत्तर कोरिया इमेज कॉपीरइट AFP/Getty Images

उत्तर कोरिया पर व्यापारिक प्रतिबंध लगाने में अमरीका कोई कोर कसर छोड़ता हुआ नहीं दिख रहा है.

यही वजह है कि इस बार अमरीका का मकसद न केवल किम जोंग-उन की सरकार पर सीधे प्रतिबंध लगाना है बल्कि उन कंपनियों पर लगाम कसना भी है जो उत्तर कोरिया को व्यापारिक प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं.

इसी मंगलवार को अमरीका ने उत्तर कोरिया पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की. इसका मकसद उत्तर कोरिया के हथियार कार्यक्रम की सप्लाई लाइन को बंद करना और बाक़ी दुनिया के साथ किसी तरह के कारोबार को रोकना है.

'आग में घी डाल रहे हैं अमरीका-दक्षिण कोरिया'

क्या यह किम जोंग-उन युग की शुरुआत है?

इमेज कॉपीरइट JUNG YEON-JE/AFP/Getty Images

'क्लिंटन लिस्ट'

छह चीनी, एक रूसी, एक उत्तर कोरियाई और सिंगापुर की दो कंपनियां 'क्लिंटन लिस्ट' में रखा गया है. इन कंपनियों पर उत्तर कोरिया को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने का रास्ता मुहैया कराने का संदेह है.

अमरीकी वित्त विभाग का फ़ॉरेन एसेट कंट्रोल ऑफ़िस (विदेशी संपत्ति नियमन कार्यालय) इस कथित 'क्लिंटन लिस्ट' (ओएफ़एसी लिस्ट) को मेनटेन करता है.

इससे अमरीका में इन कंपिनयों की प्रॉपर्टी ज़ब्त की जा सकती है, उनके बैंक खाते सील किए जा सकते हैं और उनके अमरीकी सीमा में दाखिल होने पर रोक लगाई जा सकती है. इसके अलावा अमरीकी प्रतिष्ठानों के साथ उनके व्यापार करने पर भी पाबंदी लगाई जा सकती है.

क्या युद्ध पर ख़त्म होगा अमरीका-दक्षिण कोरिया युद्धाभ्यास?

गुआम में है अमरीका का सबसे ज़्यादा गोला-बारूद

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
परमाणु हमले की धमकियों के बीच जानिए उत्तर कोरिया और अमरीका की दुश्मनी कब शुरू हुई....

क़ानूनी कार्रवाई

इस लिस्ट में चार रूसी नागरिकों, एक चीनी और एक उत्तर कोरियाई व्यक्ति का भी नाम है. सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के उल्लंघन और अमरीकी प्रतिबंधों के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में अमरीकी वित्त विभाग ने बताया कि 10 कंपनियों और छह लोगों की निगरानी की जा रही है.

दूसरी तरफ अमरीकी न्याय विभाग ने मंगलवार को बताया कि उत्तर कोरिया को वित्तीय सहयोग देने वाली इन कंपनियों के ख़िलाफ़ अमरीकी अदालतों में क़ानूनी कार्रवाई शुरू की जा रही है.

क़ानूनी कार्रवाई के जरिए इन कंपनियों के तकरीबन 11 मिलियन डॉलर ज़ब्त किए जा सकते हैं. अमरीकी अधिकारियों के मुताबिक़ न्याय विभाग की कार्रवाई में उत्तर कोरिया से रिश्ते रखने वाली दो कंपनियां निशाने पर हैं.

उ. कोरिया से जंग होगी भयंकर: अमरीकी जनरल

तो क्या चीन की अर्थव्यवस्था डूबने के कगार पर है?

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
छोटे से द्वीप पर हमला क्यों करना चाहता है उत्तर कोरिया?

संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध

उत्तर कोरिया की तरफ़ से जुलाई में दो इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइलों के परीक्षण के बाद संयुक्त राष्ट्र ने नए प्रतिबंधों की मंजूरी दी थी. इसके कुछ हफ्ते बाद ही अमरीका ने ये ताज़ा क़दम उठाया है.

