रोहिंग्या संकट से इंडोनेशिया में एकजुट होते चरमपंथी

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म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लिमों के ख़िलाफ़ हिंसक हमले का असर इंडोनेशिया में देखने को मिल रहा है. इंडोनेशिया में सोशल मीडिया यूजर्स का ग़ुस्सा म्यांमार के ख़िलाफ़ साफ़ महसूस किया जा सकता है.

इंडोनेशियाई भाषा के हज़ारों सोशल मीडिया यूजर्स फ़ोटो मेसेजिंग ऐप इंस्टाग्राम पर रोहिंग्या को बचाने के लिए म्यांमार के ख़िलाफ़ जिहाद की बात कर रहे हैं.

बीबीसी मॉनिटरिंग की रिसर्च में यह पाया गया कि रोहिंग्या का मुद्दा इंडोनेशिया में जिहादियों और कट्टर इस्लामिक विचार वाले लोगों को एक साथ ला रहा है. दोनों समूहों के सोशल मीडिया यूजर्स कई ऑनलाइन मुद्दों पर एक हो रहे हैं और इन मुद्दों पर एक दूसरे के लिए अपील भी कर रहे हैं.

25 अगस्त को रखाइन प्रांत में पुलिस चौकियों पर हमले के बाद म्यांमार ने सैन्य ऑपरेशन लॉन्च किया और इसमें लाखों रोहिंग्या मुसलमानों को विस्थापित होना पड़ा है.

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रोहिंग्या की रक्षा करने वाली सेना

म्यांमार के रखाइन प्रांत में जिन विद्रोहियों ने पुलिस चौकियों पर हमला किया था उनके संगठन का नाम अराकन रोहिंग्या सैल्वेशन आर्मी (एआरएसए) है. इस संगठन का कहना है कि उनका पहला उद्देश्य रोहिंग्या मुसलमानों की रक्षा करना है.

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एआरएसए का कहना है कि म्यांमार की सरकार के अत्याचार से रोहिंग्या मुसलमानों को बचाने की लड़ाई लड़ रहा है.

दूसरी तरफ़ म्यांमार की सरकार का कहना है कि एआरएसए 'बंगाली आतंकवादी' हैं जो रखाइन प्रांत को एक इस्लामिक राज्य के रूप में स्थापित करना चाहते हैं.

एकजुट होते जिहादी?

रोहिंग्या संकट के कारण एशिया भर में वैश्विक जिहादियों के एकजुट होने का ख़तरा बढ़ गया है. जिहादियों की तरफ़ से इसकी प्रतिक्रिया में हमले की आशंका बढ़ गई है.

सोमालिया और यमन में अल-क़ायदा के अलग-अलग खेमों ने म्यांमार में जिहाद की अपील की है. बीबीसी मॉनिटरिंग ने सोशल मीडिया एनालिटिक्स टूल क्रिम्सन हेक्सगॉन के ज़रिए इस पर रिसर्च किया कि दक्षिण-पूर्वी एशिया में यह मुद्दा कैसे गर्म हो रहा है.

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Image caption इंस्टाग्राम के जरिए रोहिंग्या मुद्दे पर इंडोनेशिया के जिहादी और इस्लामिस्ट समूह करीब आ रहे हैं

इस रिसर्च में 25 अगस्त से 15 सिंतबर तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स इंस्टाग्राम, फ़ेसबुक, ट्विटर पर रोहिंग्या और जिहाद कीवर्ड्स एक साथ डालकर इससे जुड़ी टिप्पणियों और पोस्टों को देखा गया.

हमने यूजर्स की पोस्टों की शुरुआती हिस्सों का विश्लेषण किया. इसके बाद हमने उनकी पुरानी पोस्टों को समझने की कोशिश की कि क्या वे जिहाद समर्थक हैं, इस्लामिस्ट हैं या फिर तटस्थ हैं.

