ईरान भूकंप: 'कब्रें टूट गईं और उनसे लाशें बाहर आ गईं'

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Image caption भूकंप से कई इमारतें तबाह हो गईं, हजारों घायल हो गए और सैकड़ों मारे गए

ईरान-इराक़ में आए भूकंप में मरने वालों की संख्या 396 तक पहुंच गई है. यहां रविवार शाम को 7.3 तीव्रता का भूकंप आया था.

यूएस जियोलॉजिकल सर्वे का कहना है कि इस बार भूकंप का केंद्र इराक़ी कस्बे हलाब्जा से दक्षिण-पश्चिम में 32 किलोमीटर दूर स्थित था.

इस भूकंप के प्रत्यक्षदर्शियों ने बीबीसी को अपनी आपबीती सुनाई.

ईरान में भूकंप आने के क्या कारण हैं ?

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Image caption भूकंप में खोरसो के परिवार के कई लोग मारे गए

'मेरी आंटी, कज़न और उनके बच्चे की मौत'

खुसरो सारपोल-ए ज़हाब के पास एक गांव में रहते हैं. यह इलाका इराक़ सीमा के पास है और भूकंप से सबसे ज्यादा प्रभावित रहा है.

खुसरो बताते हैं, "मेरी बहनों और ​पिता पर दीवार गिर गई. मुझे उन्हें घर से बाहर खींच कर लाना पड़ा. मेरी मां को चोटें आ गई थीं. मेरी आंटी, कज़न और उनके बच्चों की मौत हो गई."

"पूरा गांव तबाह हो गया. कब्रें तक टूट गईं और उनमें से लाशें बाहर आ गईं. यहां पानी नहीं है. लोग नदी के पानी के इस्तेमाल कर रहे हैं. हमारे पास खाने को कुछ नहीं है. हमें पानी और गर्म कपड़ों की जरूरत है."

ईरान-इराक़ में भूकंप, 395 से ज़्यादा की मौत

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Image caption कुछ क्षेत्रों में विनाश व्यापक है

'मरने वालों की संख्या और बढ़ेगी'

आमिर भी सारपोल-ए ज़हाब में रहते हैं.

उन्होंने बताया, "30 प्रतिशत तक शहर तबाह हो गया है. मेयर सोशल हाउसिंग बिल्डिंग पूरी तरह नष्ट हो चुकी है. शहर की 30 प्रतिशत इमारतें ढह गई हैं."

उन्होंने कहा, "लोगों को खाने और पानी की जरूरत है. बचाव दल शहर में है लेकिन मुझे लगता है मरने वालों की संख्या अभी और बढ़ेगी."

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Image caption भूकंप के कारण कई घर ढह गए

'गांव गायब हो गए'

मेहरदाद के रिश्तेदार उनके घर नष्ट होने के बाद करमनशाह प्रांत में टेंट में रह रहे हैं.

उन्होंने बताया, "मैं अपने रिश्तेदारों के लिए खाना और टेंट का इंतजाम करने करमनशाह में भूकंप के केंद्र के पास स्थित गांवों में गया था."

"सभी गांव गायब हो गए हैं. लोगों के पास पर्याप्त खाना और पानी नहीं है और उन्हें टेंट की जरूरत है."

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Image caption करमनशाह में लोग टेंट में रह रहे हैं लेकिन उनका कहना है कि उन्हें तुरंत आपूर्ति की जरूरत है

'लोग बाहर रह रहे हैं'

सलाह करमानशाह के सलास-ए बाबजानी जिले में रहते हैं.

उन्होंने बताया, "हम भूकंप के केंद्र के नज़दीक हैं. लोग अपने घरों से बाहर रह रहे हैं."

सलाह ने कहा, "यहां बस कुछ ही टेंट हैं और 50 से 80 प्रतिशत घर बर्बाद हो चुके हें. यहां खाना और दवाई नहीं है."

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