'एक जगह बंध कर रहें रोहिंग्या मुसलमान': बांग्लादेशी सरकार

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बांग्लादेश सरकार ने घोषणा की है कि वो म्यांमार से सीमा पार कर बांग्लादेश आने वाले चार लाख रोहिंग्या मुसलमानों के लिए रहने का ठिकाना बनाएगी.

पुलिस का कहना है कि रोहिंग्या मुसलमानों को उसी जगह पर रहना होगा जहां उन्हें जगह दी गई है और वे कहीं और नहीं जा कर सकते.

कॉक्स बाज़ार के नज़दीक सेना और सहायता एजेंसियां चौदह हज़ार घर बना रहे हैं जिनमें से हर एक घर में के लिए रहने की जगह होगी.

माना जा रहा है कि बीते अगस्त तक म्यांमार में सेना की हिंसा से बच कर चार लाख से अधिक रोहिंग्या बांग्लादेश की तरफ पलायन कर चुके हैं.

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म्यांमार सेना पर रोहिंग्या के घर जलाने का आरोप

मानवाधिकार समूहों ने म्यांमार की सेना पर अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुसलमानों के घर जलाने का आरोप लगाया है. हालांकि सेना का कहना है कि उन्होंने उन पर हुए विद्रोहियों के हमले की जवाबी कार्यवाई की है और उन्होंने नागरिकों को कतई निशाना नहीं बनाया है.

बांग्लादेश के डेली स्टार अख़बार में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार ये नए घर 8 वर्ग किलोमीटर के इलाके में बनाए जाएंगे और उन कैंम्पों के नज़दीक होंगे जहां म्यंमार से आकर रोहिंग्या शरणार्थी अधिक संख्या में रह रहे हैं.

अख़बार के अनुसार इन घरों के पास 8,500 अस्थाई टॉयलेट और 14 अस्थाई वेयर हाउस बनाए जाएंगे.

समाचार एजेंसी एएफ़पी ने बांग्लादेश की आपदा प्रबंधन सचिव शाह कामा के हवाले से कहा है कि सरकार को उम्मीद है कि चार लाख लोगों को रखने के लिए बांग्लादेश के पास पर्याप्त जगह है. ये घर 10 दिनों में बनाए जाएंगे.

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'आसानी से पहचाने जा सकें रोहिंग्या'

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बांग्लादेश की पुलिस ने एक बयान जारी कर कहा है कि बांग्लादेश पहुंचे रोहिंग्या शरणार्थियों के वहीं रहना होगा जहां उन्हें जगह दी जाएगी और वो और किसी जगह नहीं जा सकते, अपने मित्रों या संबंधियों के साथ रहने के लिए भी वो कहीं नहीं जा सकते.

ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों और ड्राइवरों से भी अपील की गई है कि वो रोहिंग्या शरणार्थियों को कहीं ले जाने के लिए मना करें और किराए पर मकान लगाने वालों से कहा गया है कि वो उन्हें रहने के लिए मकान ना दें.

विश्लेषकों का कहना है कि सरकार रोहिंग्या शरणार्थियों के आम जनता में घुलने मिलने के कारण उनकी पहचान ना हो पाने से रोकने के लिए ऐसा करना चाहती है.

सरकार के अनुसार ऐसा करने से उन्हें आसानी से वापिस म्यांमार या किसी तीसरे देश भेजा जा सकेगा.

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Image caption इसी सप्ताह म्यांमार की नेता आंग सान सू ची ने रोहिंग्या मुसलमानों पर होने वाले अत्याचारों को चरमपंथ के ख़िलाफ़ कार्रवाई बताकर उसका बचाव किया था. रोहिंग्या मुसलमानों के पलायन के मुद्दे पर कई अंतरराष्ट्रीय नेता और नोबल पुरस्कार विजेता अपनी चिंता ज़ाहिर कर चुके हैं.

शनिवार सुबह को कथित तौर पर शरणार्थियों के तौर पर आए बच्चों के लिए रूबेला और पोलियो टीका लगने का भी कार्यक्रम शुरू किया गया है.

म्यांमार के रखाइन प्रांत से अपनी जान बचा कर भाग रहे लोगों ने इस महीने बीबीसी को अपनी आपबीती सुनाई और बताया कि उनके साथ यौन हिंसा और बलात्कार हुआ है और उन्होंने अपने लोगों की हत्याएं देखी हैं. रखाइन प्रांत में बीबीसी ने जल चुके घरों को भी देखा.

