'आठ साल की उम्र में पादरी ने पहली बार मेरा यौन शोषण किया'

थेरेसा टोल्मी मैकग्रेन
Image caption थेरेसा टोल्मी मैकग्रेन

"हर बच्चे को पीटा जाता था, उसे सज़ा दी जाती थी. अंधेरे कमरों में बंद कर दिया जाता था. उन्हें अपनी उल्टी खाने के लिए विवश किया जाता था."

ये कहना है टेरीज़ा टोल्मी मैकग्रेन का. उनका कहना है कि साठ और सत्तर के दशक में लैनार्क के एक कैथोलिक अनाथालय में वे शोषण का शिकार हुईं.

स्कॉटलैंड के लैनार्क में स्माइलम पार्क अनाथालय में टेरीज़ा जब लाई गई थीं तो उनकी उम्र छह साल थी.

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टेरीज़ा की आपबीती

शुरू में टेरीज़ा को लगा कि ये अच्छी जगह है जहां खेलने के लिए काफी जगह है.

लेकिन जल्दी ही उनका ख्याल गलत साबित हुआ. इसकी शुरुआत तब हुई जब एक नन ने उनके कान जोर से उमेठे और सफ़ाई करने के लिए कहा.

टेरीज़ा बताती हैं, "मुझे लगा कि इसके बाद सब ठीक हो जाएगा."

स्माइलम पार्क के इस अनाथालय में उनके साथ क्या कुछ गुजरा होगा, इसका अंदाजा उन्हीं की इस बात से लगाया जा सकता है, "आठ साल की उम्र में पादरी ने पहली बार मेरा यौन शोषण किया. मैं बेंचों की सफ़ाई का काम कर रही थी. उसने मुझसे एक कमरे में साथ चलने के लिए कहा."

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डरावनी घटना

वो आगे बताती हैं, "पादरी ने मुझे पुचकारते हुए गोद में बैठने के लिए कहा. लेकिन मैं वहां से चली गई. ऐसी एक और डरावनी घटना मुझे याद आती है जब वो पादरी यही सब कर रहा था और एक नन वहां आ गईं. मुझे लगा कि चलो कोई आया जिसे एहसास होगा कि वहां क्या चल रहा है. लेकिन पादरी पर नाराज़ होने के बजाय वो मुझ पर ही भड़क गईं और मुझे वेश्या कहा. उन्होंने मुझसे वहां से चले जाने के लिए कहा."

लेकिन नन ने टेरीज़ा के साथ जिस तरह से जोर-जबर्दस्ती की, उससे उनकी बांह टूट गई थी जिसका एहसास उन्हें एक दिन बाद हुआ था.

टेरीज़ा को सज़ा के तौर पर वो करने के लिए कहा गया जिसे करने के लिए पादरी उन्हें मजबूर कर रहे थे.

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अनाथालय की नन

टेरीज़ा स्माइलम पार्क के अनाथालय में सालों से चले आ रहे शोषण के बारे में बताती हैं. ये सिलसिला तब जाकर थमा जब वे सैकेंडरी स्कूल में पहुंच गईं.

लेकिन अनाथालय की नन उन्हें मानसिक रूप से सताने लगीं. टेरीज़ा ने बताया कि उन्हें यूनिवर्सिटी जाने से रोकने के लिए हर तरकीब अपनाई गई, लेकिन वे कामयाब नहीं हो पाए.

पर अनाथालय में आने वाले सभी बच्चे टेरीज़ा की तरह बचने में कामयाब नहीं हो पाए.

बीबीसी की एक जांच में पता चला कि इस अनाथालय में मारे गए 400 बच्चों को नज़दीक के कब्रिस्तान में सामूहिक रूप से दफनाया गया था.

टेरीज़ा फिलहाल नॉर्वे में एक मनोवैज्ञानिक के तौर पर काम करती हैं और 1981 में इस अनाथालय को बंद कर दिया गया था.

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