ऑनलाइन जिहादियों की पहचान आईएस या अल-क़ायदा से जुड़ी विषय-वस्तुओं के प्रमोशन के आधार पर की गई. इसी तरह इस्लामिस्ट की पहचान वहां के कट्टर इस्लामिस्ट ग्रुपों के समर्थन के आधार पर की गई. इस रिसर्च से पता चला कि दोनों ग्रुप के यूजर्स कई मुद्दों पर एक साथ आ रहे हैं.

पहला मुद्दा: जिहाद के लिए म्यांमार का दौरा

रखाइन में विद्रोही हमलों के बाद इंडोनेशिया में बड़ी संख्या में सोशल मीडिया यूजर्स म्यांमार जाकर जिहाद करने की बात कर रहे हैं. म्यांमार में जाकर जिहाद करने वाले इंडोनेशियाई सोशल मीडिया यूजर्स की संख्या में चार सितंबर को काफ़ी बढ़ गई थी.

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Image caption इंडोनेशिया के इंस्टाग्राम यूजर्स ने 4 सितंबर को म्यांमार में जिहाद के लिए एकजुट होने की अपील की थी

तब कट्टर इस्लामिक ग्रुप जो कि इस्लाम डिफेंडर्स फ्रंट (एफ़पीआई) के नाम से जाना जाता है, ने ऐसा करने की इच्छा रखने वालों के लिए एक रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू की थी.

इस्लामिक स्टेट के इंडोनेशियाई समर्थक ने मुस्लिमों को म्यांमार जाकर हथियारबंद जिहाद छेड़ने के लिए उकसाया. इसी तरह के एक यूजर ने ख़ुद को मुजाहिदीन लड़ाका बताते हुए दक्षिण-पूर्वी एशिया के मुस्लिमों से कथित रूप से मारे जा रहे रोहिंग्या पर ध्यान देने की गुजारिश की. उसने कहा कि म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लिमों का जातीय नरसंहार हो रहा है.

एक और यूजर्स ने जो कि नियमित तौर पर आईएस से जुड़ा कंटेंट सोशल मीडिया पर प्रमोट करता है, उसने कहा इंडोनेशिया के मुस्लिमों को रोहिंग्या के ख़िलाफ़ अत्याचार पर सब्र तोड़ना चाहिए और जिहाद की राह अख्तियार करनी चाहिए.

इस्लामिस्ट भी सहमत हैं कि दक्षिण-पूर्वी एशिया में मुस्लिम लड़ाकों और मुजाहिदीनों को अपनी एकता और ताक़त दिखानी चाहिए. इन्होंने अपील की है कि मुस्लिम अपने रोहिंग्या भाइयों की मदद करें जिन्हें सताया जा रहा है.

सोशल मीडिया पर ऐसी पोस्टों को कट्टरपंथी जमकर शेयर कर रहे हैं. इसके साथ ही जिहादी समूहों को प्रोत्साहित कर म्यांमार में जिहाद करने के लिए कहा जा रहा है. फिलीपींस स्थित अबू सयाफ़ से भी इस तरह की अपील की गई है.

दूसरा मुद्दा: बड़ी आबादी से एक व्यापक अपील

जिहादी सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में एएफपीआई हैशटैग का इस्तेमाल कर रहे हैं. इन तरीक़ों से लोगों को म्यांमार में जिहाद के लिए उकसा रहे हैं.

कट्टरपंथी इस मामले में अपनी पोस्ट हैशटैग जिहाद से पोस्ट कर रहे हैं. जिहादी भी मुद्दों पर बात करते हैं तो इस हैशटैग का इस्तेमाल करते हैं.

तीसरा मुद्दा: विदेशी लड़ाकाओं पर ज़ोर

जिहादी और इस्लामिस्ट दोनों लड़ाकों के वीडियो और तस्वीरें शेयर कर रहे हैं जिनमें दावा किया जा रहा है कि वे म्यांमार के भीतर हैं या रास्ते में हैं. एक अल-क़ायदा समर्थक यूजर ने वीडियो पोस्ट किया है जिसमें उसने दावा किया है कि बांग्लादेशी चरमपंथी म्यांमार में धीरे-धीरे घुसने में कामयाब हो रहे हैं और उन्होंने बौद्ध आतंकवादियों को मारना शुरू कर दिया है.