बीबीसी बांग्ला सेवा की संवाददाता फ़रहाना परवीन बताती हैं कि कई रोहिंग्या परिवारों ने आरोप लगाया है कि म्यांमार में कई महिलाओं का बलात्कार करने के बाद उनकी हत्या कर दी गई.

उनके अनुसार बांग्लादेश में कई डॉक्टर भी बताते हैं कि इलाज कराने आने वाली रोहिंग्या महिलाएं बहुत शर्म महसूस करती हैं.

'मानवीय आपदा झेल रहे हैं रोहिंग्या मुसलमान'

'नस्लीय नरसंहार के आरोप'

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जब रोहिंग्या शरणार्थी कैंप के ऊपर से गुजरा ड्रोन?

बीते शुक्रवार को एचआरडब्ल्यू ने एक रिपोर्ट जारी की जिसमें म्यांमार की सेना पर नस्लीय नरसंहार के लिए अभियान चलाने का आरोप लगाया गया था. इससे पहले संयु्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख ज़ैद राद अल-हुसैन ने कहा था कि म्यांमार में जो हो रहा है उसे नस्लीय नरसंहार माना जा सकता है.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि रोहिंग्या के कई गांवों को आग के हवाले कर दिया गया है.

'रोहिंग्या मुस्लिम गांवों को जलाने की सैटेलाइट तस्वीरें'

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एचआरडब्ल्यू के फिल रॉबर्टसन कहते हैं, "सैटलाइट तस्वीरों में जो देखने को मिला है हमारा शोध उसकी पुष्टि करता है. उत्तरी रखाइन प्रांत में सामूहिक रूप से रोहिंग्या के गांवों को जलाने के लिए म्यांमार की सेना ज़िम्मेदार है."

वो कहते हैं, "संयुक्त राष्ट्र और सदस्य देशों को जल्द ही म्यांमार पर प्रतिबंध लगाने चाहिए ताकि ये हिंसा रुके और यहां से रोहिंग्या के पलायन को रोका जा सके."

हालांकि संयुक्त राष्ट्र ने म्यंमार से हिंसा रोकने के लिए क़दम उठाने की अपील की है उन्होंने फ़िलहाल म्यांमार को किसी तरह के प्रतिबंध नहीं लगाए हैं.

रोहिंग्या मुसलमानों का दर्द बयां करती तस्वीरें

म्यांमार का हिंसा के आरोपों से इंकार

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जलते घरों को छोड़कर म्यांमार से बांग्लादेश से आ रहे रोहिंग्या मुसलमानों की कहानी.

संयुक्त राष्ट्र में म्यांमार के दूत ने कहा है कि रखाइन प्रांत में जरी हिंसा के लिए रोहिंग्या विद्रोही ज़िम्मेदार हैं और उनका देश किसी तरह की हिंसा को कतई बर्दाश्त नहीं करता.

सरकार के प्रवक्ता ज़ौ हेटेय ने पलायन कर गए लोगों से अपील की है कि वो देश लौटें और रखाइन प्रांत में बनाए गए शरणार्थी शिविरों में रहें. हालांकि उन्होंने कहा कि म्यांमार से पलायन करके गए सभी लोगों को वापस नहीं ले सकते.

'हम फुटबॉल जैसे, हर जगह से लात खा रहे हैं'

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रोहिंग्या संकट को मानवीय नज़र से देखें सू ची: शेख़ हसीना

बांग्लादेश की सरकार ने म्यांमार सरकार को आधिकारिक तौर पर कहा है कि सैन्य ड्रोन और हेलीकॉप्टरों के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए कहा है. बांग्लादेश का आरोप है कि इन ड्रोन और हेलीकॉप्टरों ने बांग्लादेश के हवाई क्षेत्र का उल्लघंन किया है.

बांग्लादेश का कहना है कि म्यांमार उसे उकसा रहा है. हालांकि म्यांमार ने बांग्लादेश के आरोपों से इंकार किया है.

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने म्यांमार सरकार की आलोचना करते हुए रोहिंग्या मुसलमानों को वापस बुलाने की अपील की है.

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