बम का निशाना बना बम से बचाने वाला

 रविवार, 30 सितंबर, 2012 को 09:17 IST तक के समाचार
बम को निष्क्रिय करने वाले की अधिकारी की मौत.

पेशावर के हुकम खान ने बीते 27 साल में न जाने कितने बमों को निष्क्रिय किया होगा लेकिन एक बम ने उन्हीं की जान ले ली.

चरमपंथी हिंसा से सबसे ज्यादा प्रभावित पाकिस्तान के खैबर पख्तून ख्वाह प्रांत की राजधानी पेशावर में शुक्रवार को हुकम खान अपने साथियों के साथ एक बारूदी सुरंग को निष्क्रिय करने पहुंचे थे.

अभी विस्फोट सामग्री को तलाश किया जा रहा था कि इसी दौरान जोरदार धमाका हुआ जिसमें हुकम खान की घटनास्थल पर ही मौत हो गई. पुलिस को संदेह है कि ये धमाका रिमोट कंट्रोल से किया गया था.

उधर तहरीके तालिबान पाकिस्तान ने इस धमाके की जिम्मेदारी ली है. खैबर पख्तून ख्वाह में पिछले चार साल के दौरान नौ सुरक्षाकर्मी बम निष्क्रिय करते हुए मारे गए हैं.

दिलेर अफसर

"उन्होंने मुझसे कहा कि मैं अपने साथ कुछ लोगों को लेकर विस्फोटक सामग्री वाली जगह के लिए रवाना हो जाऊं. लेकिन थोड़ी देर बाद वो खुद भी साथ चल पड़े, जबकि पहले वहां जाने का उनका कोई इरादा नहीं था."

जियारतउल्लाह, हेड कांस्टेबल

इससे पहले भी हुकम खान एक बार बारूदी सुरंग को निष्क्रिय करते समय धमाके की चपेट में आ गए थे जिससे उनके बाएं हाथ की तीन उंगलियां कट गईं थी. बताया जाता है कि इस घटना के बाद उनके हाथ के एक हिस्से ने काम करना बंद कर दिया था.

बम निरोधक दस्ते के प्रमुख एआईजी शफकत मलिक ने बीबीसी को बताया कि 54 वर्षीय हुकम खान पिछले 27 साल से बम निरोधक दस्ते में कार्यरत थे. वो पेशावर में बम निरोधक दस्ते के बेहद दिलेर अफसरों में से एक माने जाते थे.

हुकम सिंह के एक साथी और हेड कांस्टेबल जियारतउल्लाह का कहना है, “सुबह के वक्त जब हुकम खान को जानकारी मिली कि पेशावर के बाड़ा शेखाल इलाके में बम निष्क्रिय करना है तो उन्होंने मुझसे कहा कि मैं अपने साथ कुछ लोगों को लेकर वहां के लिए रवाना हो जाऊं. लेकिन थोड़ी देर बाद वो खुद भी साथ चल पड़े, जबकि पहले वहां जाने का उनका कोई इरादा नहीं था.”

हुकम खान

हुकुम खान का संबंध पेशावर के मतनी इलाके से था.

हुकुम खान के बेटे अकरम खान का कहना है कि उन्हें इस बात पर भरोसा ही नहीं होता है कि उनके पिता इस दुनिया में नहीं रहे. हुकुम खान के दो बेटे भी पुलिस में कांस्टेबल हैं.

कर्मचारियों की किल्लत

उधर बीडीएस के प्रमुख एआईजी शफकत मलिक का कहना है कि हुकम खान ने कोई सुरक्षा वर्दी या बम सूट नहीं पहना हुआ था.

उन्होंने कहा कि अगर हुकम खान बम सूट पहने हुए होते तो भी वो नहीं बचते क्योंकि इस धमाके में पांच किलोग्राम विस्फोटक सामग्री इस्तेमाल की गई थी जबकि बम सूट सिर्फ दो से ढाई किलोग्राम सामग्री वाले विस्फोट से बचाने में ही सक्षम है.

उन्होंने बताया कि बम निरोधक दस्ता पहले ही कर्मचारियों की कमी से जूझ रही है. ऐसे में हुकम खान जैसे काबिल अफसर की मौत उनके विभाग के लिए एक बड़ी क्षति है.

एआईजी का कहना है कि पेशावर और प्रांत के दूसरे जिलों में सुरक्षा की स्थिति खराब होने की वजह से बम निरोधक दस्तों पर बेहद दबाव है.

खैबर पख्तून ख्वाह पाकिस्तान के उन इलाकों में शामिल हैं जहां चरमपंथी का खासा दबदबा है और आए दिन वहां विस्फोट होते रहते हैं.

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