जब नौजवानों से ज्यादा होंगे बूढ़े

अफ़ग़ानिस्तान में एक वृद्ध महिला
Image caption संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक बूढ़े लोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए नई नीतियां अपनानी होंगी

संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया भर में बूढ़े लोगों की तेजी से बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है जिसके खास कर विकासशील देशों को गंभीर नतीजे भुगतने होंगे.

संयुक्त राष्ट्र के जनसंख्या कोष की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि दस साल के भीतर दुनिया भर में 60 साल से ज्यादा उम्र वाले लोगों की संख्या एक अरब के आंकड़े को पार कर जाएगी.

रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि 2050 तक दुनिया में पंद्रह साल से कम उम्र वाले बच्चों की संख्या उतनी नहीं, होगी जितने 60 वर्षीय लोग होंगे.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि विश्व को स्वास्थ्य देखभाल और रोजगार को लेकर नई नीति और सोच अपनानी होगी ताकि 21वीं सदी में जनसंख्या से जुड़ी वास्तविकताओं का सामना किया जा सके.

चुनौती बनते बूढ़े

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट कहती है कि उम्रदराज लोगों की बढ़ती संख्या के साथ उनकी स्वास्थ्य देखभाल, पेंशन और कानून संरक्षण जैसे मुद्दे भी जुड़े हैं.

हालांकि कई देशों ने बूढ़े लोगों की बढ़ती आबादी को देखते हुए कई नीतियां और कानून बनाए हैं लेकिन अभी इस दिशा में और कदम उठाने की जरूरत है.

इस रिपोर्ट की भूमिका में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने लिखा है, “इसके गंभीर आर्थिक और सामाजिक परिणाम होंगे जिनका दायरा किसी एक उम्रदराज व्यक्ति या उसके परिवार से कहीं व्यापक होगा. ये समाज और विश्व समुदाय को व्यापक रूप में प्रभावित करेगा.”

जिन पंद्रह देशों में उम्रदराज लोगों की संख्या एक करोड़ से ज्यादा है उनमें सात विकासशील देश हैं. 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के हर तीन लोगों में से दो विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों में रह रहे हैं. रिपोर्ट का अनुमान है कि 2050 में हर पांच बूढ़ों में से चार इन देशों में रहेंगे.

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