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Image caption जिहादी और इस्लामिस्टों का दावा है कि विदेशी लड़ाके रोहिंग्या समुदाय की मदद करना चाहते हैं

एक इस्लामिस्ट ने एक तस्वीर पोस्ट की है जिसमें दावा किया है कि चीन से 3000 जिहादी म्यांमार पहुंच गए हैं. हालांकि इस पोस्ट पर सवाल भी उठा कि ऐसी प्रतिक्रिया इंडोनेशिया से क्यों नहीं हो रही है जो दुनिया का सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है.

चौथा मुद्दाः बौद्धों को निशाना बनाना

इंडोनेशाई जिहादी ऐसी तस्वीरें पोस्ट कर रहे हैं जिसमें म्यांमार के बौद्धों के डराया जा सके. अल-क़ायदा समर्थक एक यूजर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि 'कट्टरपंथी साधुओं का अत्याचार'.

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Image caption इस्लामिस्ट ऐसी तस्वीरें इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर रहे हैं जिनमें म्यांमार के बौद्धों पर हमला करने के लिए उकसाया जा सके

इस्लामिस्ट ऐसी तस्वीरों को अधिक से अधिक पोस्ट कर रहे हैं जिनके जरिए म्यांमार के बौद्धों पर हमलों को प्रोत्साहित किया जा सके.

इन मुद्दों प जिहादी और इस्लामिस्ट एक दूसरे की पोस्ट पर प्रतिक्रियाएं भी कर रहे हैं, इसमें वे लिखते हैं 'इन अत्याचारी बौद्धों को तब तक मारो जब तक कि वे पूरी तरह खत्म नहीं हो जाते.'

पांचवा मुद्दाः विद्रोह में सहयोग

जिहादी और इस्लामिस्ट दोनों ही रोहिंग्या मुद्दे पर एक दूसरे को सहयोग कर रहे हैं, साथ ही वे किसी भी जिहादी संगठन से अपने संबंधों को भी नकारते हैं.

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इंडोनेशिया के इस्लामिस्ट रोहिंग्या चरमपंथियों को जिहाद छेड़ने के लिए उकसा रहे हैं.

बहुत से सोशल मीडिया यूजर #ARSA हैशटेग का प्रयोग कर रहे हैं. अल-क़ायदा के एक समर्थक ने अपनी पोस्ट में इस हैशटेग का प्रयोग करते हुए लिखा है, 'हमारे हथियार भले ही म्यांमार के सैनिकों जितने आधुनिक न हों, हमारी तैयारी भी पूरी न हो, लेकिन हमारे साथ ईश्वर है, और हम अपनी अंतरआत्मा के साथ अपने ईश्वर का बचाव करने के लिए तैयार हैं.'

विद्रोहियों के साथ सीधे बातचीत के अंदाज में एक पोस्ट लिखी गई है, 'रोहिंग्या के भाईयों, जिहाद ही तुम्हारा रास्ता है.' इस पोस्ट को 76,000 बार देखा गया है.

जिहादियों-इस्लामिकों का ख़तरनाक मेल

इंडोनेशिया के जिहादियों और इस्लामिकों का रोहिंग्या मुद्दे पर एकजुट होना दिखाता है कि ये दोनों समूह कितने करीब आ चुके हैं.

इंडोनेशिया के सोशल मीडिया यूजर रोहिंग्या मुद्दे पर अपना क्रोध प्रदर्शित कर रहे हैं.

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इससे पहले ये दोनों समूह इंडोनेशिया में धार्मिक अल्पसंख्यकों की आपसी नापसंदगियों पर भी एकमत थे, लेकिन म्यांमार में रोहिंग्या के मुद्दे ने इन दोनों समूहों को ऑनलाइन मीडियम के ज़रिए बहुत करीब लाकर खड़ा कर दिया है.

जिहादियों और इस्लामिकों का साथ आना एक ख़तरनाक मेल है, इससे आईएस और अल-क़ायदा में नई भर्तियां होने का ख़तरा पैदा हो रहा है.

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