अमरीकी वित्त मंत्री स्टीवन म्नूशिन ने उम्मीद जताई कि नए प्रतिबंधों से उत्तर कोरिया पर दबाव बढ़ेगा और उसे अलग-थलग किया जा सकेगा.

उन्होंने कहा कि इसके बाद अमरीका में न कोई व्यक्ति और न ही कोई कंपनी इस लिस्ट में शामिल लोगों या कंपनियों के साथ किसी तरह का कोई बिज़नेस कर सकेंगे.

उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ चीन का कड़ा कदम

अमरीका की धमकी पर चीन ने दी चेतावनी

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
उ.कोरिया के परमाणु बम बनाने की कहानी

प्रतिबंध के कारण

अमरीका ने इस प्रतिबंध की वजहों के बारे में ख़ास तौर पर बताया है...

  • उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से मदद देना
  • उत्तर कोरिया के ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित किसी भी किस्म का कोई बिज़नेस लिंक
  • उत्तर कोरियाई श्रम के निर्यात में किसी तरह की मदद
  • प्रतिबंधित उत्तर कोरियाई कंपनियों को अमरीकी या अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुंच दिलाना

स्टीवन म्नूशिन ने कहा कि उत्तर कोरिया को हथियार बनाने और क्षेत्र को अस्थिर करने के लिए पैसा बनाने का मौका देने वाली कंपनियां या लोग बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे.

ये ओएफ़एसी लिस्ट पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के दौर में तैयार किया गया था. इस वजह से इसे क्लिंटन लिस्ट कहा जाता है.

चीन को उत्तर कोरिया से 'इश्क' क्यों है?

ट्रंप राज में क्यों गिर रहा है डॉलर?

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
उत्तर कोरिया की चुनौती

ये कंपनियां करती क्या हैं

चीन उत्तर कोरिया का प्रमुख व्यापारिक साझीदार है. विदेश नीति के जानकार इस ओर ध्यान दिलाते हैं कि ऐसी कंपनियां हैं जो ख़ास तौर पर उत्तर कोरिया को पैसे और बाज़ार तक पहुंचने में मदद करती हैं.

इसलिए अमरीकी वित्त विभाग के पूर्व अधिकारी एंथनी रुगेरियो को ये मानना है कि नए कदम से न केवल उत्तर कोरिया पर शिकंजा कसेगा बल्कि उसे मदद पहुंचाने वालों पर भी लगाम लगेगी जो ज्यादातर चीन से जुड़े हैं.

उनका कहना है कि कई कंपनियां इस चीनी नेटवर्क का हिस्सा हैं और वे इसकी तरफ़ से काम करती हैं. इन पर किसी किस्म की कोई पाबंदी नहीं है. इनमें वो कंपनियां हैं जिनके तार उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े हैं. कुछ कंपनियां उत्तर कोरिया से वैनेडियम जैसे खनिज खरीदती हैं.

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
पिता के मौत बाद किम जोंग उन ने उत्तर कोरिया की कमान संभाली. कुछ बदला, कुछ अब भी नहीं बदला.

उत्तर कोरिया से रिश्ते

अमरीका का दावा है कि प्रतिबंधित रूसी कंपनी जीफेस्ट-एमएलएलसी ने उत्तर कोरिया के मिसाइल कार्यक्रम के लिए मेटल्स की आपूर्ति की.

वित्तीय मोर्चे पर चीनी कंपनी मिंगजेंग इंटरनेशनल ट्रेडिंग लिमिटेड पर नॉर्थ कोरिया फ़ॉरेन ट्रेड बैंक को करेंसी एक्सचेंज में मदद देने का आरोप लगा है.

प्रतिबंध सूची में कोयला कारोबार से जुड़ी तीन कंपनियां हैं जिन पर उत्तर कोरिया से रिश्ते रखने का आरोप है.

अमरीकी प्रतिबंध लगने के कुछ ही घंटे के भीतर चीन ने अमरीका से फौरन ग़लती सुधारने की अपील की और कहा कि उसकी कंपनियों को सजा दी जा रही है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे