चुनाव में शरीफ़ की बेग़म कुलसुम नवाज़ का क्या होगा?

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नवाज़ शरीफ़ को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद से हटाए जाने के बाद उनकी खाली हुई सीट पर रविवार को चुनाव होने जा रहा है.

इस चुनाव में उनकी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) से उनकी पत्नी कुलसुम नवाज़ लाहौर संसदीय क्षेत्र से मैदान में हैं.

लेकिन भ्रष्टाचार के मामलों में अदालत की ओर से दोषी पाये जाने के बावजूद नवाज़ परिवार का करिश्मा जनता में कम नहीं हुआ है.

बातचीत में स्थानीय लोग भ्रष्टाचार के मामलों से नाराज़ तो लगते हैं, लेकिन जब चुनाव की बात आती है तो उनकी पसंद नवाज़ ख़ानदान ही है.

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पाकिस्तान का पंजाब

आम लोगों का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामले से नवाज़ शरीफ़ देर-सबेर उबर जाएंगे.

पंजाब पाकिस्तान का आबादी के लिहाज़ से सबसे बड़ा प्रांत है और उनकी पार्टी का इस इलाक़े में ख़ासा दबदबा है.

स्थानीय लोग भी मानते हैं कि भले ही नवाज़ शरीफ़ भ्रष्टाचार के मामलों में फंस गए हैं लेकिन उन्होंने पंजाब और लाहौर के विकास में काफ़ी योगदान किया है.

शायद यही वजह है कि इस चुनाव में भ्रष्टाचार कोई बड़ा मुद्दा नहीं बन पाया है.

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Image caption शाहिद ख़क़ान अब्बासी

जब प्रधानमंत्री पद से शरीफ़ हटे थे तो कहा जा रहा था कि प्रधानमंत्री पद उन्हें सौंपा जाएगा. उनकी सीट से उनके भाई शाहबाज़ शरीफ़ को खड़ा करने की बात भी हुई थी.

लेकिन सत्तारूढ़ पार्टी ने शरीफ़ के वफ़ादार शाहिद ख़क़ान अब्बासी को प्रधानमंत्री पद की ज़िम्मेदारी सौंप दी.

इससे ये नवाज़ शरीफ़ और उनके भाई के बीच अनबन की भी चर्चा उठी.

शाहनवाज़ अशरफ़ इस समय पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री हैं और अगर इस चुनाव में खड़े होते तो उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना होता और इसका मतलब है कि अपने गढ़ में ठीक ठाक चल रही सरकार के लिए मुश्किल खड़ा करना.

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Image caption मरियम नवाज़

चुनाव प्रचार

इसीलिए पार्टी नेता इसे बहुत समझबूझ कर उठाया गया कदम मानते हैं.

चूंकि नवाज़ की पत्नी कुलसुम नवाज़ को गले का कैंसर हुआ है और उनका इलाज चल रहा है इसलिए चुनाव प्रचार की सारी ज़िम्मेदारी मरियम नवाज़ को दी गई है.

मरियम नवाज़ बहुत तेज़ तर्रार नेता हैं और पंजाब में उनकी लोकप्रियता भी है. सोशल मीडिया पर भी उनके फॉलोवर्स की अच्छी खासी संख्या है.

उनकी तुलना, भूतपूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो से की जाती है. इसलिए कुलकुम नवाज़ की ग़ैर मौजूदगी में भी उनके चुनाव प्रचार में कोई कसर नहीं रखी जा रही है.

(बीबीसी संवाददाता हरिता कांडपाल से बातचीत पर आधारित.)

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