वो जंगल जहां जाकर लोग ख़ुदकुशी करते हैं

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Image caption फिल्म "द फॉरेस्ट" में ऑकिगाहारा जंगल को कुछ ऐसा दिखाया गया है.

अमरीकी यूट्यूब स्टार लोगेन पॉल ने अपने एक वीडियों में लाश दिखाने पर माफी मांगी है.

इस वीडियो में उन्होंने जापान के ओकिगाहारा जंगल में एक व्यक्ति का शव दिखाया था, जिसने आत्महत्या कर ली थी. पॉल ने यह वीडियो अपने दोस्तों के साथ शूट किया, जिसमें वो हंसते हुए भी नज़र आ रहे थे.

वीडियो अपलोड करने के बाद उन्हें इंटरनेट पर कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी. कई लोगों ने इसे "अपमानजनक" और "घिनौना" कहा, जिसके बाद लोगेन पॉल ने वीडियो हटा लिया और माफी मांगी.

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उन्होंने माफी मांगते हुए कहा कि उनका मक़सद आत्महत्यों को रोकने के प्रति जागरूकता फैलाना था, न कि नकारात्मकता फैलाना.

ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट में पॉल ने कहा, "उस जंगल में लाश मिलने पर में हैरान था, इसलिए मुझसे यह गलती हो गई. मुझे यह वीडियो पोस्ट नहीं करना चाहिए था. जैसे ही हमें वो लाश मिली मुझे कैमरा हटा लेना चाहिए था और रिकोर्डिंग बंद कर देनी चाहिए थी. मैं कई चीज़ों को अलग तरीके से कर सकता था, जो मैंने नहीं किया. मैं खुद से शर्मिंदा और मासूस हूं."

लेकिन जापान का यह जंगल कौन सा है, जिसे 'सुसाइड फॉरेस्ट' यानी 'ख़ुदकुशी का जंगल' कहा जाता है?

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सालाना 50 से 100 ख़ुदकुशी वाला जंगल

ओकिगाहारा जंगल में लाशें मिलना आम बात हैं. यहां हर साल दर्जनों लोग खुदकुशी कर लेते हैं.

ये जंगल टोक्यो से करीब 100 किलोमीटर दूर फुजी पर्वत के उत्तर पश्चिमी बेस पर स्थित है. यहां हर साल 50 से 100 लोग आत्महत्या करते हैं.

इस जंगल में इतने घने पेड़ हैं कि हवा भी ठीक नहीं आती. यहां जंगली जानवर भी नहीं रहते और इसी वजह से यह बेहद शांत जंगल है. यहां कई चट्टानी गुफाएं हैं.

अमरीका के सैन फ्रांसिस्को के गोल्डन गेट ब्रिज की तरह ही ये जापानी जंगल दुनिया की ऐसी जगहों में शुमार है, जहां बहुत से लोग ख़ुद को ख़त्म कर लेते हैं.

इस जंगल में मौत की कहानियों पर एक फिल्म 'द फ़ॉरेस्ट' (स्पेनिश में "एल बोस्क") भी बनी है, जो 2016 में रिलीज़ हुई थी.

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ओकिगाहारा जंगल में आत्महत्याओं को रोकने के लिए प्रशासन ने कई कोशिशें की हैं. जंगल में घुसते ही एक नोटिस लगा दिखता है, जिसमें लिखा है, "एक बार फिर खुद को मिले इस जीवन के बारे में सोचें. अपने माता-पिता, अपने भाई-बहनों के बारे सोचें. सब कुछ अकेले सहने से पहले, किसी से संपर्क करें." नोटिस पर मदद के लिए एक फोन नंबर भी लिखा है.

साहित्य से प्रेरित?

कहा जाता है कि जापान के लोग एक कहानी से प्रेरित होकर इस जंगल में जान देने आते हैं. सेइचो माट्सुमोटो की कहानी 'कुरोई जुकाई' ('द ब्लैक सी ऑफ ट्रीज़') 1960 में छपी थी. इस कहानी के अंत में एक प्रेमी जोड़ा ओकिगाहारा जंगल में आकर जान दे देता है.

कुछ और लोग मानते हैं कि जान देने के लिए इस जंगल के इस्तेमाल की परंपरा 19वीं सदी की 'उबासुते प्रथा' से आती है. कहा जाता है कि इस प्रथा के मुताबिक, सूखे या अकाल के समय इच्छामृत्यु के लिए बूढ़े लोगों को इस जंगल में छोड़ दिया जाता था.

यहां तक कि 1993 में आई एक किताब 'द कम्पलीट हैंडबुक ऑफ सुसाइड' में ओकिगाहारा को 'मरने के लिए परफेक्ट जगह' बताया गया है. इस किताब में लटककर मरने को 'वर्क ऑफ आर्ट' कहा गया है.

इस किताब की लाखों प्रतियां बिकीं लेकिन बाद में इसे जापान में बैन कर दिया गया था.

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Image caption "द फॉरेस्ट" फिल्म में जंगल की एंट्री पर लगे चेतावनी बोर्ड को पढ़ते मुख्य पात्र.

ऐतिहासिक चलन

पूरी दुनिया में करीब आठ लाख लोग हर साल आत्महत्या कर लेते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक सबसे ज़्यादा आत्महत्या वाले पांच देशों में जापान भी शामिल है.

2015 में जापान में आत्महत्या की दर विकासशील देशों में सबसे ज्यादा रही.

बीबीसी से बात करते हुए टोक्यो की टेम्पल यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञानी वतरू निशिदा कहते हैं, "अकेलापन अवसाद और आत्महत्या का मुख्य कारण है."

कई विशेषज्ञ कहते हैं कि जापान में बूढ़े लोगों की ज्यादातर मौतें खुदकुशी हो सकती हैं. वतरू निशिदा कहते हैं, "अकेले रह रहे बुज़ुर्गों की मौत के मामले बढ़ रहे हैं. उनके बच्चे उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं."

'ख़ुदकुशी कभी पाप नहीं रहा'

जापान में होने वाली खुदकुशियों के पीछे और भी कई परंपरागत कारण बताए जाते हैं.

निशिदा कहते हैं, "इसकी एक वजह यह भी हो सकती है कि जापान में ईसाइयत का इतिहास नहीं रहा है. इसलिए यहां आत्महत्या कभी भी पाप नहीं रहा."

वहीं विशेषज्ञों का ये भी कहना है कि जापान में गुस्से या हताशा को दिखाने के ज़्यादा तरीके नहीं है. अगर युवाओं पर अपने बॉस का प्रेशर है या वो अवसाद में चले जाते हैं तो उनमें से कई को मरने के सिवा और कोई रास्ता नज़र नहीं आता.

इस स्थिति को जापानी भाषा में "हिकिकोमरी" कहा जाता है. ये एक तीखे किस्म का सामाजिक अलगाव है, जिसमें युवा अपने घर से निकलना नहीं चाहते. ये स्थिति नई तकनीक के आने के बाद बढ़ी है.

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