अवैध आप्रवासियों का मुफ़्त इलाज नहीं

स्पेन में विरोध प्रदर्शन

मंदी से जूझ रहे स्पेन में खर्च कटौती के कारण लोगों में काफी रोष है.

क्या ग़ैर-क़ानूनी रूप से रहने वाले अप्रवासियो को जन स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिए. स्पेन के नए क़ानून ने इस बहस को दोबारा शुरू कर दिया है.

स्पेन में सितंबर में लागू हुए नए क़ानून के तहत जिन अप्रवासियों के पास निवास प्रमाण पत्र नहीं है उनका अब सरकारी अस्पतालों और दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ़्त इलाज नहीं हो सकेगा.

हालाकि नए क़ानून के बाद भी 18 साल से कम उम्र वाले, गर्भवती महिलाओं और आपात स्थिति में ये सेवाएं ग़ैर-क़ानूनी रूप से रह रहे अप्रवासियों को मिलती रहेगी.

लेकिन डॉक्टरों का एक समूह और स्वास्थ्य सेवा के लिए काम करे लोग इस क़ानून का विरोध कर रहें हैं.

आर्थिक मंदी से जूझ रहे स्पेन का ये बहुत ही विवादास्पद क़ानून है.

मैड्रीड स्थित बीबीसी संवाददाता टॉम बरीज ने स्पेन में रहे रहे एक अप्रवासी से मुलाक़ात की और उनसे इस क़ानन के बारे में जानना चाहा.

"मुझे लग रहा है कि मैं जल्दी मर जाऊंगा क्योंकि इतनी महंगी दवाएं मैं नहीं ख़रीद सकता."

स्पेन में ग़ैर-क़ानूनी रूप से रहने वाले प्रिंस

42 साल के प्रिंस की पैदाइश नाइजीरिया में हुई थी और वो पिछले 15 वर्षों से स्पेन में ग़ैर-क़ानूनी रूप से रह रहें हैं.

प्रिंस एचआईवी के शिकार हैं और हर महीने हज़ारों रूपयों की दवा लेते हैं लेकिन स्पेन के नए क़ानून के तहत अब उन्हें ये दवाएं मुफ़्त में नहीं मिलेंगी.

प्रिंस अपनी परेशानी का ज़िक्र करते हुए कहते हैं, ''मुझे लग रहा है कि मैं जल्दी मर जाऊंगा क्योंकि इतनी महंगी दवाएं मैं नहीं ख़रीद सकता.''

स्पेन में 'डॉक्टर्स ऑफ़ द वर्ल्ड' नाम की एक मेडिकल संस्था इस नए क़ानून का विरोध कर रही है.

क़ानून का विरोध

इस क़ानून का विरोध करने ले लिए संस्था एक हस्ताक्षर अभियान चला रही है. इस संस्था से जुड़े रिकार्डो अंगोरा के अनुसार लगभग डेढ़ लाख ऐसे लोग हैं जिनके पास पर्याप्त दस्तावेज़ नहीं हैं जिसके कारण अब उन्हें स्वास्थ्य सेवा नहीं मिल सकेगी.

"अगर देश की आर्थिक हालत ठीक नहीं है तो हम किसी को कोई विशेष सुविधा देने की बात नहीं कर रहे हैं, हमलोग सिर्फ़ बहुत ही बुनियादी स्वास्थ्य सेवा देने की बात कर रहें हैं जिसे ज़रूर दिया जाना चाहिए."

डॉक्टर्स ऑफ़ द वर्ल्ड के रिकार्डों अंगोरा

लेकिन कुछ लोग ये सवाल भी पूछ रहे हैं कि जो लोग देश में ग़ैर-क़ानूनी तौर पर रह रहे हैं और कोई कर नहीं दे रहें आख़िर उन्हें मुफ्त स्वास्थ्य सेवा क्यों मिलनी चाहिए. इसके जवाब में अंगोरा कहते हैं, ''अगर देश की आर्थिक हालत ठीक नहीं है तो हम किसी को कोई विशेष सुविधा देने की बात नहीं कर रहे हैं, हमलोग सिर्फ़ बहुत ही बुनियादी स्वास्थ्य सेवा देने की बात कर रहें हैं जिसे ज़रूर दिया जाना चाहिए.''

कटौती का असर ?

हाल ही में अपने एक बयान में स्पेन के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि नए क़ानून का मक़सद सिर्फ़ पैसे बचाना नहीं था, बल्कि यह यूरोपीय स्वास्थ्य मानकों पर आधारित था और इसका उद्देश्य था कि जिस तरह से स्पेन में विदेशियों को स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती हैं उसी तरह विदेश में स्पेनवासियों को भी मिले.

हालाकि अभी इस बात पर भी मतभेद बना हुआ है कि नए का़नून को किस तरह से लागू किया जाएगा क्योंकि स्वास्थ्य सेवा की ज़िम्मेदारी प्रांतीय सरकारों पर है और पांच प्रांत की सरकारों ने कह दिया है कि वो नए का़नून को लागू नहीं करेंगीं.

डॉक्टरों के अलावा कई दूसरे लोग भी स्पेन में सभी के लिए स्वास्थ्य सेवा की वकालत कर रहें है लेकिन सच्चाई यह भी है कि आर्थिक मंदी के कारण ख़र्च में हो रहे कटौते का असर स्पेन के हर क्षेत्र पर पड़ेगा और स्पेन में रहने वाले सभी लोग इससे प्रभावित होंगे.

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