उत्तर कोरिया की मिसाइलों को तबाह क्यों नहीं कर देता जापान?

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जापान के होकाइडो द्वीप पर पिछले 15 दिनों के भीतर दो बार एंटी-एयरक्राफ्ट अलार्म सक्रिय किया गया. यह किसी ड्रिल का हिस्सा नहीं था बल्कि उत्तर कोरिया की तरफ से किए गए मिसाइल परीक्षण के बाद जारी किया गया ख़तरे का अलार्म था.

बीते सप्ताह जापान की सरकार ने अपने नागरिकों को अलर्ट जारी किया, यह अलर्ट सुबह सात बजे जारी किया गया था जिसमें लोगों से सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की बात कही गई थी.

इसके थोड़ी ही देर बाद 7:04 और 7:06 बजे होकाइडो द्वीप के ऊपर से मिसाइल लॉन्च हुई, जो बाद में समुद्र में जा समाई. इसका मतलब है कि अलर्ट जारी होने के बाद जापान के लोगों के पास सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए महज 4 मिनट का समय था.

इस मिसाइल परीक्षण के बाद सवाल उठने लगे कि जापान उत्तर कोरिया की मिसाइलों को तबाह क्यों नहीं कर देता?

एवलीनों फुजीमोटो मेडिकल के छात्र हैं, वे उत्तर पश्चिम टोक्यो में रहते हैं. बीबीसी के साथ बात करते हुए फुजीमोटो ने कहा, ''जापान ने पिछले 70 साल में किसी देश के साथ युद्ध नहीं किया, ऐसे में सुरक्षित स्थान पर किस तरह पहुंचा जाए हमें इसका कोई अभ्यास नहीं हैं.''

वे कहते हैं, ''जापान एक सुरक्षित राष्ट्र है, लेकिन हमें नहीं पता कि उत्तर कोरिया की ये मिसाइलें कितनी विध्वंसकारी हैं और इसी वजह से हम सभी डरे हुए हैं.''

उत्तर कोरिया ने जापान की ओर फिर दागी मिसाइल

जापान का दावा - उत्तर कोरिया की मिसाइलों से कोई ख़तरा नहीं

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Image caption जापान के रक्षा मंत्री

मिसाइल परीक्षण के बाद जापान के रक्षा मंत्री इत्सुनोरी ओनदडेरा ने मिसाइल से जुड़ी जानकारी इकट्ठी की और पता लगाया कि इन मिसाइल परीक्षणों का लक्ष्य जापान नहीं था. बल्कि ये मिसाइल होकाइडो से 2200 किमी दूर जाकर गिरी.

लेकिन फिर भी अगर इन मिसाइलों का लक्ष्य जापान होता तो इस स्थिति मे जापान के पास क्या विकल्प बचते हैं?

जापान के पास क्या हैं विकल्प ?

फिलहाल जापान के पास जो मिसाइल डिफेंस सिस्टम है वह दो चरणों में काम करता है. पहले चरण में एजिस कॉम्बैट सिस्टम है.

इस सिस्टम के जरिए उस मिसाइल को रोका जाता है जो उसी वक्त लॉन्च हुई हो या फिर वह अपनी आधी उड़ान पर हो.

वहीं दूसरी तरफ जापान के पास कम दूरी वाला स्वदेशी डिफेंस सिस्टम (पेट्रॉइट सिस्टम) है. इसका काम उन मिसाइल को मार गिराना है जो लक्ष्य से भटकने लगती हैं.

वैसे तो ये दोनों ही सिस्टम बेहतर हैं लेकिन इनकी कुछ सीमाएं भी हैं. एजिस सिस्टम तभी बेहतर तरीके से काम कर सकता है जब समुद्री जहाज सही वक्त पर सही जगह पर मौजूद हों.

पेट्रॉइट सिस्टम छोटे क्षेत्र के लिए तो काफ़ी कारगर साबित होता है लेकिन बड़े क्षेत्र में इस सिस्टम के ज़रिए कामयाबी हासिल नहीं की जा सकती.

वैसे तो जापान के पास और भी विकल्प मौजूद हैं लेकिन वे सभी काफ़ी महंगे हैं और उनमें वक़्त भी काफ़ी लगता है.

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अमरीका की मदद ले सकता है जापान

जापान अपने इलाक़े में हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफ़ेंस टर्मिनल (थाड़) का प्रयोग कर सकता है. अमरीका थाड़ सिस्टम का प्रयोग गुआम द्वीप में कर रहा है साथ ही दक्षिण कोरिया में भी उसने यह प्रणाली लगाई है.

अंतरराष्टीय नीतियों की काउंसिल के सदस्य जे.बर्कशायर मिलर ने इसी साल मार्च के महीने में फॉरेन अफ़ेयर्स मैगजीन में लिखा था, ''थाड़ के ज़रिए बड़े मिसाइल परीक्षणों को रोकने में कामयाबी मिल सकती है, इससे भीड़भाड़ वाले इलाक़े में होने वाले बड़े नुकसान को भी रोका जा सकता है.''

लेकिन यदि जापान अपने क्षेत्र में थाड़ जैसी किसी प्रणाली को लगाता है तो चीन इसका विरोध कर सकता है, चीन ने दक्षिण कोरिया के समक्ष भी विरोध दर्ज करवाया था.

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार जापान के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि वे मिसाइल परीक्षणों को रोकने के लिए जमीनी स्तर के किसी सिस्टम को शुरू करना चाहते हैं, जैसे की एजिस एहोर है, जिसकी मदद से उसके वायुमंडल के ऊपर से जाने वाली किसी भी मिसाइल को रोका जा सके.

इस के साथ ही जापान के रक्षा अधिकारियों के बीच इस विषय पर चर्चा चल रही है कि जापान को अमरीका की मदद से हथियार एकत्रित करने चाहिए ताकि समय आने पर उत्तर कोरिया का सामना किया जा सके.

बर्कशायर मिलर कहते हैं, ''जापान अमरीका से टॉमहॉक मिसाइल या एफ-35ए ख़रीद सकता है.''

जापान के संविधान के अनुसार हथियारों की ख़रीद फरोख़्त कितनी जायज़ होगी इस पर भी सवाल खड़ा होता है, जापान के संविधान को शांति पर आधारित संविधान माना जाता है जो दूसरे विश्व युद्ध के बाद अस्तित्व में आया था.

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