क्या अमरीका ने सोवियत 'जनसंहार' को छिपाया था?

काटिन
Image caption काटिन जनसंहार के दौरान पोलैंड के हज़ारों सैनिक मार दिए गए थे

क्या वर्ष 1940 में हुए काटिन जनसंहार को दबाने में अमरीका ने तत्कालीन सोवियत संघ की मदद की थी? अब जो नए सबूत सामने आ रहे हैं, उससे तो इस विचार को बल मिलता नज़र आ रहा है.

वर्ष 1940 में पोलैंड के हज़ारों सैनिकों की हत्या कर दी गई थी. समाचार एजेंसी एपी का कहना है कि नए जारी किए गए दस्तावेज़ों से इन संदेहों को बल मिलता है कि अमरीका युद्ध के समय अपने सहयोगी जोसेफ स्टालिन को नाराज़ नहीं करना चाहता था.

अमरीकी नेशनल आर्काइव ने हाल में दस्तावेज़ सार्वजनिक किए हैं जिनसे इस पूरे मुद्दे पर दोबारा ध्यान केंद्रित हुआ है.

स्टालिन के आदेश पर 22 हज़ार से ज़्यादा पोलैंड निवासी मारे गए थे. सोवियत रूस ने वर्ष 1990 में इस घटना की ज़िम्मेदारी कबूल की थी, हालाँकि पाँच दशक तक वो इसकी ज़िम्मेदारी नाज़ियों पर थोपता रहा.

ज़िम्मेदारी

दस्तावेज़ों से ये पता चलता है कि वर्ष 1943 में अमरीकी युद्धबंदियों ने ऐसे कोड वाले संदेश अपने देश भेजे थे, जिनमें कहा गया था कि उन्हें पश्चिमी रूस में स्मोलेंस्क के नज़दीक काटिन जंगलों में ले जाया गया था, जहाँ सड़े हुए शवों को देखा था.

अमरीकी और ब्रितानी युद्धबंदियों को वहाँ उनकी इच्छा के विपरीत नाज़ी लेकर गए थे.

वहाँ की स्थिति देखकर दो अमरीकी कैप्टन डोनाल्ड बी स्टीवर्ट और लेफ़्टिनेंट कर्नल जॉन वैन व्लिएट ये समझ गए थे कि हत्याएँ तत्कालीन सोवियत संघ की ओर से की गई है न कि नाज़ियों की ओर से, जिनका वर्ष 1941 तक उस इलाक़े पर नियंत्रण नहीं था.

इनमें से एक कैप्टेन डोनाल्ड बी स्टीवर्ट ने वर्ष 1950 में एक बयान दिया और इसकी पुष्टि की कि उन्होंने कोड में एक संदेश भेजा था, जिसका सार ये था कि काटिन जनसंहार के बारे में जर्मनी का दावा उनके और वैन व्लिएट की नज़र में सही लगता है.

वॉशिंगटन से बीबीसी संवाददाता किम घटास के अनुसार एक हज़ार से ज़्यादा पन्ने के इस दस्तावेज़ से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि अमरीका इस मामले में कब और क्या जानता था.

Image caption काटिन जनसंहार में हज़ारों पोलिश मारे गए थे

लंबे समय तक यही माना जाता रहा था कि अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति फ़्रैंकलिन डी रूजावेल्ट इस घटना को लेकर स्टालिन की ओर से पेश किए गए तर्क पर सवाल नहीं उठाना चाहते थे. जर्मनी और जापान को मात देने के लिए रूजावेल्ट स्टालिन को सहयोगी मान रहे थे.

एपी की रिपोर्ट के मुताबिक़ इस जनसंहार से संबंधित सूचना अमरीका के शीर्षस्थ स्तर पर दबाई गई थी.

काटिन मामले के विशेषज्ञ एलेन पॉल का कहना है कि वर्ष 1951-52 में कांग्रेस की सुनवाई की रिकॉर्ड में कुछ सामग्रियाँ शामिल नहीं हैं. ये सुनवाई जनसंहार की जाँच के लिए हुई थी.

इससे ऐसा लगता है कि ये जानकारियाँ जान-बूझकर छिपाई गई थी.

रिपोर्ट

नए दस्तावेज़ में वो रिपोर्ट भी शामिल है, जो ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने अमरीकी राष्ट्रपति रूजावेल्ट को भेजी थी. इस रिपोर्ट में भी सोवियत संघ की ग़लती की ओर इशारा था. हालाँकि चर्चिल ने भी स्टालिन के दावे को चुनौती नहीं दी थी.

एपी के मुताबिक़ ये रिपोर्ट निर्वासित पोलैंड की सरकार को ब्रिटेन के राजदूत ओवेन ओ मैलेन ने लिखी थी.

ओ मैलेन ने लिखा था- अब कई नकारात्मक सबूत मौजूद हैं. जिनका मिला-जुला प्रभाव रूस के उस दावे पर गंभीर संदेह उठाना है, जिसमें रूस जनसंहार की ज़िम्मेदारी नहीं लेता.

अप्रैल 1940 में काटिन और आसपास के इलाक़ों में स्टालिन के आदेश पर एनकेवीडी सीक्रेट पुलिस ने लोगों को मारा था.

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