बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद पाकिस्तान में तोड़े गए थे कई मंदिर

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Image caption लाहौर का जैन मंदिर जिसे 8 दिसंबर, 1992 को तोड़ दिया गया

जब हिंदू कट्टरपंथियों ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहाई थी तो कम ही लोगों ने सोचा होगा कि पड़ोसी देशों में इस पर किस किस्म की प्रतिक्रिया होगी.

हिंदुओं की छोटी-सी आबादी पाकिस्तान में भी रहती है और यहां उनके धार्मिक स्थल भी हैं जहां वे अपने ईश्वर की प्रार्थना करते हैं.

लेकिन छह दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के बाद पाकिस्तान में इसकी प्रतिक्रिया होने में ज़्यादा वक्त नहीं लगा.

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Image caption लाहौर के जैन मंदिर की मौजूदा स्थिति

बाबरी मस्जिद के बाद पाकिस्तान में तक़रीबन 100 मंदिर या तो ज़मींदोज़ कर दिए गए या फिर उन्हें भारी नुकसान पहुँचाया गया.

हालांकि इनमें से ज़्यादातर मंदिर आबाद नहीं थे यानी यहां नियमित तौर पर पूजा-अर्चना नहीं होती थी.

इनमें से कुछ मंदिरों में 1947 में हुए बंटवारे के बाद पाकिस्तान आए लोगों ने शरण ले रखी थी.

आठ दिसंबर, 1992 को लाहौर के एक जैन मंदिर को उन्मादियों ने ढहा दिया. जहां अब केवल इसके धूल फांकते खंडहर बाकी रह गए हैं.

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Image caption रावलपिंडी के कृष्ण मंदिर का गुंबद, इस मंदिर का शिखर बाबरी विध्वंस के बाद तोड़ दिया गया था

मैंने इन मंदिरों में रहने वाले कुछ लोगों से बात की.

इन लोगों ने बताया कि साल 1992 के दिसंबर में मंदिरों को बर्बाद करने आई भीड़ से उन्होंने ये गुज़ारिश की थी कि इन मंदिरों को छोड़ दें.

उस मंजर को याद करते हुए लोगों ने बताया, "हमने उन्हें कहा... ये हमारे घर हैं, हम पर हमला मत करो."

रावलपिंडी के कृष्ण मंदिर में आज भी हिंदू पूजा-पाठ करने आते हैं. इस मंदिर का शिखर बाबरी विध्वंस के बाद तोड़ दिया गया था.

सरकार चाहती तो इसका शिखर फिर से स्थापित किया जा सकता था.

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Image caption रावलपिंडी का कल्याण दास मंदिर

ये तस्वीर रावलपिंडी के कल्याण दास मंदिर की है. फ़िलहाल इसमें नेत्रहीन बच्चों के लिए एक सरकारी स्कूल चलता है.

स्कूल के अधिकारियों ने बताया कि 1992 में एक भीड़ ने इस जगह पर हमला कर दिया था, लेकिन वे इसकी इमारत को बचाने में किसी तरह कामयाब रहे.

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Image caption झेलम का एक वीरान मंदिर

पाकिस्तान के झेलम शहर के एक वीरान मंदिर का दृश्य.

स्थानीय लोगों का दावा है कि इस मंदिर को जिस किसी ने भी बर्बाद करने की कोशिश की, उसे खुद इसका नुक़सान उठाना पड़ा. कभी हमलावर घायल हुआ तो कभी उसकी मौत हो गई.

साल 1992 में कुछ लोगों ने इसे तोड़ने की कोशिश की थी, लेकिन वे इसके ऊपरी सिरे से गिर गए. इसके बाद फिर किसी ने मंदिर को नुक़सान पहुंचाने की कोशिश नहीं की.

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Image caption लाहौर का बंसीधर मंदिर

लाहौर के अनारकली बाज़ार के बंसीधर मंदिर को 1992 में आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया गया था.

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Image caption लाहौर का शीतला देवी मंदिर

ये तस्वीर लाहौर के ही शीतला देवी मंदिर की है. बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद पाकिस्तान में उन्मादियों के ग़ुस्से का शिकार बनने वाले मंदिरों में ये भी एक है.

उनके हमले में मंदिर को आंशिक रूप से थोड़ा नुक़सान पहुंचा था. इन दिनों यहां बंटवारे के बाद भारत से आए शरणार्थी परिवार रहते हैं.

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