ब्रिटेन में भी पान-गुटखे पर 'रोक'

गुटखा
Image caption इन उत्पादों से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां होती हैं.

भारत में गुटखे जैसे उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने की कोशिशों की गूँज सात समंदर पार ब्रिटेन में भी सुनाई दे रही है.

ब्रिटेन में एक स्वास्थ्य एजेंसी ने दक्षिण एशियाई मूल के लोगों को हिदायत दी है कि वो पान और गुटखे जैसे उत्पाद खाना छोड़ दें.

ब्रिटेन के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड क्लिनिकल एक्सिलेंस (नाइस) का कहना है कि धुआं रहित तंबाकू उत्पादों से कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा लगातार बना रहा है.

दिलचस्प बात ये है कि इन उत्पादों के शौकीनों को कई बार ये पता ही नहीं होता कि उनमें तंबाकू इस्तेमाल किया गया है.

नाइस का कहना है कि इस बारे में स्वास्थ्यकर्मियों के बीच भी जागरूकता की कमी है. हाल ही में दिल्ली समेत भारत के कई राज्यों में गुटखे पर प्रतिबंध लगाया गया है.

बीमारियों का खतरा

अब तक के शोध कहते हैं कि इन उत्पादों में तंबाकू होने की वजह से निकोटिन भी पाया जाता है. इसलिए व्यक्ति को सिगरेट की तरह इनकी भी लत लग जाती है.

डॉक्टर कहते रहे हैं कि पान में सुपारी का भी इस्तेमाल होता है जिससे कैंसर होने का खतरा होता है. चूना भी पान में डाला जाता है, जिसका इस्तेमाल सीमेंट बनाने में भी किया जाता है.

Image caption भारत में इन दिनों गुटखा को लेकर बहस तेज है.

विशेषज्ञों के मुताबिक ये अनुमान लगाना मुश्किल है कि ब्रिटेन में कितने लोग धुआँ रहित तंबाकू उत्पादों का सेवन करते हैं.

लेकिन माना जाता है कि पान और गुटखे की वजह से ब्रिटेन में रहने वाली दक्षिण एशियाई मूल की महिलाओं में अन्य महिलाओं की तुलना में कैंसर होने की आशंका चार गुनी ज्यादा होती है.

नाइस के निदेशक प्रोफेसर माइक केली का कहना है, “हमें उम्मीद है कि हमारे दिशानिर्देशों के बाद स्वास्थ्यकर्मियों को पता चलेगा कि इन उत्पादों से कितना नुकसान होता है. ऐसे में वो दक्षिण एशियाई मरीजों को बता सकते हैं कि धुआं रहित तंबाकू उत्पादों के सेवन से उन्हें कितना नुकसान हो सकता है.”

वैसे मीठे पान में कोई तंबाकू नहीं होता है, बल्कि उसमें सूखे हुए नरियल और फलों के अलावा गुलाब की पत्तियों से बनी गुलकंद और सौंफ होती है.

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