सू ची बन सकती हैं राष्ट्रपति: थीन सीन

थ्येन सेन

बर्मा के राष्ट्रपति थीन सीन ने बीबीसी से कहा है कि अगले चुनाव में देश के लोग यदि विपक्ष की नेतां आंग सान सू ची को राष्ट्रपति बनाना चाहेंगे तो वे इस फैसले का सम्मान करेंगे.

बीबीसी संवाददाता स्टीफन सकूर से न्यूयॉर्क में बात करते हुए थीन सीन ने ये भी कहा कि वो एक सहयोगी के तौर पर आंग सान सू ची का आदर करते हैं.

इससे दो दिन पहले ही थीन सीन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए बर्मा में सुधारों को अपरिहार्य बताया था.

थीन सीन, बर्मा की दमनकारी सैन्य सरकार में बीते दो दशकों से बड़ा कद रखते हैं. लेकिन अब वे देश में राजनीतिक सुधारों के पुरोधा बन गए हैं.

उन्होंने बीबीसी से कहा कि बर्मा के लोग तानाशाही को लोकतंत्र में बदलता देखना चाहते हैं.

क्या वो पूर्व राजनीतिक कैदी आंग सान सू ची को बर्मा के अगले राष्ट्रपति के तौर पर स्वीकार करेंगे, ये पूछे जाने पर थीन सीन ने कहा कि ये लोगों की इच्छा पर निर्भर है.

उन्होंने कहा कि, "लोग यदि सू ची को स्वीकार करेंगे तो मुझे भी उन्हें स्वीकार करना होगा, हम साथ मिलकर काम कर रहे हैं."

थीन सीन के सुधारवादी संदेश ने ओबामा प्रशासन को बर्मा के खिलाफ कारोबारी प्रतिबंधों को ढिलाई देने के लिए प्रोत्साहित किया है.

सेना का आधिपत्य

बर्मा का संविधान, अब तक सीधे सत्ता चलाने वाले सैन्य शासकों ने तैयार किया था और इसे वर्ष 2008 में लागू किया गया था.

इसके तहत, संसद के दोनों सदनों और राज्यों की विधान परिषदों में 25 फीसदी सीटें सेना के लिए आरक्षित की गई हैं.

आंग सान सू ची को बर्मा की सैन्य सरकार ने उनके ही घर में कई वर्षों तक नज़रबंद रखा था.‎ इसी साल अप्रैल में उन्होंने संसदीय चुनाव जीतने के बाद संसद की सदस्यता भी हासिल की.

इस वर्ष बर्मा में हुए उपचुनावों में सू ची समेत उनकी पार्टी नैशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) के 43 सासंद चुने गए थे.

करीब 50 वर्षों तक सैन्य शासन के अधीन रहे बर्मा में पिछले वर्ष नागरिक सरकार ने सत्ता संभाली और तभी से देश में राजनीतिक और आर्थिक सुधारों की शुरुआत हुई.

इन आम चुनावों के बाद भी सेना और उसके प्रभाव में चलने वाली पार्टी, यूनियन सॉलिडैरिटी ऐन्ड डेवलपमेंट पार्टी, संसद की 80 फीसदी सीटों पर काबिज है.

बर्मा की सरकार ने हाल में कई राजनीतिक और सामाजिक सुधार किए हैं. अमरीका समेत पश्चिमी देशों के दबाव के बाद सैकड़ों राजनीतिक बंदियों को भी रिहा किया गया है.

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